December 05, 2016

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रास में नोटबंदी: मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी को लिया आड़े हाथ, बताया- कानूनी लूट का मामला

मनमोहन सिंह ने हर दिन नए निर्देश जारी करने और लोगों द्वारा रुपए निकालने के लिए नियमों में शर्तों के साथ बदलाव करने के लिए सरकार की आलोचना की।

Author नई दिल्ली | November 24, 2016 20:11 pm
दिल्ली में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सुनते हुए। (PTI Photo/TV GRAB/24 Nov, 2016)

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने गुरुवार (24 नवंबर) को नोटबंदी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिस तरह से इसे लागू किया गया है, वह ‘प्रबंधन की विशाल असफलता’ है और यह संगठित एवं कानूनी लूट-खसोट का मामला है। सरकार द्वारा 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों को अमान्य किए जाने के बाद उत्पन्न हालात को लेकर इस कदम के विरोध में विपक्ष की मुहिम तेज करते हुए सिंह ने राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में कहा कि इस फैसले से सकल घरेलू उत्पाद में दो फीसदी की कमी आएगी जबकि इसे नजरअंदाज किया जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री सिंह ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री एक व्यावहारिक, रचनात्मक एवं तथ्यपरक समाधान निकालेंगे जिससे आम आदमी को नोटबंदी के फैसले से उत्पन्न हालात के चलते हो रही परेशानी से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि जो परिस्थितियां हैं उनमें आम लोग बेहद निराश हैं।

सिंह ने कहा कि कृषि, असंगठित क्षेत्र और लघु उद्योग नोटबंदी के फैसले से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और लोगों का मुद्रा एवं बैंकिंग व्यवस्था पर से विश्वास खत्म हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन हालत में उन्हें लग रहा है कि जिस तरह योजना लागू की गई, वह प्रबंधन की विशाल असफलता है। यहां तक कि यह तो संगठित एवं कानूनी लूट-खसोट का मामला है। सिंह ने कहा कि उनका इरादा किसी की भी खामियां बताने का नहीं है। ‘लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि देर से ही सही, प्रधानमंत्री एक व्यावहारिक, रचनात्मक और तथ्यपरक समाधान खोजने में हमारी मदद करेंगे ताकि इस देश के आम आदमी को हो रही परेशानियों से राहत मिल सके।

पूर्व प्रधानमंत्री ने ये बातें उच्च सदन में नोटबंदी के कारण उत्पन्न हालात के चलते लोगों को हो रही परेशानी के मुद्दे पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहीं। यह चर्चा 16 नवंबर को संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने के पहले ही दिन आरंभ हुई थी। लेकिन फिर विपक्ष ने मांग उठाई कि चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री को सदन में आना चाहिए, चर्चा सुननी चाहिए और जवाब देना चाहिए। विपक्ष की इस मांग के चलते गतिरोध उत्पन्न हो गया और उच्च सदन की कार्यवाही लगातार बाधित होती रही। गुरुवार को प्रधानमंत्री के सदन में आने पर विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि प्रश्नकाल चलाने के बजाय चर्चा को आगे बढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि प्रधानमंत्री सदन में मौजूद हैं।

सरकार ने आजाद का आग्रह स्वीकार कर लिया और सदन के नेता तथा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि चर्चा तत्काल बहाल की जानी चाहिए और प्रधानमंत्री निश्चित रूप से इसमें हिस्सा लेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ सिंह ने कहा कि 8 नवंबर की रात को प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणा के बाद से आम आदमी बुरी तरह परेशान हैं और उनकी तकलीफों की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा ‘मेरी अपनी राय है कि राष्ट्रीय आय, जो कि इस देश का सकल घरेलू उत्पाद है, इस फैसले के कारण दो फीसदी कम हो सकती है। इसे नजरअंदाज किया जा रहा है। इसलिए मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री को कोई रचनात्मक प्रस्ताव लाना चाहिए कि हम योजना का कार्यान्वयन कैसे कर सकें और साथ ही आम आदमी के मन में घर कर रहे अविश्वास को कैसे दूर कर सकें।’

