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इमाम ने बीजेपी नेता योगेश वार्ष्णेय का सिर कलम करने वाले को 22 लाख रु देने का किया ऐलान, योगेश ने ममता बनर्जी के सिर पर रखा था इनाम

योगेश वार्ष्णेय ने ममता बनर्जी का सिर कलम करने वाले को 11 लाख रुपए इनाम की बात कही थी।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (फाइल फोटो)

कोलकाता के टीपू सुल्तान शाही मस्जिद के इमाम ने भारतीय जनता युवा मोर्चा के योगेश वार्ष्णेय का सिर कलम करने वाले को 22 लाख रुपए देने का ऐलान किया है। आपको बता दें कि बुधवार को योगेश वार्ष्णेय ने ममता बनर्जी का सिर कलम करने वाले को 11 लाख रुपए इनाम की बात कही थी। इस मुद्दे को लेकर आज संसद में में भी खूब हंगामा हुआ। योगेश अलीगढ़ में बीजेपी यूथ विंग से जुड़े हुए हैं। उनका एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में योगेश कहते हैं, ‘उस वीडियो को देखकर कुछ और विचार नहीं आया बस जो कोई ममता बनर्जी का सिर काटकर यहां रख देगा मैं उसे 11 लाख रुपए दूंगा। ममता बनर्जी का सिर काटकर ले आओ 11 लाख रुपए मैं उसे दिलवाउंगा। मैं दूंगा उसे 11 लाख रुपए।’

इसी वीडियो को देख मौलाना नूर-उर-रहमान ने योगेश के सिर पर 22 लाख का इनाम रख दिया। मौलाना का कहना है कि ममता बनर्जी हमारी सम्माननीय नेता हैं और मैं उन्हें अपनी बहन मानता हूं। मौलाना के अनुसार उनकी बहन के बारे में ऐसी बातें बोलने वालें का सिर कलम करने के लिए मैं 22 लाख रुपए दूंगा।

योगेश वार्ष्णेय का कहना है कि उसने एक वीडियो देखा है। उसमें हनुमान जयंती के दिन ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे लोगों पर लाठी चार्ज किया गया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, योगेश ने कहा कि बंगाल के बीरबम्ब जिले में लोगों को बुरी तरह पीटा गया, लोगों पर लाठीचार्ज हुआ जो कि गलत था। योगेश ने ममता पर आरोप लगाया कि वह मुसलमानों को खुश करने के लिए हिंदुओं के साथ अन्याय करती हैं।

VIDEO: ममता बनर्जी बोलीं- “पीएम मोदी को जाना होगा, देश को बचाने के लिए बनाई जाए राष्ट्रीय सरकार”

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  1. चक्रपाणि पांडेय
    Apr 12, 2017 at 8:00 pm
    धार्मिक सद्भाव इस राष्ट्र कि पहचान है, अत सभी नेताओ व धार्मिक नेताओ से अनुरोध है की हिन्सा की भाषा न बोले. सभी गांधी जी के दर्शन को जिए व उसका प्रचार प्रसार करे ताकि देश में सौहार्दपूर्ण वातावरण उत्पन्न हो सके व देश उन्नति के मार्ग पर अग्रसित हो सके. गांधी जी इस राष्ट्र के प्राण ःहै.
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    1. चक्रपाणि पांडेय
      Apr 12, 2017 at 7:37 pm
      क्या मौलाना का 22लाख का पुरस्कार रखना धर्मनिरपेक्षता की मिसाल है? हिन्सा की आवाज कही से भी निकले निन्दनीय है. चयनात्मक विरोध भर्सनिय ःहै.गांधी जी के देश में एसि बाते अशोभनीय है. आज सभी को गांधी जी के मार्ग पर चलने की ज़रूरत है. बापू को मात्र 2अक्टुबर व 30जनवरी को ही याद किया जाता है. गांधी जी के दर्शन को पहली कक्षा से पाठ्यक्रम सम्मिलित करना चाहिए. इन बातों से सामाजिक समरसता को ठेस पहुचती ःहै.
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      सबरंग