April 26, 2017

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संघ से जुड़े संगठन ने नई शिक्षा नीति के लिए भेजी ‘सिफारिशें’- इंग्लिश और भारत का अपमान करने वाला पाठ्यक्रम बंद करो

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़े एक संगठन ने मिनिस्ट्री ऑउ ह्यूमन रिसोर्स डिवेलपमेंट को नई शिक्षा नीति के लिए कुछ 'सिफारिशों' भेजी हैं।

Author October 21, 2016 12:28 pm
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर। (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) से जुड़े एक संगठन ने मिनिस्ट्री ऑउ ह्यूमन रिसोर्स डिवेलपमेंट (HRD) को नई शिक्षा नीति के लिए कुछ ‘सिफारिशों’ भेजी हैं। सिफारिशें भेजने वाले संगठन का नाम शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (SSUN) है। संगठन चाहता है कि जल्द लागू होने वाली नई शिक्षा नीति में उसकी सिफारिशों पर गौर किया जाए। सिफारिशों में कहा गया है कि स्कूल में उच्च शिक्षा तक मातृ भाषा में ही बच्चों को सभी निर्देष दिए जाएं। विदेशी भाषाओं को भारतीय भाषाओं की जगह पढ़ने का विकल्प (सभी स्तरों पर) खत्म किया जाए। साथ ही इंग्लिश को किसी भी स्तर पर जरूरी बनाए ना रखने को भी कहा गया है। कहा गया है कि यूजीसी से स्कॉलरशिप भी उन्हीं लोगों को मिले जो देश हित में रिसर्च करना चाहते हों। इसके अलावा भारत की संस्कृति, परंपरा, संप्रदायों, विचार, प्रख्यात हस्तियों का अपमान करने वाले पाठ्यक्रम को भी किताबों से हटाने के लिए कहा गया है।

वीडियो: RSS से जुड़े संगठन ने HRD मंत्रालय से कहा- “अंग्रेज़ी और भारत का अपमान करने वाला पाठ्यक्रम बंद करो”

SSUN के कुछ नेता HRD मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर से मिल भी चुके हैं। उन्होंने ही ये सिफारिशें जावड़ेकर को सौंपी थी। इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक, 14 अक्टूबर को HRD मिनिस्ट्री की तरफ से एक ईमेल SSUN को भेजा गया जिसमें लिखा था कि उनकी सिफारिशों को देख लिया गया है और नई शिक्षा नीति को बनाते वक्त उनपर ध्यान दिया जाएगा। SSUN के फाउंडर और सचिव अतुल कोठारी ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए कहा, ‘वह (जावड़ेकर) हमारी सिफारिशों पर गौर जरूर करेंगे। उन्होंने कुछ सिफारिशों की तारीफ भी की थी।’ कोठारी RSS से जुड़े रहे हैं। वह संघ के प्रचारक भी रहे हैं। SSUN के दूसरे फाउंडर दीनानाथ बत्रा है। वह भी संघ के प्रचारक भी रह चुके हैं।

वीडियो: Top 5 News

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First Published on October 21, 2016 7:37 am

  1. V
    Vijay
    Oct 21, 2016 at 3:57 am
    कभी कभी तो आर एस एस वाले मूर्खों वाली बातें करते हैं. जहां सारे देश ( चीन और योरोप समेत ) अधिक से अधिक अंग्रेज़ी भाषा का उपयोग कर रहे हैं वहीं ये खूसट अंग्रेज़ी हटाने की बात कर रहे हैं.
    Reply
    1. R
      Rajendra Vora
      Oct 21, 2016 at 7:17 am
      मूर्खो जैसी बात आप कर रहे हो. किसी चीनी को चीनी के साथ अंग्रेजी में बात करते देखा हे? वह सिर्फ प्रदेश से ही अंग्रेजी में बात करते हे.
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    2. S
      suresh chandra
      Oct 21, 2016 at 12:12 pm
      हमे किसी भाषा का विरोध नहीं करना चाहिए बल्कि जितनी भाषा हम सीख सकते है सिखनी चाहिए परंतु हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओ का प्रयोग सरकारी काम काज मे बढ़ाना चाहिए ।
      Reply

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