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चुनाव से पहले एक कार्यक्रम में लखनऊ पहुंची रोहित वेमुला की मां, बोलीं- बीजेपी के खिलाफ प्रचार करूंगी

रोहित वेमुला की मां राधिका ने कहा कि वह दलित हैं और उनका बेटा भी दलित था।
Author October 9, 2016 09:49 am
रोहित की मां राधिका ने कहा कि कमीशन का काम उन कारणों का पता करना था जिससे तंग आकर रोहित ने सुसाइड किया लेकिन उन्होंने मुद्दा जाति की तरफ मोड़ दिया। (Source: Express file photo)

रोहित वेमुला की मां राधिका ने शनिवार (8 अक्टूबर) को कहा कि वह दलित हैं और उनका बेटा भी दलित था। राधिका ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा बनाए गए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग की जांच रिपोर्ट को गलत बताया। इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एके रूपनवाल द्वारा बनाई गई 41 पन्नों की उस रिपोर्ट में कहा गया था कि रोहित की मां ने अपने आपको दलित की तरह दिखाने की कोशिश की ताकि रिजर्वेशन का फायदा मिल सके। राधिका ने लखनऊ में कहा, ‘मैं दलित हूं और मेरा बेटा भी दलित था।’ इसके अलावा राधिका ने कमीशन की रिपोर्ट पर पक्षपात से भरी होने के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, बंडारू दत्तात्रेय, बीजेपी के MLC रामचंद्र राव, यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अप्पा राव और एबीवीपी के नेता सुशील कुमार को बचाने के लिए बनाई गई है। सुशील कुमार पर SC/ST एक्ट के तहत शिकायत दर्ज करवाई गई थी। राधिका के साथ रोहित का दोस्त प्रशांत भी था। उसने जानकारी दी कि वह FIR उसने ही करवाई थी। वहीं राधिका ने बीजेपी सरकार और RSS पर उनके बेटे और यूनिवर्सिटी के बाकी चार स्टूडेंट्स के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया। राधिका ने यह बातें यूपी में हो रहे आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के एक कार्यक्रम में कहीं। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय छात्र संसद द्वारा करवाया गया था। राधिका ने यह भी कहा कि वह चुनाव से पहले-पहले यूपी और पंजाब में बीजेपी के खिलाफ अभियान चलाएंगी। उन्होंने कहा, ‘मैं सबको बताऊंगी कि नरेंद्र मोदी और बीजेपी दलित विरोधी पार्टी हैं।’ हालांकि, राधिका ने यह भी कहा कि वह किसी भी पार्टी के समर्थन में आकर प्रचार नहीं करेंगी।

रोहित वेमूला की आत्महत्या की जांच के लिए गठित आयोग ने क्या कहा, देखिए वीडियो

गौरतलब है कि एके रूपनवाल ने अपनी 41 पन्नों की रिपोर्ट में कहा था कि रोहित वेमुला को यूनिवर्सिटी हॉस्टल से निकाला जाना “सबसे तार्किक” फैसला था जो यूनिवर्सिटी ले सकती थी। रूपनवाल के अनुसार 26 वर्षीय रोहित ने निजी हताशा के कारण आत्महत्या की, न कि भेदभाव किए जाने के चलते। रूपनवाल की रिपोर्ट के अनुसार रोहित की मां ने आरक्षण का लाभ लेने के लिए खुद को दलित बताया। रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी और केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने केवल अपना दायित्व निभाया और हैदराबाद यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कोई दबाव नहीं डाला गया था। रूपनवाल ने अपनी जांच रिपोर्ट अगस्त में जमा कर दी थी। रोहित वेमुला ने 17 जनवरी को आत्महत्या की थी। 28 जनवरी 2016 को मानव संसाधन मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था। रोहित की आत्महत्या के बाद हैदराबाद विश्वविद्यालय समेत पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए थे।

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First Published on October 9, 2016 9:49 am

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