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राहुल गांधी ने नहीं माना SC का सुझाव, RSS पर दिए बयान पर खेद जताने से किया इंकार

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने महात्मा गांधी की हत्या के लिए कथित रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को जिम्मेदार ठहराने वाले अपने बयान पर खेद व्यक्त करके मामला खत्म करने का सुप्रीम कोर्ट का सुझाव मानने से गुरुवार को इनकार कर दिया।
Author नई दिल्ली | November 27, 2015 03:20 am

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने महात्मा गांधी की हत्या के लिए कथित रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को जिम्मेदार ठहराने वाले अपने बयान पर खेद व्यक्त करके मामला खत्म करने का सुप्रीम कोर्ट का सुझाव मानने से गुरुवार को इनकार कर दिया। राहुल गांधी ने कहा कि वे इस मामले का सामना करेंगे।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी पंत के पीठ ने इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी में मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित आपराधिक कार्रवाइयों पर अंतरिम रोक लगाने संबंधी अपने आदेश को जारी रखा है। पीठ ने कहा, ‘यदि आप इस मामले को खत्म करना चाहते हैं तो हम इसी तरह सोचते हैं। मैं (सिर्फ एक प्रस्ताव को) इस तरह से रेखांकित कर रहा था। सुनवाई के दौरान कुछ सुझाव दिए गए थे। लेकिन प्रतिवादी (संघ कार्यकर्ता राजेश कुंते) के वकील ने कहा है कि याचिकाकर्ता (गांधी) को खेद व्यक्त करने का अहसास दिलाना होगा तभी वे समझौता करेंगे’।

पीठ ने कहा, ‘मैं समझता हूं कि इसे शालीन तरीके से खत्म किया जा सकता है और मानहानि के मामले को निपटाया जा सकता है’। राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल इस सुझाव पर सहमत नहीं हुए और उन्होंने कहा कि वे इसके बजाए मामले में बहस करना पसंद करेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह शिकायत ‘प्रायोजित’ व ‘दुर्भावना से प्रेरित’ है और इसे खारिज किया जाना चाहिए।

पीठ ने प्रतिवादी कुंते से कहा कि वह चार हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करें। न्यायालय ने कहा कि गांधी इसके बाद चार हफ्ते के भीतर अपना जवाबी हलफनामा चाहें तो दायर कर सकते हैं। पीठ पहले ही आपराधिक मानहानि के दंडात्मक प्रावधान की सांवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी, गांधी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित विभिन्न व्यक्तियों की 27 याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर चुकी है।

इस पर फैसला प्रतीक्षित है। पीठ ने इन मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर हम याचिकाएं स्वीकार करते हैं तो मानहानि का ऐसा कोई भी मामला नहीं बचेगा। अदालत को फैसला करना है कि क्या भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और धारा 500 को कानून की किताब से निकाल देना चाहिए और यदि नहीं तो क्या इन दंडात्मक प्रावधान को इसमें बने रहना चाहिए। ये दंडात्मक प्रावधान मानहानि के अपराध को दंडनीय बनाते हैं जिसके लिए दो साल तक की कैद हो सकती है।

केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों ने आपराधिक मानहानि के प्रावधानों को निरस्त करने का पुरजोर तरीके से विरोध किया है। इनका तर्क है कि ये प्रावधान दूसरों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने से लोगों को रोकने में अहम होते हैं।
इन सरकारों का तर्क है कि इस कानून को निरस्त करने से समाज में अराजकता की स्थिति पैदा होगी क्योंकि ऐसी स्थिति में लोग किसी की भी प्रतिष्ठा को धूलधूसरित करके बच निकलेंगे।

संघ की भिवंडी इकाई के सचिव कुंते का आरोप है कि राहुल गांधी ने पिछले साल छह मार्च को सोनाले में एक चुनाव सभा में कहा, ‘संघ के लोगों ने गांधी जी की हत्या की’। उनका कहना था कि कांग्रेस के नेता ने अपने भाषण के माध्यम से संघ की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया है।

कुंते की शिकायत के बाद मजिस्ट्रेट की अदालत ने कार्यवाही शुरू की और राहुल गांधी को पेश होने के लिए नोटिस जारी किया था। इसके बाद कांग्रेसी नेता ने इस मामले में पेश होने से छूट और शिकायत निरस्त करने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करने के साथ ही अपने आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता को सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए वक्त दिया था। इसके बाद ही राहुल गांधी ने आपराधिक मामला और उनके खिलाफ दर्ज शिकायत निरस्त करने के लिए मई में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

 

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