December 10, 2016

ताज़ा खबर

 

राज्‍यसभा: कांग्रेस का पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला- दुनिया घूमते हैं, ये कैसा त्‍याग है?

शर्मा ने कहा कि दुनिया भर में यह संदेश गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में काले धन का बोलबाला है।

शर्मा ने कहा, ”हम प्रधानमंत्री के लिए लंबी उम्र चाहते हैं।” (Photo: RSTV)

नोटबंदी के सरकार फैसले से देश के लोगों को विशेषकर गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को होने वाली भारी परेशानी की ओर ध्यान दिलाते हुए विपक्ष ने बुधवार (16 नवंबर) को आरोप लगाया कि इस न केवल देश में आर्थिक अराजकता पैदा हो गई बल्कि पूरी दुनिया में यह संदेश गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में काले धन का बोलबाला है। हालांकि सरकार ने इन आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि देश के अधिकतर लोग इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं और इस फैसले दीर्घकाल में ब्याज कम होने सहित आम लोगों को कई फायदे मिलेंगे। राज्यसभा में बुधवार को शीतकालीन सत्र के पहले दिन नोटबंदी और इससे आम जनता को हो रही परेशानी के मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस ने कहा, ‘सरकार सबसे पहले यह बताए कि काले धन की परिभाषा क्या है।’ नोटबंदी के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने राज्‍यसभा में जोरदार भाषण दिया। उन्‍होंने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह साफ करें क‍ि उनकी जान को किससे खतरा है। नोटबंदी और इसके प्रभावों पर चर्चा की शुरुआत करते हुए शर्मा ने कहा, ”आपको कौन धमका रहा है? आपको कौन मारना चाहता है, संसद को बताइए।” कांग्रेस नेता ने सवाल उठाते हुए कहा, ”वह (पीएम) अपनी छाती ठोंकते हैं और कहते हैं कि मैंने सबकुछ छोड़ दिया। आप पूरी दुनिया घूमते हैं, ये कैसा त्‍याग है?” प्रधानमंत्री ने रविवार को गोवा में बिना नाम लिए विपक्ष के विरोध पर इशारों में कहा था, ”मुझे पता है कि कुछ ताकतें मेरे खिलाफ हैं, वे शायद मुझे जिंदा न छोड़ें… वे मुझे बर्बाद कर सकती हैं क्‍योंकि उनकी 70 सालों की लूट खतरे में है, लेकिन मैं तैयार हूं।” इसी पर बोलते हुए शर्मा ने कहा, ”हमें बताइए कि वह कौन है, हम प्रधानमंत्री के लिए लंबी उम्र चाहते हैं।”

कांग्रेस के आनंद शर्मा ने नोटबंदी के मुद्दे पर उच्च सदन में चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश में 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों को मध्य रात्रि से अमान्य किए जाने का ऐलान किया। ‘स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संदेश के माध्यम से इतने बड़े फैसले की जानकारी दी।’ उन्होंने कहा ‘प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा था कि काले धन, आतंकवाद पर रोक के लिए यह कदम जरूरी है। रूपये का उपयोग आतंकवादी भी कर रहे हैं और जाली मुद्रा भी चलन में है। इसलिए यह कदम जरूरी है।’

शर्मा ने कहा कि जब यह ऐलान किया गया तब देश में 16 लाख 63 हजार के करेंसी नोट सर्कुलेशन में थे और इनमें से 86.4 फीसदी नोट 500 और 1000 रुपए के नोटों के थे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह 86.4 फीसदी नोट काले धन का था जो बाजार में लगा था।’ शर्मा ने कहा कि इसी साल अगस्त में संसद में वित्त राज्य मंत्री ने नकली मुद्रा की मात्रा के बारे में पूछने पर बताया था कि नकली मु्रदा मात्र 0.02 फीसदी ही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार यह मानती है कि देश में नकली मुद्रा मात्र 0.02 फीसदी ही है तो फिर 86.4 फीसदी नोट हटाये जाने का स्पष्टीकरण कौन देगा। क्या यह पैसा काले धन का है जो बाजार में लगा है। किस आधार पर सर्कुलेशन से 86.4 फीसदी नोट हटाये गए ?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि आतंकवाद, काला धन, भ्रष्टाचार, नकली मुद्रा के मुद्दे पर पूरा सदन एकजुट है और इसमें कोई दो राय नहीं है। शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री की अचानक की गई इस घोषणा से देश में आपात स्थित पैदा हो गई है और लोग बुरी तरह परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने न केवल आर्थिक अराजकता पैदा की बल्कि नगदी से चलने वाली अर्थव्यवस्था की रीढ़ ही तोड़ दी। उन्होंने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था नगदी के लेन देन की है और आम आदमी, छोटे व्यापारी, किसान, गृहणियां अपने साथ क्रेडिट कार्ड और चेकबुक ले कर नहीं चलते। ‘जब प्रधानमंत्री ने काले धन की बात कही तब क्या उन्होंने इस बात को ध्यान में रखा था। क्या बाजार में, घरों में, किसानों, मजदूरों, सरकारी कर्मियों के पास काला धन था। क्या खेतों में अनाज उगा कर मंडी ले कर आने वाला किसान अपने साथ काला धन लाता और ले जाता है।’