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि इस फैसले का अंतिम परिणाम क्या होगा, इसके बारे में कोई नहीं जानता लेकिन ‘प्रधानमंत्री ने 50 दिन तक इंतजार करने के लिए कहा है। वैसे तो 50 दिन का समय बहुत कम समय है लेकिन गरीबों और समाज के वंचित वर्गों के लिए 50 दिन किसी प्रताड़ना से कम नहीं हैं। अब तक तो करीब 60 से 65 लोगों की जान जा चुकी है। शायद यह आंकड़ा बढ़ भी जाए।’ पूर्व प्रधानमंत्री सिंह ने कहा कि जो कुछ किया गया है उससे लोगों का मु्रदा प्रणाली और बैंकिंग व्यवस्था में विश्वास घट सकता है। सिंह ने प्रधानमंत्री से कहा कि वह दुनिया के उन देशों के नाम बताएं जहां लोग अपना पैसा बैंक में जमा करते हैं और उन्हें अपना ही पैसा निकालने की अनुमति नहीं दी जाती। ‘मेरे विचार से, यही बात उसकी निंदा करने के लिए पर्याप्त है जो बड़े विकास के नाम पर की गयी है।’ उन्होंने कहा कि जिस तरह से नोटबंदी को लागू किया गया है उससे हमारे देश का कृषि विकास बाधित होगा, लघु उद्योग प्रभावित होगा और अर्थव्यवस्था के अनौपचारिक क्षेत्रों में काम करने वाले लोग प्रभावित होंगे।

प्रख्यात अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने हर दिन नए निर्देश जारी करने और लोगों द्वारा रुपए निकालने के लिए नियमों में शर्तों के साथ बदलाव करने के लिए सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा ‘इससे प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक की हालत का पता चलता है। मुझे इस बात का बहुत दुख है कि भारतीय रिजर्व बैंक की इतनी आलोचना की जा रही है और मेरे विचार से यह जायज भी है।’ गौरतलब है कि सिंह स्वयं भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट बंद करने की प्रधानमंत्री की योजना से वह सहमत हैं लेकिन इसके साथ ही यह भी देखना चाहिए कि इस कदम से आम लोग किस तरह परेशान हो रहे हैं। सिंह ने कहा कि देश में इस बारे मे कोई दो मत नहीं हैं कि प्रबंधन की विशाल असफलता की इस प्रक्रिया को अंजाम देने से पहले इसके सही कार्यान्वयन के लिए तैयारी की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा, ‘यह कहा जा रहा है कि इस कदम से अभी कुछ समय परेशानी होगी लेकिन इसके दूरगामी फायदे होंगे।’

सिंह ने कहा ‘हमारे देश के 90 फीसदी लोग अनौपचारिक क्षेत्र में और 55 फीसदी लोग कृषि से जुड़े हैं जो खुद को हताश महसूस कर रहे हैं।’ सिंह ने कहा कि गांवों में बड़ी संख्या में लोगों की मदद करने वाली सहकारी बैंकिंग प्रणाली काम नहीं कर रही है और उसे नकदी का लेन देन करने से रोक दिया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं प्रधानमंत्री से व्यावहारिक और तथ्यपरक तरीके तथा समाधान खोजने का आग्रह करता हूं ताकि इस कदम से परेशान लोगों को राहत मिल सके। ऐसे लोग इस देश की बड़ी आबादी हैं।’ चर्चा को आगे बढ़ाते हुए समाजवादी पार्टी के नरेश यादव ने कहा कि नोटबंदी का फैसला उत्तर प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के मद्देनजर लिया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार मीडिया पर दबाव बना कर उनके जरिये यह कहा जा रहा है कि नोटबंदी के फैसले से देशवासी खुश हैं।

उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि देश में और विदेशों में कितना काला धन है। उन्होंने कहा कि अगर देश में केवल 6 से 8 फीसदी लोगों के पास ही काला धन है तो देश की 92 से 94 फीसदी आबादी बैंकों के आगे कतार में क्यों खड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि काला धन रखने वाला कौन सा नेता, उद्योगपति, अधिकारी बैंक के आगे कतार में लगा है। अग्रवाल ने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों में भी महंगाई है लेकिन क्या वहां नोटबंदी की गई। जिन देशों में नोटबंदी की गई वहां यह फैसला तानाशाहों ने किया, चुनी हुई सरकारों ने नहीं।

