June 24, 2017

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राम मंदिर मामला: बाबरी मस्जिद कमेटी ने ठुकराया चीफ जस्टिस का सुझाव, कहा- अब बातचीत का वक्त नहीं रहा

Ram Mandir Ayodhya issue: राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है।

Ram Mandir/Babri Masjid issue: राम मंदिर के लिए रखा सामान।

राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। 21 मार्च को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजीआई) की तरफ से कहा गया है कि दोनों पक्ष इस मामले को कोर्ट के बाहर सुलझा लें तो ठीक रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह धर्म और आस्था से जुड़ा मामला है इसलिए इसको कोर्ट के बाहर सुलझा लेना चाहिए। कोर्ट ने इसपर सभी पक्षों को आपस में बैठकर बातचीत करने के लिए कहा है। इसपर राम मंदिर की तरफ से लड़ रहे सुब्रमण्यम स्वामी ने बताया कि कोर्ट ने कहा कि मस्जिद को कहीं भी बन सकती है। इस मामले पर अब 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

लेकिन इस मामले पर बाबरी मस्जिद कमेटी ने सीजीआई खेहर की बात मानने से इंकार कर दिया है। कमेटी के ज्वॉइंट कंवीनर डॉ एसक्यूआर इलयास ने कहा, ‘हम लोगों को सीजीआई की बात मंजूर नहीं है। इलाहबाद हाई कोर्ट पहले ही अपना निर्णय दे चुका है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को लगता है कि बातचीत का वक्त अब खत्म हो चुका है।’ उन्होंने बाबरी मस्जिद कमेटी और विश्व हिंदू परिषद के बीच हुई पिछली बातचीत का भी जिक्र किया जो कि किसी फैसले पर नहीं पहुंची थी।

अयोध्या के इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर दोनों पक्षों के बीच बातचीत सफल नहीं होती है तो फिर सुप्रीम कोर्ट दखल देगा। इसके लिए एक सुलह करवाने वाला व्यक्ति नियुक्त करने की भी बात कही जा रही है।

राम मंदिर विवाद काफी पहले से चल रहा है। 6 दिसंबर 1992 को एक राजनीतिक रैली के बाद कारसेवकों ने विवादित इलाके पर बनी बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था।

30 सितंबर 2010 को इलाहबाद कोर्ट ने भी इस मामले पर सुनावाई की थी। उनकी तरफ से फैसला करके 2.77 एकड़ की उस जमीन का बंटवारा कर दिया गया था। जिसमें जमीन को तीन हिस्सों में बांटा गया था। जिसमें ने एक हिस्सा हिंदू महासभा को दिया गया जिसमें राम मंदिर बनना था। दूसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को और तीसरा निरमोही अखाड़े वालों को। लेकिन फिर 9 मई को इलाहबाद हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया था।

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First Published on March 21, 2017 11:11 am

  1. A
    Ajay
    Mar 23, 2017 at 9:00 am
    Bharat Apna toh jaha shri Ram ji ka born hua oha hum Ram mandir bane ki liye 25 year se court k chakar m pde hum apne dum per b mandir bana sakte h ya Hindu ka dum kathma ho a apne hi Bharat m
    Reply
    1. B
      BHARAT
      Mar 21, 2017 at 2:10 pm
      केस लड़ रहे वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम माननीय सुप्रीम कोर्ट के इस सुझाव का स्वागत करते हैं, लेकिन हमें कोई आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट मंजूर नहीं है. यही है फसाद की जड़, कोशिश करने को भी तैयार नहीं | क्या सारे मुसलमानो का ठेका सिर्फ इनके पास है ?
      Reply
      1. M
        manish agrawal
        Mar 21, 2017 at 1:56 pm
        Judges 68 years beet jane ke baad bhi Ramjanambhumi maamle ko taal rahe hain aur mediation ki baat kar rahe hain jabki Ramjanambhumi maamlaa National Importance ka hai ! fir baaki ordinary cases main to phir Bhagwan hi maalik hai ! Judges ke aise hi at ude ke chalte crores of cases India main pending hain aur ye no.of judges kam hone ka rona rote hain. Ramjanambhumi case main sab ku pakaa pakaaya hai, witnesses ka appreciation ho chuka hai, High Court ka detailed judgement aa chuka hai, Supreme court ko sirf arguments sunkar judgement dena hai balki yadi hearing ke baad Supreme court ko lagata hai ki High Court ka judgement sahi tha to inki punah detailed judgement bhi likhne ki jaroorat nahi hai aur ek line ka judgement ki High Court ka judgement laagoo rahega, kahakar maamlaa khatam karna hai, to bhi taalamatol kar rahe hai
        Reply
        1. M
          manish agrawal
          Mar 21, 2017 at 12:36 pm
          Mandir Maszid bair karaate mel karaati MADHUSHALA
          Reply
          सबरंग