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मोदी को शाबाश तो गोरक्षकों को मिला ‘भागवत बल’ : संघ प्रमुख

मोहन भागवत ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि देश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता हुआ दिख रहा है।
Author नागपुर | October 12, 2016 05:14 am
मोहन भागवत के साथ पीएम मोदी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि भारत पिछले दो साल से आगे बढ़ रहा है। लोगों को विश्वास है कि यह अच्छा करेगा। वहीं उन्होंने राजनीतिक हितों की वजह से भावनात्मक एकीकरण को खतरे में डालने के खिलाफ विपक्ष और आलोचकों को चेताया। वो मंगलवार को यहां आरएसएस के 91वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।  मोहन भागवत ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि देश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता हुआ दिख रहा है। नीतियों ने उस निराशा को दूर किया है जो पहले थीं। मोदी सरकार 2014 में सत्ता में आई थी।

अपने घंटे भर के भाषण में आरएसएस प्रमुख ने सस्ती शिक्षा पर काफी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह समाज को सशक्त बनाने का औजार है। नई शिक्षा नीति का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है। अब समय आ गया है कि इसके नतीजे मिलें। उन्होंने रेखांकित किया कि इस संबंध में एक रिपोर्ट जमा की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह सरकार पर है कि वह यह देखे कि इसकी सिफारिशें शिक्षा प्रणाली में वांछित बदलाव ला पाएंगी या नहीं। कथित तौर पर शिक्षा नीति को नियमन करने के लिए काम करने को लेकर विपक्ष की ओर से अक्सर आरएसएस की जानी वाली आलोचना पर उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व संगठन स्वतंत्र शिक्षा प्रणाली चाहता है, जिसका संचालन समाज करे। बहरहाल, शिक्षा का व्यावसायीकरण खतरनाक और इसे रोकने के लिए सरकारी दखल जरूरी है। भागवत ने अपने भाषण में सामाजिक और धार्मिक व्यक्तियों जैसे अभिनव गुप्त, रामनुज आचार्य, गुलाब राव महाराज और सिख गुरु गोबिंद सिंह का नाम भी लिया और लोगों से उनके आदर्शों का अनुसरण करने को कहा। उन्होंने शायर इकबाल की प्रसिद्ध पंक्तियों ‘कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी’ का उद्धरण किया। उन्होंने दावा किया कि भारतीय सभ्यता ही हिंदुत्व है।

भागवत ने कश्मीर के मुद्दे पर कहा, ‘मीरपुर, मुजफ्फराबाद, गिलगित और बाल्टिस्तान सहित समूचा कश्मीर भारत का अविभाज्य एवं अभिन्न हिस्सा है।’ उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू और लद्दाख के प्रति जम्मू कश्मीर सरकार और राज्य प्रशासन का भेदभाव वाला रवैया खत्म होना चाहिए। भागवत ने कहा, ‘जब जम्मू कश्मीर सरकार और राज्य प्रशासन राष्ट्रवादी भावना के साथ तथा स्पष्टता, दूरदर्शिता, निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ अपना दायित्व निभाएंगे तभी राज्य के लोग समानांतर रूप से विजय और विश्वास की भावना महसूस करेंगे और घाटी में लोगों के समावेश की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।’ उन्होंने कहा, ‘उन क्षेत्रों में राष्ट्रवादी गतिविधियों और शक्तियों को बढ़ावा देने, मजबूत करने और स्थापित करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार को इस भावना के साथ काम करना चाहिए।’ जम्मू कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए भागवत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक कदम और सरकार का मजबूत संकल्प स्वागतयोग्य पहल है। लेकिन इन्हें दृढ़ता से लागू किए जाने की जरूरत है।

भागवत ने देश के लोगों में विश्वास की भावना भरने के लिए भी केंद्र सरकार की तारीफ की। उन्होंने दावा किया, ‘सरकार की ओर से विकास कार्यों में तेजी लाए जाने से देश के लोगों के मन से निराशा की भावना निकल गई है।’ आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘सरकार ने विश्वास बहाली के कुछ कदम उठाए हैं। इसलिए राष्ट्र आगे बढ़ता प्रतीत होता है।’ उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो इसे शक्ति का सोपान बनाने में विफल रहे, वे राजनीतिक लाभ के लिए रणनीतियां बनाने में व्यस्त हैं। भागवत ने कहा कि वे (विपक्ष) सरकार और प्रशासन की खामियां और त्रुटियां ढूंढ़ रहे हैं। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि घटिया तरकीबों का अपनाया जाना गंभीर चिंता की बात है। उन्होंने लोगों को आगाह किया कि वे दुनिया में काम कर रहे कट्टरपंथियों, चरमपंथियों, विभाजक और स्वार्थी ताकतों से सतर्क रहें।  पूर्व नौकरशाह सत्यप्रकाश राय इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। राय भारतीय आर्थिक सेवा (आइईएस) के 1976 बैच के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय परिवहन और जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी और पार्श्व गायक अनुराधा पौडवाल सहित अन्य हस्तियां इस अवसर पर मौजूद थीं।

 

 

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