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राहुल गांधी का पंजाब दौरा ‘राजनीतिक नौटंकी’

विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ संघर्ष को पंजाब तक पहुंचाने के लिए राहुल गांधी रेलगाड़ी से राजग शासित राज्य पहुंचे और 'अपनी आंखों से' किसानों की हालत देखी...
Author April 29, 2015 12:30 pm
राहुल पर चुटकीः कोई बच्चा घर से भाग गया है (फ़ोटो-पीटीआई)

विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ संघर्ष को पंजाब तक पहुंचाने के लिए राहुल गांधी रेलगाड़ी से राजग शासित राज्य पहुंचे और ‘अपनी आंखों से’ किसानों की हालत देखी।

टीशर्ट और जींस पहने कांग्रेस उपाध्यक्ष पंजाब के सीमावर्ती हरियाणा के इस शहर में मंगलवार शाम सचखंड एक्सप्रेस की सामान्य बोगी में बैठकर पहुंचे। उनके आलोचकों ने इस दौरे को ‘राजनीतिक’ नाटक बताया है। उन्होंने कहा,”‘मुझे बताया गया कि हालात बहुत खराब हैं। इसलिए मैं स्वयं इसे देखना चाहता था।” राहुल ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में बैठकर संवाददाताओं से कहा, “मैं पंजाब जा रहा हूं। मैंने अपने भाषण में (संसद में) कहा था कि जो लोग देश को अपनी जमीन जोतकर खाद्यान्न, भोजन मुहैया कराते हैं उनकी जमीन छीनी जा रही है। यह गलत है और हम इसका विरोध करेंगे।”

कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और पंजाब मामलों के प्रभारी व पार्टी महासचिव शकील अहमद भी उनके साथ थे। यह पूछने पर कि उनके दौरे को राजनीतिक बताया जा रहा है तो राहुल ने पलटकर पूछा, “वे हर चीज को गैर राजनीतिक बनाने के लिए क्या करना चाहते हैं “राहुल शिअद-भाजपा शासित राज्य के खन्ना और गोबिंदगढ़ सड़क मार्ग से जाएंगे और राज्य की मंडियों में स्थिति का जायजा लेंगे जहां हाल में हुई बेमौसम बारिश के बाद किसानों को अपने उत्पाद बेचने में कठिनाई आ रही है। वे सरहिंद मंडी में भी रुकेंगे।”

उनका दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब क्षेत्र के किसानों ने सरकार पर गेहूं खरीद में ढिलाई बरतने के आरोप लगाए हैं। राज्य में किसानों ने आत्महत्या भी की है। खन्ना की अनाज मंडी एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडियों में एक मानी जाती है। राहुल कृषि संकट को देखते हुए अगले महीने किसानों तक पहुंचने के लिए किसान पदयात्रा की भी शुरुआत करेंगे।

केंद्रीय मंत्री और अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर ने राहुल के दौरे को ‘नौटंकी’ बताया है। कांग्रेस आरोप लगाती रही है कि पंजाब सरकार किसानों के उत्पादों को पर्याप्त मात्रा में नहीं खरीद रही है। राहुल ने हाल में सरकार पर हमला करते हुए आरोप लगाए थे कि वह कृषि समुदाय की ‘उपेक्षा’ कर रही है और उद्योगपतियों व धनी लोगों का पक्ष ले रही है।

उन्होंने सरकार पर आरोप लगाए हैं कि हाल में हुई बेमौसम बारिश में वह अलग-अलग आंकड़े दे रही है। बजट सत्र के प्रथम चरण में अनुपस्थित रहे राहुल 56 दिनों की छुट्टी से लौटने के बाद किसानों और युवकों के मुद्दे उठा रहे हैं।

कांग्रेस उपाध्यक्ष मई के पहले हफ्ते में महाराष्ट्र के विदर्भ या तेलंगाना क्षेत्र से पदयात्रा करने की भी योजना बना रहे हैं ताकि किसानों से जुड़ सकें। राहुल द्वारा किसानों के मुद्दे को जोर शोर से उठाने को ऐसे समय में पार्टी को जमीन से जुड़ने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है जब पार्टी को 2014 के लोकसभा चुनावों में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। पिछले वर्ष हुए लोकसभा चुनावों में इसके सांसदों की संख्या 44 रह गई थी जबकि 2009 के चुनावों में इसके 206 सांसद थे। राजग के भूमि विधेयक और कृषि संकट के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा बनाए गए माहौल को पार्टी किसानों के बीच अपनी पैठ बनाने के अवसर के रूप में देख रही है।

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  1. V
    VIJAY LODHA
    Apr 29, 2015 at 12:09 pm
    कहने की जरुरत नहीं है कि लोकतंत्र में लोक बड़ा होता है. आम लोगों के बीच जाने की इसी नीति पर राहुल यदि दो-तीन साल पहले चले होते तो संभव था कि वजूद से जूझने वाली मौजूदा हालत में कांग्रेस नहीं आती..
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