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गोविंदाचार्य बोले- हिन्दू रोहिंग्याओं को भारत में मिले शरण, मुस्लिम रोहिंग्या देश के लिए समस्या

गोविंदाचार्य ने पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की गुजारिश की थी।
जाने माने चिंतक के. एन. गोविंदाचार्य। (Photo: PTI)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विचारक के एन गोविंदाचार्य ने विशिष्ट और गैर विशिष्ट धर्मों के बीच अंतर भी स्पष्ट करते हुए कहा है कि केवल ‘हिंदू रोहिंग्याओं’ को ही भारत में शरण देने पर विचार किया जाना चाहिए क्योंकि उनके पास शरण लेने का कोई कोई अन्य स्थान नहीं है। म्यामांर के राखिन में हाल के दिनों में भड़की हिंसा पर प्रतिक्रिया देते हुए संघ नेता ने कहा कि वहां सिर्फ मुस्लिम रोहिंग्या ही नहीं बल्कि हिन्दू रोहिंग्या भी निशाने पर हैं और हिंसा के शिकार हो रहे हैं। हिंसा की वजह से वे लोग भी विस्थापित हो रहे हैं।

गोविंदाचार्य ने पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की गुजारिश की थी। अपनी याचिका में गोविंदाचार्य ने दावा किया था कि रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को भारत में रहने की इजाजत देना एक और विभाजन को बुलावा देने जैसा है। हालांकि, न्यूज 18 से बात करते हुए गोविंदाचार्य ने कहा कि हिन्दू रोहिंग्या शरणार्थियों के साथ स्थिति अलग है, वो दार्शनिक और वैचारिक रूप से भारतीय जमीन से जुड़े हुए हैं।

जब उनसे हिन्दू रोहिंग्याओं के बारे में भारत के रुख के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस सवाल पर मैं अपना वैचारिक रुख अपनाता हूं। जैसे हम सामी और गैर-यहूदी धर्मों को एक समान नहीं मान सकते। सामी धर्म के पास यहूदी सोच है और वे वैश्विक भाईचारे में विश्वास करते हैं। हम उसे अपने जोखिम पर नजरअंदाज कर सकते हैं। लेकिन हम हिन्दू रोहिंग्याओं और मुस्लिम रोहिंग्याओं को एक समान नहीं देख सकते।

उन्होंने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि मुस्लिम रोहिंग्या कैसे जम्मू-कश्मीर पहुंचे। संघ नेता ने कहा कि बंगाल के लगभग 9 जिले मुस्लिम बहुल क्षेत्र में तब्दील हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से धर्म प्रभावित होता है, उसी तरह से हमारे जीवन के सांसारिक पहलू भी प्रभावित होते हैं।

श्रीलंका में तमिल विवाद का हवाला देते हुए गोविंदाचार्य ने कहा कि पिछले तीन दशकों से वैश्विक परिदृश्य बदल गया है और इस्लामिक आतंकवाद वैश्विक खतरे के रूप में उभर रहा है। गोविंदाचार्य ने कहा, “इस मुद्दे को आसानी से नहीं देखा जा सकता है या सिर्फ मानवीय आधार या मानवाधिकारों के परिप्रेक्ष्य में भी इसे नहीं देखा जा सकता है।” उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति भी हमारी कुछ जिम्मेदारी बनती है।

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