सपा नेता ने कहा, ‘भारतीय नोटों पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर का धारक को उतनी राशि का भुगतान करने का वचन अंकित रहता है लेकिन आज यह स्थिति है कि हर दिन गारंटी सरकार की ओर से दी जा रही है।’ उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनाव से पहले काला धन देश में वापस लाने और लोगों के खातों में 15-15 लाख रुपए जमा करने का वादा किया था। जनधन खाते खुद सरकार ने खुलवाए और अब सरकार ही जनधन खातों से रूपये निकालने पर रोक लगा रही है। जिन लोगों को 15-15 लाख रुपए देने का वादा किया, अब वही लोग अपने ही खातों से रूपये नहीं निकाल सकते। यह कैसी व्यवस्था है। अग्रवाल ने कहा कि ऐसी चर्चा है कि प्रधानमंत्री ने नोटबंदी की घोषणा से पहले खुद वित्त मंत्री तक को विश्वास में नहीं लिया था। उन्होंने कहा कि अफवाहों का दौर खत्म होना चाहिए और सदन में एक कानून बनाया जाना चाहिए कि अगर भविष्य में कभी ऐसा फैसला किया जाए तो उसके लिए सदन की अनुमति लेना आवश्यक होगा।

सपा नेता ने कहा नोट बदलने के लिए उंगली पर मतदान वाली स्याही लगाने के फैसले का वह विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के चलते महिलाओं द्वारा घरों में की गई बचत की राशि पूरी तरह खत्म हो गई। 2000 रुपए के नए नोट के खुले रुपए नहीं मिल रहे हैं, बाजार में 500 रुपए का नोट नहीं है और 100 रुपए के नोटों की कमी है। उन्होंने कहा, ‘भाजपा को पूंजीपतियों, व्यापारियों की पार्टी कहा जाता है। जो व्यापारी आपका वोटर था वह अब आपके खिलाफ हो गया है।’ अग्रवाल ने कहा कि एक संयुक्त संसदीय समिति का गठन कर इस बात की जांच की जानी चाहिए कि भाजपा की कुछ इकाइयों के अध्यक्षों को नया नोट पहले कैसे मिल गया। उन्होंने कहा कि नेपाल, बांग्लादेश और भूटान की अर्थव्यवस्था में हमारे नोटों का बहुत योगदान है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी मु्रदा हमारी मु्रदा से कैसे बदलेगी। साथ ही सरकार को रुपए निकालने की सीमा समाप्त की जानी चाहिए।

अग्रवाल ने कहा कि वह नोटबंदी के फैसले का विरोध करते हैं और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। चर्चा में हिस्सा लेते हुए तृणमूल कांगे्रस के डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी की घोषणा करने के फैसले के दो घंटे बाद ही उनकी पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वह काले धन और भ्रष्टाचार को समाप्त करने के पक्ष में हैं। किन्तु सरकार के इस फैसले से गरीबों, किसानों, मजदूरों को होने वाली भारी परेशानी के कारण वह इस फैसले की घोर निंदा करती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि विदेशों से काले धन को वापस लाने का जो वादा किया गया था, उसका क्या हुआ। उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि वह चुनाव सुधारों की दिशा में क्या कदम उठाने जा रही है क्योंकि राजनीतिक दलों को चंदे के रूप में गुप्त धन ही मिलता है।

डेरेक ने कहा कि जो सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहा है उसे काला धन या भ्रष्टाचार का समर्थक बताना ठीक नहीं है। न ही ऐसे लोग देश विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने सुझाव दिया है कि पुराने 500 रुपए के नोट को कुछ और देर चलाया जाना चाहिए ताकि आम लोगों, गरीबों और मजदूरों को सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि लोगों को परेशानी में डालने के पीछे गोपनीयता कोई बहाना नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ कह रही है कि इस घोषणा को लागू करने के लिए काफी पहले से तैयारी की जा रही थी। उन्होंने कहा कि सरकार को 100 रुपए के अधिक नोट एक साल पहले से ही छापने शुरू कर देने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से जीडीपी को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचेगा।

डेरेक ने प्रधानमंत्री की ओर संकेत करते हुए कहा कि आप यह दिखाना बंद करिये कि आप मसीहा हैं। उन्होंने विपक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा कि क्या हम शैतान हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी की नेता किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हम जेल जाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस लड़ाई को अहंकार की लड़ाई में बदल दिया है। इसके बाद भोजनावकाश हुआ और दोपहर दो बजे जब बैठक पुन: शुरू हुई, तब सदन में विपक्ष ने प्रधानमंत्री की उपस्थिति की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया जिसके कारण चर्चा अधूरी रही।

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First Published on November 24, 2016 8:10 pm

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