शर्मा ने कहा कि दुनिया भर में यह संदेश गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में काले धन का बोलबाला है। उन्होंने कहा ‘देश को कृपया कलंकित न करें।’ उन्होंने कहा ‘सरकार को यह कदम उठाने से पहले कोई समय सीमा बतानी चाहिए थी। आप कहते हैं कि पहले बताने से आतंकियों को, जाली नोट वालों को फायदा होता। लेकिन आपका यह तर्क समझ से परे है। पूर्व की सरकारों ने भी नोटबंदी की है लेकिन तब लोगों को समय दिया जाता था।’ शर्मा ने कहा कि नोटों की सीमा तय करने से लाखों विदेशी पर्यटक बुरी तरह परेशान हुए हैं। उनके चेक इनकैश तो हो गए लेकिन उनका पैसा वापस नहीं लौटाया गया। आज स्थिति यह है कि उनके देश और दूतावास अपने नागरिकों को परामर्श दे रहे हैं कि भारत सोच समझ कर जाएं। ‘सरकार के इस कदम से आखिर क्या संदेश गया विदेशों में।’

सरकार पर बिना तैयारी के नोटबंदी करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, ‘बैंकों के आगे कतारें और मीयाद दोनों बढ़ रही है। एटीएम काम नहीं कर रहे हैं। नोट बदलने, निकालने की सीमा तय कर दी गई है। हम सबके बैंकों में खाते हैं और हम कर देते हैं। आपको यह अधिकार किस कानून और संविधान ने दिया कि आप हमें हमारे ही खाते से पैसे निकालने से रोकें।’ शर्मा ने कहा ‘बैंकों में 10 नवंबर से ही पैसा नहीं है। 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट अमान्य कर सरकार 2000 रुपए का नोट लाई है लेकिन बाजार में तो उसके छुट्टे भी नहीं मिल रहे। आज (बुधवार, 16 नवंबर) स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट आई है जिसमें कहा गया है कि मार्च से एसबीआई को नोटबंदी के बारे में पता था। फिर तैयारी क्यों नहीं की गई। गुजरात के अखबारों में यह खबर अप्रैल में आ गई थी।

उन्होंने कहा बड़े फैसले में गोपनीयता होती है। लेकिन यहां तो सूचना चयनित तरीके से ‘भाजपा के मित्रों को’ लीक की गई। सदन में सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। यह भी जांच होनी चाहिए कि अप्रैल में गुजरात के अखबार में खबर छपने के बाद से 8 नवंबर तक कितने लोगों ने सोना, विदेशी मु्रदा खरीदी और बुलियन में निवेश किया। शर्मा ने कहा कि सूचनाएं साझा करने वाले समझौते के तहत, सरकार के पास विदेशी बैंकों में काला धन रखने वालों की सूची है और उसे उनके नामों का खुलासा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़े कर्जदारों ने कर्ज नहीं लौटाए और आपने भी बड़े बड़े कर्ज ‘रीस्ट्रक्चर्ड’ कर दिए। एनपीए बढ़ता जा रहा है लेकिन किसानों के कर्ज आपने माफ नहीं किए।

उन्होंने कहा कि देश हम सबका है। लेकिन सरकार ने आज ऐसा माहौल बना दिया है कि सवाल नहीं पूछे जा सकते। सरकार के आज पूरे ढाई साल हो गए। लेकिन न तो काला धन वापस आया, न पांच करोड़ रोजगार पैदा किए गए। ‘आपने वादा खिलाफी की। क्या यही अच्छे दिन हैं ?’ चर्चा से पूर्व, बैठक शुरू होने पर उप सभापति पी जे कुरियन ने कहा कि उन्हें नियम 267 के तहत कामकाज स्थगित कर, नोटबंदी से लोगों को हो रही असुविधा पर चर्चा करने के लिए कम से कम 13 नोटिस मिले हैं। उन्होंने नोटिस देने वाले सदस्यों के नाम पढ़े और कहा कि आम भावना चर्चा के पक्ष में है और सरकार भी इसके लिए तैयार है इसलिए अन्य कामकाज स्थगित कर वह चर्चा की अनुमति देते हैं।

वीडियो में देखें- जनसत्ता एक्सक्लूसिव: नोटबंदी की ज़मीनी हकीकत

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 16, 2016 4:36 pm

सबरंग