December 06, 2016

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अमान्य हो गए नोटों को ऐसे ठिकाने लगाएगा आरबीआइ

आरबीआई के पास 27 ‘श्रेडिंग’ और ‘ब्रिक्वेट’ मशीनें हैं, जो देश में 19 जगहों पर लगाई गई हैं।

Author नई दिल्ली | November 13, 2016 04:20 am
रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया।

दीपक रस्तोगी

प्रतिबंधित किए गए पांच सौ और एक हजार रुपए के नोटों को ठिकाने लगाने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियों में जुट गया है देश का शीर्ष वित्तीय संस्थान – रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया (आरबीआइ)। तयशुदा तरीकों से नोटों को नष्ट करने में काफी समय लगेगा। इसलिए इसके चार तरह से पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) के लिए निविदा जारी करने की तैयारी चल रही है। ताजे नोटों को नष्ट कर या तो उनकी रीसाइक्लिंग कर नई करंसी बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा, थोड़े पुराने पड़ गए नोटों के अवशेषों से पेपरवेट या कैलेंडर बनाए जाएंगे। कुछ और पुराने नोटों को नष्ट कर चारकोल की ईंटें बनाई जाएंगी और एकदम खराब नोटों के महीन टुकड़े कर जमीन में दबा दिए जाएंगे। इन नोटों को रिजर्व बैंक के विभिन्न केंद्रों पर विशेष मशीनों से अलग-अलग किया जाएगा।

अब तक नोटों के महीन टुकड़े कर जमीन में जमीन में दबाने की परिपाटी रही है। लेकिन प्रतिबंधित किए जा रहे नोटों में से अधिकांश के ताजा और करारे होने के चलते रीसाइक्लिंग के नए तरीके अपनाए जाने हैं। यह कवायद इसलिए भी है ताकि नई करंसी छापने में कागज खरीद का खर्च कम किया जाए। इन तैयारियों के बाबत आरबीआई के आला अफसरों ने वाणिज्यिक बैंकों के संगठन- भारतीय बैंक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बात की है। बैंकों को बताया गया है कि वे जमा हो रहे प्रतिबंधित नोटों को कब तक और कहां पहुंचाएं। अगले वित्त वर्ष में जमा हुए नोटों को नष्ट करने और उनकी रीसाइक्लिंग का काम शुरू किया जाएगा। फरवरी में निविदाएं जारी की जाएगी।

पांच सौ और एक हजार रुपए के कुल 2203.3 करोड़ नोटों को नष्ट किया जाना है। आरबीआइ की सालाना रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च, 2016 तक बाजार में पांच सौ रुपए के 1,570.7 करोड़ नोट और एक हजार के 623.6 करोड़ नोट चलन में थे। कुल 9026.6 करोड़ नोट बाजार में थे। इनमें 86 फीसद से ज्यादा, यानी कुल 2,203.3 करोड़ नोट पांच सौ और एक हजार के हैं। इन बड़े नोटों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा से कुछ दिनों पहले- 28 अक्तूबर को चलन में रहे पांच सौ और एक हजार के नोटों का मूल्य 17.77 लाख करोड़ रुपए रहा। अभी तक लगभग सवा लाख करोड़ रुपए मूल्य के बड़े नोट बैंकों में जमा कराए जा चुके हैं।

आरबीआई के पास 27 ‘श्रेडिंग’ और ‘ब्रिक्वेट’ मशीनें हैं, जो देश में 19 जगहों पर लगाई गई हैं। फिलहाल, मशीनों की संख्या बढ़ाने की नहीं सोची जा रही है। आरबीआइ अमूमन एक साल में 16 करोड़ नोट नष्ट करती है। उसके पास इतने भर का इंतजाम है। जाहिर है, 2,203.3 करोड़ नोटों को अगले वित्त वर्ष में एक साल के भीतर नष्ट करना बड़ी चुनौती मानी जा रही है। रिजर्व बैंक का तयशुदा पैमाना रहा है। बेकार करार दिए गए नोटों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया जाता है। फिर उन्हें गड्ढों में दबा दिया जाता है या फिर पेपरवेट, गत्ते या कैलेंडर बनाने के लिए रीसाइक्लिंग की जाती रही है। अधिकांश नोटों को गड्ढे में दबाने या जला देने की परिपाटी रही है, क्योंकि अब तक नष्ट किए गए नोट बेहद खस्ता और सड़ी-गली हालत में आरबीआइ तक बेकार करने के लिए पहुंचते रहे हैं। कुछ टुकड़ों को रासायनिक प्रक्रिया से गुजारकर 100-100 ग्राम की चारकोल की ईंटें बनाई जाती हैं, जिन्हें औद्योगिक इकाइयों को अलग टेंडर के जरिए बेचा जाता है।

