March 25, 2017

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दलित उत्पीड़न रोकथाम कानून में संशोधन के खिलाफ नहीं: आठवले

सूरत में कानून को रद्द करना संभव नहीं होगा और न ही इसे सही ठहराया जा सकेगा

Author नागपुर | October 9, 2016 04:30 am
आरपीआई (ए) के नेता और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले। (पीटीआई फाइल फोटो)

केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने शनिवार कहा कि अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न रोकथाम) कानून, 1989 रद्द तो नहीं किया जा सकता लेकिन उनका मंत्रालय इस कानून मेंं संशोधन के खिलाफ नहीं है। आठवले ने कहा, ‘गहन वाद-विवाद के बाद संसद ने इस कानून को पारित किया था और इसका मकसद दलितों का उत्पीड़न रोकना था। उन मामलों से निपटने के लिए पुलिस को खुली छूट दी गई थी।’ बहरहाल, दलित नेता और आरपीआइ के अध्यक्ष ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ऐसे समय में जब समाज का एक तबका अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न रोकथाम) कानून को रद्द करने की मांग कर रहा है, तो उनका मंत्रालय कानून में संशोधन पर विचार करने के लिए तैयार है।

आठवले ने कहा कि किसी भी सूरत में कानून को रद्द करना संभव नहीं होगा और न ही इसे सही ठहराया जा सकेगा । उन्होंने स्वीकार किया कि कानून का इस्तेमाल निर्दोष लोगों को परेशान करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।राजनीतिक तौर पर प्रभावशाली मराठा समुदाय पूरे महाराष्ट्र में विशाल ‘मूक मोर्चे’ निकाल रहा है। उसकी मांगों में एक प्रमुख मांग यह भी है कि अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न रोकथाम) कानून को रद्द किया जाए। यह पूछे जाने पर कि जब कुछ दलित इस कानून को और मजबूत करने की मांग कर रहे हैं, तो क्या ऐसे में इसे संशोधित करना ठीक होगा, इस पर आठवले ने कहा कि इस कानून के तहत दर्ज किए जाने वाले मुकदमों की जांच ठीक तरीके से की जानी चाहिए और दोषसिद्धी की दर में सुधार होना चाहिए।

मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग पर आठवले ने कहा कि पटेलों, जाटों वगैरह की ऐसी ही मांग के मद्देनजर कुल आरक्षित सीटों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई 50 फीसदी की सीमा को संसद में कानून पारित कर 75 फीसदी कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरपीआइ 19 अक्तूबर को शिर्डी में मराठा और दलित समुदायों का एक संयुक्त सम्मेलन आयोजित करने जा रही है ।

 

 

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First Published on October 9, 2016 4:29 am

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