December 08, 2016

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शरणार्थियों एवं शरण मांगने संबंधी विधेयक पर लोस में होगा विचार

युद्धग्रस्त अफगानिस्तान से भारत में 32 हजार शरणार्थी आए। इसके अलावा तिब्बत, श्रीलंका, म्यांमार जैसे देशों से 1.75 लाख शरणार्थी भारत में हैं।

Author नई दिल्ली | November 13, 2016 14:08 pm
लोकसभा की कार्यवाही। (पीटीआई फाइल फोटो)

देश में शरणार्थियों एवं शरण मांगने वालों के लिए कानूनी ढांचे के अभाव में लोकसभा में पेश किए जाने वाले शरणार्थियों से संबंधित निजी विधेयकों के क्रम में हाल ही में राष्ट्रपति ने बीजद सांसद रविन्द्र कुमार जेना के ‘शरणार्थी और शरणस्थली की तलाश करने वालों के संरक्षण विधेयक’ 2016 को विचार के लिए मंजूरी प्रदान की है। बलूचिस्तान के निर्वासित नेता ब्रह्मदाग बुग्ती के भारत में शरण मांगने और देश में तिब्बती, चकमा, अफगान, बांग्लादेशी शरणार्थियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी के बीच इसे संसद सदस्यों की ओर से निजी स्तर पर महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

इससे पहले कांग्रेस सांसद शशि थरूर के निजी विधेयक ‘शरणार्थी विधेयक 2015’ और भाजपा के वरूण गांधी के ‘राष्ट्रीय शरणार्थी विधेयक 2015’ को लोकसभा में रखे जाने को विचारार्थ है। लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन में कहा गया है कि ‘राष्ट्रपति ने बीजद सांसद रविन्द्र कुमार जेना के निजी विधेयक शरणार्थी और शरणस्थली की तलाश करने वालों के संरक्षण विधेयक 2016 की विषय वस्तु से अवगत कराने पर संविधान के अनुच्छेद 117 के खंड 3 के अधीन विचार किए जाने की सिफारिश की है।’ जेना ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि इसमें शरणार्थियों और शरण मांगने वालों की सुरक्षा के लिए उपयुक्त एवं प्रभावी कानूनी ढांचा तैयार करने की बात कही गई है।

बीजद सांसद रवींद्र कुमार जेना ने कहा कि भारत में अभी शरणार्थी एवं शरण मांगने वालों के लिए कोई औपचारिक कानून नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे विधेयक में इस विषय से निपटने में शरणार्थी आयुक्त, शरणार्थी उपायुक्त के पद और शरणार्थी समिति के गठन के अस्थायी स्वरूप से जुड़ी कमियों को दूर करने का प्रयास किया गया है। जेना ने कहा कि इसके माध्यम से शरणार्थियों के लिए परिभाषित कानूनी दर्जा देने और उनके मानवीय संरक्षण का विधान किया गया है। उन्होंने कहा कि युद्धग्रस्त अफगानिस्तान से भारत में 32 हजार शरणार्थी आए। इसके अलावा तिब्बत, श्रीलंका, म्यांमार जैसे देशों से 1.75 लाख शरणार्थी भारत में हैं। ऐसे में यह विधेयक उनके अधिकारों के संरक्षण का काम करेगा।

इससे पहले राजनीतिक शरण देने के लिए कानून बनाने के संबंध में पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर के निजी विधेयक को लोकसभा में पेश करने की मंजूरी मिली थी। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही सांसद को सदन में निजी विधेयक पेश करने की इजाजत मिलती है। लोकसभा सचिवालय से मिली जानकारी के मुताबिक थरूर के बाद इसी विषय पर बीजद सांसद रव्रिंद कुमार जेना के निजी विधेयक को भी राष्ट्रपति ने अपनी मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लालकिले से बलूचिस्तान का मुद्दा उठाने के बाद निर्वासित बलूच नेता ब्रह्मदाग बुग्ती ने सितंबर महीने में भारत में शरण लेने के लिए अपना आवेदन जेनेवा में भारतीय मिशन को सौंपा था। इस निजी विधेयक के बारे में शशि थरूर ने कहा कि उनके निजी विधेयक को अगर मंजूरी मिल गई तब पहली बार शरणार्थी एवं शरण देने संबंधी कानून आकार ले सकेगा।

उन्होंने कहा कि इस समय भारत ने दो लाख से ज्यादा शरणार्थियों को आश्रय दे रखा है। हालांकि हमने न तो 1951 के संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी समझौते पर दस्तखत किए हैं और न यहां शरणार्थी संबंधी कोई घरेलू कानूनी ढांचा है। दुनिया की नजरों में यह ठीक नहीं है। इस विधेयक में शरण चाहने वाले एवं शरणार्थी की पहचान के लिए व्यापक मानदंड और शरणार्थी के विशिष्ट अधिकार एवं दायित्व दिए गए हैं। इसमें भारत में शरण मांगने का अधिकार सारे विदेशियों को होगा फिर उनकी राष्ट्रीयता, नस्ल, धर्म या जातीयता चाहे जो भी क्यों न हो और सरकार किसी ऐसे शरणार्थी को वापस उसके देश नहीं भेज सकती, जिसकी जिंदगी खतरे में हो। विधेयक में राष्ट्रीय शरणार्थी आयोग के गठन का प्रावधान है, जो शरण संबंधी सारे आवेदन लेगा और अपना फैसला सुनाएगा।

भारत ने पीड़ित समुदायों के लिए संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले देशों से ज्यादा काम किया है । यदि विधेयक को कानूनी रूप मिला तो यह देश को शरणार्थी संबंधी प्रबंधन में अग्रणी स्थान दे देगा। इसके साथ एक ऐसा कानूनी ढांचा आकार लेगा, जो उन लोगों के साथ व्यवहार के मानदंडों का स्तर ऊंचा उठाएगा, जिन्होंने भारत जैसे मानवीय देश में मानवीय अधिकारों के अलावा सब कुछ खो दिया है। शरणार्थी और शरण मांगने वालों से जुड़े मुद्दों से निपटने के संबंध में सरकार अभी विदेशी अधिनियम 1948 और विदेशियों के पंजीकरण संबंधी अधिनियम 1993 पर निर्भर है।

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First Published on November 13, 2016 2:08 pm

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