ऐसे में प्रतिबंधित किए जा रहे नोटों के साथ भी क्या यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी? भारत के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद विरमानी के अनुसार, ‘यह तो तय है कि सभी नोटों को नष्ट किया जाएगा। जैसा कि बेकार करार दिए गए कटे-फटे नोटों के साथ किया जाता है। मशीनों से उनके टुकड़े-टुकड़े तो किए ही जाएंगे। आगे उनकी प्रोसेसिंग के नए तरीके अपनाए जा सकते हैं, क्योंकि नोटों की संख्या सैकड़ों गुना ज्यादा है। सिर्फ लैंडफिल में नोटों को दबा देने या जला देने से काम नहीं चलने वाला।’ करंसी के कागज के अलावा, गत्ते- पेपरवेट – कैलेंडर के कागज और चारकोल की ईंटों की बिक्री के लिए अलग से टेंडर जारी किए जाएंगे।

रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया में कई विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे डिप्टी गवर्नर रमा सुब्रह्मण्यम गांधी ने नोटों को ठिकाने लगाने की प्रक्रिया पर अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है, ‘आरबीआइ की ‘श्रेडिंग’ मशीनों से रोजाना 20 से 25 बोरे कटे नोटों के टुकड़ों के तैयार होते हैं। उन्हें एक सप्ताह या पंद्रह दिन में एक बाद ट्रकों में भरकर लैंडफिल क्षेत्रों की ओर भेज दिया जाता है। चलन से हटाए गए नोटों को आरबीआई के विभिन्न ‘इश्यू काउंटर’ पर वाणिज्यिक बैंकों से मंगाया जाता है।’ इन दिनों जमा कराए जा रहे पांच सौ और एक हजार के नोटों के मामले में भी यही कवायद की जा रही है। बैंकों को आरबीआइ के विभिन्न ‘इश्यू काउंटर’ तक प्रतिबंधित नोट पहुंचाने का सर्कुलर भेजा जा चुका है। ये नोट 15 अप्रैल 2017 तक जमा कराए जा सकते हैं।

नौ नवंबर के बाद से प्रतिबंधित किए जा रहे नोटों में से उन्हें अलग छांट लिया जाएगा, जिनकी रीसाइक्लिंग कर नई करंसी के लिए कागज बनाए जा सकेंगे। रिजर्व बैंक की ‘करंसी वेरिफिकेशन एंड प्रोसेसिंग सिस्टम’ के तहत मशीनों से नोटों की छंटाई की जाएगी। 2003 में रिजर्व बैंक के तत्कालीन गवर्नर बिमल जालान ने इस प्रणाली की शुरुआत की थी। उद्देश्य था कि रीसाइक्लिंग कर करंसी के कागज तैयार किए जाएं। लेकिन अब तक गत्ते और कैलेंडर के कागज ही बनाए जाते रहे हैं। इस बार करारे नोट भी इस प्रणाली में छंटाई के लिए आएंगे। इसलिए करंसी के कागज के लिए रीसाइक्लिंग की योजना बनी है। भारतीय राजस्व सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी अवधेश सिंह के अनुसार, काला धन पकड़े जाने पर जब्त नोटों को भी प्रक्रिया पूरी करने पर रिजर्व बैंक में जमा कराने का प्रावधान है, जिन्हें अमूमन नष्ट किया जाता रहा है।

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First Published on November 13, 2016 4:20 am

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