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अब बिल्डरों के खिलाफ हल्ला बोलेंगे राहुल गांधी

नरेंद्र मोदी सरकार पर एक और हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने आज उस पर रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण विधेयक के प्रावधानों को खरीदार समर्थक की बजाय बिल्डरों के हित में तोड़ने...
जिस तरह मैं गरीबों और आदिवासियों की मदद कर रहा हूं, उसी तरह मैं मध्यम वर्ग के लिए करूंगा। मैं उनका साथ दूंगा। मैंने सीखा है कि न सिर्फ किसानों और आदिवासियों को, बल्कि मध्यम वर्ग के लोगों को भी जमीन से जुड़े मामलों पर दबाया जाता है। -राहुल गांधी, कांग्रेस उपाध्यक्ष (फोटो: भाषा)

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपना आक्रामक रुख जारी रखते हुए अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर नया हमला कर दिया है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह रियल एस्टेट क्षेत्र का नियमन करने वाले एक विधेयक को कमजोर कर मध्यवर्गीय मकान खरीदारों के हितों के खिलाफ काम कर रही है और बिल्डरों को फायदा पहुंचाने वाला विधेयक बना रही है।

करीब दो महीने के अवकाश से लौटने के बाद से ही भूमि अधिग्रहण विधेयक और किसानों के मुद्दे पर सरकार और प्रधानमंत्री को लगातार निशाना बना रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष ने मध्यम वर्ग तक अपनी पहुंच कायम करने की कोशिश के तहत कहा कि जिस तरह वे किसानों और आदिवासियों के साथ खड़े हैं, उसी तरह वे मध्यम वर्ग के लोगों की भी लड़ाई लड़ेंगे।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के कई फ्लैट खरीदारों से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि किसानों व आदिवासियों के खिलाफ काम कर रही सरकार अब उसी तरह से मध्यम वर्ग के खिलाफ भी काम कर रही है। संशोधित रियल एस्टेट (नियमन व विकास) विधेयक के खिलाफ राहुल के मोर्चा खोलने से राज्यसभा में इस विधेयक पर पांच मई को चर्चा होने और पारित किए जाने पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। एनडीए सरकार के पास राज्यसभा में इतना संख्याबल नहीं है कि वह विधेयक को उच्च सदन में पारित करा सके।

कांग्रेस नेता ने कहा कि मैंने उन्हें भरोसा दिलाया है कि जिस तरह मैं गरीबों और आदिवासियों की मदद कर रहा हूं, उसी तरह मैं मध्यम वर्ग के लिए करूंगा। मैं उनका साथ दूंगा। राहुल ने कहा कि मैंने सीखा है कि न सिर्फ किसानों और आदिवासियों को, बल्कि मध्यम वर्ग के लोगों को भी जमीन से जुड़े मामलों पर दबाया जाता है। मकान खरीदारों को उनके साथ खड़े रहने का आश्वासन देते हुए राहुल ने कहा कि पारदर्शिता में कमी के कारण खरीदार असमंजस में हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें बताया जाता है कि आपको फलां दिन फ्लैट मिल जाएगा। लेकिन सालों बीतने पर भी उन्हें फ्लैट नहीं दिया जाता। उन्हें बताया जाता है कि फ्लैट का सुपर डूपर एरिया बहुत बड़ा होगा पर जो दिया जाता है, वह कुछ और ही होता है। सरकार उस विधेयक को खत्म करने पर आमादा है जिसे कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार रियल एस्टेट क्षेत्र के विनियमन के लिए लेकर आई थी।

उन्होंने कहा कि असल कमी यह है कि पहले के विधेयक में पारदर्शिता थी पर अब नहीं है। आप जिस कारपेट एरिया पर दस्तखत करते हैं, आपको वही दिया जाता है। अब उन्होंने उसे खत्म कर दिया है और इसे खरीदार हितैषी के बजाए बिल्डर के फायदे वाला बना दिया है। इससे पहले, जमीन अधिग्रहण विधेयक को लेकर राहुल मोदी सरकार पर कॉरपोरेट हितैषी, किसान-विरोधी और गरीब विरोधी होने के आरोप लगा चुके हैं। पिछले लोकसभा चुनावों के समय भी कांग्रेस उपाध्यक्ष ने देश की 70 करोड़ आबादी के पांव के नीचे फर्श देने का वादा कर उन्हें मध्यम वर्ग के दर्जे में लाने की बातें कही थी ।

कांग्रेस ने रियल एस्टेट विधेयक में एनडीए सरकार की ओर से किए गए बदलावों और यूपीए व राजग सरकार के रियल एस्टेट विधेयकों के बीच का फर्क लोगों को बताने का फैसला किया है। पार्टी की दलील है कि पहले के रियल एस्टेट विधेयक में किसी अपार्टमेंट में दीवारों को छोड़कर कारपेट एरिया को नेट यूजेबल एरिया के रूप में स्पष्ट तरीके से परिभाषित किया गया था। इसमें अब इस स्पष्टीकरण के साथ संशोधन कर दिया गया है कि राष्ट्रीय भवन निर्माण संहिता 2005 या इसके बाद के स्वरूपों की परिभाषा के मुताबिक नेट यूजेबल एरिया किराए पर दिए जाने लायक एरिया होगा।

कांग्रेस का कहना है कि इसका मतलब यह है कि किसी एरिया को ऐसे परिभाषित किया गया है जिससे खरीदार भ्रमित होगा और परिभाषा के मुताबिक एरिया को भवन निर्माण संहिता से जोड़ दिया गया है जिसे संसद में लाए बगैर ही संशोधित किया जा सकता है। पार्टी यह भी दलील दे रही है कि पहले के विधेयक में एक बार मंजूर कर लिए जाने और परियोजना शुरू कर दिए जाने के बाद बिल्डर स्वीकृत योजना में बदलाव नहीं कर सकते थे जबकि अब बिल्डर महज खरीदार को बताकर मामूली बदलाव कर सकते हैं और इसमें मामूली बदलाव की सीमा व प्रकार को परिभाषित नहीं किया गया है।

कांग्रेस यह दलील भी दे रही है कि पहले के विधेयक में जहां परियोजनाओं के विस्तार के लिए समय सीमा मांगना बहुत मुश्किल था, वहीं अब परियोजना में देरी करना काफी आसान हो गया है।

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