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राइट टू प्राइवेसी : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोले केंद्रीय मंत्री- राष्ट्रहित से बड़ा कुछ नहीं

राष्ट्रीय सुरक्षा भी कोई चीज है। उन्होंने कहा कि जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा की आती है तो उनका निजी तौर पर मानना है कि राष्ट्रीय हित सबसे चीजों से ऊपर है।
Author August 31, 2017 21:09 pm
रिजीजू पहले भी कह चुके हैं कि भारत आए रोहिंग्या समुदाय के लोग अवैध अप्रवासी है और इन्हें वापस भेजा जायेगा।

निजता के अधिकार के बारे में उच्चतम न्यायालय के एक हालिया फैसले का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू ने आज कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और हित सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने यहां कहा, ‘‘मैं यहां उच्चतम न्यायालय के फैसले की आलोचना करने नहीं आया हूं। यह देश का कानून बन गया है। कानून और नीतियां बनाने की प्राथमिक जिम्मेदारी संसद के पास है। हमें देश के संप्रभु लोगों ने इसके लिए अधिकृत किया है। कानून बनाने की प्राथमिक जिम्मेदारी हमारे पास है।’’ केंद्रीय गृह राज्य मंत्री साइबर सुरक्षा पर एसोचैम द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उच्चतम न्यायालय ने 24 अगस्त को फैसला दिया था कि संविधान के भाग तीन में र्विणत कुछ शर्तों के साथ निजता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।

मंत्री ने कहा कि निजता काफी महत्वपूर्ण है और यह मौलिक अधिकार का एक अंतर्भूत हिस्सा है। उन्होंने कहा कि संविधान में वर्णित प्रावधानों की समीक्षा का कोई सवाल ही नहीं है और इसमें कोई संदेह नहीं है। इसके साथ ही निजता बिना शर्त नहीं हो सकती। राष्ट्रीय हित भी एक चीज होती है। राष्ट्रीय सुरक्षा भी कोई चीज है। उन्होंने कहा कि जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा की आती है तो उनका निजी तौर पर मानना है कि राष्ट्रीय हित सबसे चीजों से ऊपर है।

रिजीजू ने कहा कि जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना है, आधार के जरिए लाभ लोगों तक पहुंच सकती है, अगर भारतीय अर्थव्यवस्था को डिजिटल अर्थव्यवस्था में परिर्वितत कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल या साइबर मंच द्विपक्षीय समझौतों का एक अहम हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि साइबर सुरक्षा की चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने हम जितना खुलते जा रहे हैं, हम उतने ही संवेदनशील हो रहे हैं।

देखिए वीडियो - निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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  1. शाहिद
    Aug 31, 2017 at 11:37 pm
    रस्सी जल गई पर ऐंठन नहीं गईं ।
    (0)(0)
    Reply
    1. M
      manish agrawal
      Aug 31, 2017 at 10:12 pm
      BJP sabhi ko Supreme Court ke Order ka sammaan karne ki nasihat deti hai,lekin "Right to Privacy" ke matter main unke Minister criticize kar rahe hain , Rashtrhit ki baat kar rahe hain ! Supreme Court ke judges ko to shaayad Rashtrhit ki koyi parvaah hi nahi thee jo unhone "Right to Privacy" ka tohafaa Hindostan ke citizens ko diya ! Rashtrhit to sirf BJP leaders ka hi privilege hai ? Kiran Rijijuji ! Non-declared emergency to BJP Govt ne laga hi rakhi hai, yadi "Right to Privacy" itna hi buraa lag raha hai to Emergency declare kyon nahi kar dete ? ya phir Parliament se Act pass karwa kar "Right to Privacy" ko khatm kar do kyonki Rajsabha mai bhi NDA ki kaafi strength ho gayi hai ! Kiran Rijijuji ! ek baat achchhi tarah samajh lo ! Hindustani janta FAASIVAAD se nafrat karti hai aur jo janta ke haq ko kuchalna chahta hai, Public usko ukhaad fenkti hai ! Loksabha Election 2019 VVPAT yukt EVM machines se hoga aur Insha-allah ! BJP ko nestnabood kar Rahulji hamaare PradhanMantri banenge !
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