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RBI के पूर्व गवर्नर ने की मोदी सरकार के इस फैसले की तारीफ, बोले- देर हुई मगर दुरुस्त है

उन्होंने कहा कि यह कदम 2014 में ही उठाया जाना चाहिए था और कहा कि इसमें तीन साल की देरी हुई।
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर विमल जालान

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में सरकारी बैंकों के लिए 2.11 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गर्वनर बिमल जालान ने तारीफ की है। उन्होंने शनिवार (11 नवंबर) को कहा कि इस कदम की बहुत पहले से अपेक्षा थी। नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकॉनमिक रिसर्च (एनसीएईआर) द्वारा आयोजित भारतीय अर्थव्यवस्था के 2017-18 के मध्य वर्ष की समीक्षा में जालान ने कहा, “वर्तमान परिस्थितियों में बैंकों का पुनर्पूंजीकरण बहुत ही सकारात्मक कदम है। लेकिन हमने इसे पहले क्यों नहीं किया।”

उन्होंने कहा कि यह कदम 2014 में ही उठाया जाना चाहिए था और कहा कि इसमें तीन साल की देरी हुई। उन्होंने हालांकि सरकारी बैंकों का सेहत सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और कहा, “जो भी कार्रवाई की जा रही है, वे सभी बहुत ही सकारात्मक हैं।” सरकारी बैंकों के बढ़ते एनपीए (फंसे हुए कर्जे) पर जालान ने कहा कि इसके तेजी से बढ़ने के कारणों का अध्ययन किया जाना चाहिए।

जालान के मुताबिक केंद्र में बहुमत सरकार होने के कारण दीर्घकालिक सुधार, कठिन सुधार, राजनीतिक सुधार, आर्थिक सुधार, प्रशासकीय सुधार और सरकारी कंपनियों में सुधार अब काफी व्यवहार्य हैं। उन्होंने कहा कि यदि भारत को भविष्य में अपनी पूर्ण क्षमताओं का दोहन करना है तो मध्यम और दीर्घकालिक अवधि में कुछ बुनियादी मुद्दों से निपटना आवश्यक है। जालान ने कहा, “हमें समय पर कार्रवाई और क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। राजनीतिक नेतृत्व नौकरशाही और प्रशासनिक सुधारों की प्रगति की निगरानी कर सकता है।”

गौरतलब है कि पिछले महीने वित्त मंत्री अरण जेटली ने एनपीए के बोझ तले दबे सरकारी क्षेत्र के बैंकों का पूंजी आधार मजबूत बनाने के लिए उनमें दो साल में 2.11 लाख करोड़ रुपए की पूंजी डालने की घोषणा की थी। मंत्रालय के पांचों सचिवों और मुख्य आर्थिक सलाहकार की उपस्थिति में तमाम आर्थिक संकेतकों को हवाला देते हुए जेटली ने सरकार के इस दावे को सही ठहराया था कि आर्थिक वृद्धि में आया धीमापन अब समाप्त हो चला है और अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ने लगी है। आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए उन्होंने ढांचागत क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाओं में 6.92 लाख करोड़ रुपए खर्च करने का भी एलान किया था।

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