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वक्‍त से पहले मर्सिया पढ़ रहे हैं कांग्रेस को खारिज करने वाले, राहुल को संभाल लेनी चाहिए कमान: जयराम रमेश

राहुल गांधी को नेतृत्व सौंपने की जोरदार वकालत करते हुए पूर्व केन्‍द्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कांग्रेस के सामने खड़े संकट को रेखांकित किया है।
Author नई दिल्‍ली | June 5, 2016 16:21 pm
पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि अभी कांग्रेस जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, ये उस समय जैसी ही हैं जब मार्च 1988 में सोनिया गांधी ने पार्टी की कमान संभाली थी।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आज कहा कि ‘‘राहुल गांधी वस्तुत: कांग्रेस अध्यक्ष हैं, लेकिन उन्हें वास्तविक अध्यक्ष बनना चाहिए’’ और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर बनने का इंतजार किए बगैर पार्टी को सियासी जंग के लिए तैयार करना चाहिए। रमेश ने यह भी कहा कि वक्त का तकाजा है कि बदलते भारत के हिसाब से कांग्रेस भी बदले क्योंकि ‘‘हमारी संचार रणनीति बहुत प्रभावी नहीं है’’ और लगातार चुनावी हार की पृष्ठभूमि में हमें समाज के विभिन्न हिस्सों तक ‘‘आक्रामक पहुंच बनाने की जरूरत है।’’

पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने ‘‘कांग्रेस-मुक्त भारत’’ के मोदी के लगातार आह्वानों की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘‘चुनौतियां बहुत ही भारी हैं, लेकिन मायूसी के लिए कोई जगह नहीं है। जो कांग्रेस को खारिज कर रहे हैं वे वक्त से पहले मर्सिया पढ़ रहे हैं।’’

पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि अभी कांग्रेस जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, ये उस समय जैसी ही हैं जब मार्च 1988 में सोनिया गांधी ने पार्टी की कमान संभाली थी। रमेश ने कहा कि ‘‘ऊहापोह में रहने से कोई फायदा नहीं होता।’’ रमेश ने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष के पास ‘‘पार्टी के सांगठनिक पुनर्गठन के लिए ढेर सारे विचार हैं और मुझे उम्मीद है कि वह बहुत जल्द ‘पार्टी अध्यक्ष की’ यह जगह पा लेंगे। वह वस्तुत: हैं, लेकिन उन्हें वास्तविक बनना चाहिए।

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रमेश ने रेखांकित किया कि कांग्रेस के अध्यक्ष पद का अपना संस्थागत महत्व है। राहुल गांधी को ‘यथाशीघ्र’ पद ग्रहण करना चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘उनके पास रणनीति की एक स्पष्ट अवधारणा है। वह उन लोगों को जानते हैं जिन्हें वह लाना चाहते हैं। एक चीज साफ हो जानी चाहिए कि जब राहुल गांधी कमान संभालते हैं तो एक टीम कमान संभालती है। कब? यह एक बड़ा सवाल है।’

उन्होंने याद दिलाया कि जब सोनिया गांधी ने कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभाला था, तब पार्टी के पास बस दो ही राज्य थे। दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे और गिरिधर गमांग ओडिशा के। लेकिन तब लोकसभा में कांग्रेस की संख्या 140 थी। रमेश ने कहा कि पहली बार पार्टी लोकसभा में बहुत ही कमजोर है। राज्यसभा में उसकी ताकत घटी है और कुछ ही राज्यों में सत्ता में है। उन्होंने कहा, ‘यह एक मुश्किल हालत है।’

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राहुल को अध्यक्ष बनाने की रमेश की यह वकालत ऐसे वक्त आई है जब इस मुद्दे पर पार्टी के अंदर विचार बंटे हुए प्रतीत होते हैं।  पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिन्दर सिंह ने यह कहते हुए राहुल की वकालत की कि सोनिया अब 70 की हो रही हैं और अगर वह थका हुआ महसूस कर रही हैं तो राहुल यह जगह ले सकते हैं।

बहरहाल, अंबिका सोनी का कहना है कि सोनिया अथक काम कर रही हैं और उन्हें यह जारी रखना चाहिए। उक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमल नाथ ने इस बिंदु पर सोनी की हिमायत की। सोनिया गांधी के पास 18 साल से कांग्रेस की कमान है जो 130 साल पुरानी पार्टी के लिए एक तरह से रिकॉर्ड है। राहुल को जनवरी 2013 में जयपुर ‘चिंतन शिविर’ में पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया। रमेश लंबे समय से राहुल को कांग्रेस की कमान सौंपने की वकालत कर रहे हैं।

रमेश राहुल को नेतृत्व सौंपने के मुद्दे पर नेशनल कान्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला के हाल के इस ट्विट को गलत नहीं मानते जिसमें उन्होंने कहा था, ‘राहुल को तत्काल अध्यक्ष पद देने की कहानियां प्लांट करने से कांग्रेस ऊबी नहीं है? इसे अब वर्षों से पढ़ रहा हूं। बस इसे करें और उन्हें अध्यक्ष बनने दें।’ उन्होंने कहा कि उमर कांग्रेस के एक शुभचिंतक हैं और उनका ट्वीट संदेश ‘एक शुभचिंतक की भावना दिखाता है।’

रमेश से जब पूछा गया कि कांग्रेस को उत्थान के पथ पर लाने के लिए उनके क्या विचार हैं तो उन्होंने कहा कि देश बदल रहा है और कांग्रेस को यह तब्दीली प्रतिबिंबित करनी होगी। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा, ‘तब्दीली का एक बड़ा क्षेत्र संचार का होना है। हमारी संचार रणनीति बहुत प्रभावी नहीं है। प्रौद्योगिकी का जो परिवर्तन हो रहा है हमें उसे समझना होगा। तीन सी – क्लियर (स्पष्ट), कंसिस्टेंट (सुसंगत) और क्रेडिबल (भरोसेमंद)। संदेशों को सुसंगत और स्पष्ट होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त कांग्रेस को ‘एक बेहद आक्रामक तरीके से’ लोगों तक पहुंचना चाहिए।

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