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दिल्ली के हंसराज कॉलेज में कार्यशाला करने जा रहा था आरएसएस, वामपंथियों के डर से अंतिम क्षण में बदला वेन्यू

सेमिनार में राजनीति विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय संबंध, इतिहास, पुरातत्व विज्ञान, विज्ञान, समाजशास्त्र, संचार, थियेटर, साहित्य और अर्थशास्त्र पर चर्चा होनी है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत। (पीटीआई फोटो)

दिल्ली के हंसराज कॉलेज में आरएसएस का दो दिन का सेमिनार होना था। 25-26 मार्च को होने वाले सेमिनार का आखिरी वक्त पर वेन्यू बदल दिया गया। हंसराज कॉलेज में इस सेमिनार ‘ज्ञान समागम’ में सरसंघ चालक मोहन भागवत, उनके डिप्टी सुरेश सोनी और कृष्ण गोपाल देशभर के 600 आध्यापकों को संबोधित करने वाले थे। इंडिक इंटलेक्चुअल ईकोसिस्टम पर होने वाले इस सेमिनार की पूरी तैयारियां हो चुकी थीं। पर्चे भी छप गए थे और बंट भी गए थे। आखिरी वक्त पर संघ ने सुझाव दिया कि कुछ लोग कैंपस में प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं और कई अलग-अलग ग्रुप्स को प्रदर्शन के लिए इनवाइट किया गया है। इसमें वामपंथी भी शामिल हैं। इन हालात को देखते हुए आखिरी वक्त पर संघ ने सेमिनार का वेन्यू बदल दिया और अब सेमिनार दिल्ली में रोहिणी के एक ऑडिटोरियम में हो रहा है।

इस सेमिनार में देशभर के विश्वविद्यालयों के करीब 600 शिक्षक औपनिवेशिक तरीकों को पीछे छोड़कर ज्ञान प्रदान करने और छात्रों में राष्ट्रीय मूल्य डालने के बारे में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से सीखने वाले हैं। सेमिनार में शिक्षण प्रणाली को औपनिवेशिक मूल्यों से कैसे मुक्त करें और उनमें राष्ट्रीय मूल्य कैसे स्थापित करें सहित अन्य विषयों पर होने वाली परिचर्चा में संघ प्रमुख मोहन भागवत और इसके संयुक्त महासचिव कृष्ण गोपाल सहित अन्य लोग शामिल होंगे। कार्यक्रम की अवधारणा नोट में कहा गया है कि विदेशी तत्वों ने भारत की हजारों साल पुरानी शिक्षा प्रणाली और इसके केंद्रों को नष्ट कर दिया, हमारे पुस्तकालयों को जला दिया और भारतीय ज्ञान परंपरा का अपमान किया। इसमें कहा गया है कि अंग्रेजों ने एक ऐसी शिक्षा प्रणाली स्थापित की जिसमें लोगों का भारतीय शिक्षा प्रणाली से भरोसा उठ गया।

इसमें कहा गया है कि भारत को एक सामाजिक एवं बौद्धिक नजरिए को विकसित करना होगा जो इसकी मौजूदा पीढ़ी की समस्याओं को हल करने में सक्षम होगा। हमें छात्रों को औपनिवेशिक मूल्यों से मुक्त करना होगा और उनमें राष्ट्रीय मूल्य डालना होगा। संघ से जुड़े करीब 600 शिक्षक और विभिन्न विश्वविद्यालयों से संघ कार्यकर्ता इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसमें राजनीति विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय संबंध, इतिहास, पुरातत्व विज्ञान, विज्ञान, समाजशास्त्र, संचार, थियेटर, साहित्य और अर्थशास्त्र पर चर्चा होगी।

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