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कांग्रेस कट्टरपंथियों को बढ़ावा देकर पंजाब का माहौल बिगाड़ कर रही है: सुखबीर सिंह

पंजाब में सत्तारूढ़ अकाली दल और कांग्रेस के बीच वाकयुद्ध उस वक्त तेज हो गया जब राज्य के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने कांग्रेस पर आरोप लगाया..
Author नई दिल्ली | November 21, 2015 21:21 pm
पंजाब के उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल। (पीटीआई फाइल फोटो)

पंजाब में सत्तारूढ़ अकाली दल और कांग्रेस के बीच वाकयुद्ध उस वक्त तेज हो गया जब राज्य के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह अलगाववादी ताकतों को बढ़ावा दे कर पंजाब में समस्या उत्पन्न कर रही है। कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज कर दिया। राज्य में अपनी राजनीतिक लड़ाई को दिल्ली लाते हुए बादल और अमरिंदर ने यहां अलग अलग संवाददाता सम्मेलनों में एक दूसरे पर जमकर आरोप मढ़े।

बादल ने आरोप लगाया कि अमृतसर में हाल में एक कार्यक्रम में कांग्रेस नेता चरमपंथी और अलगाववादी तत्वों के साथ थे जहां खालिस्तान की मांग बुलंद की गई। सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल (बादल) के अध्यक्ष बादल ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मुलाकात की और मांग की कि कांग्रेस के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और उसकी मान्यता खत्म की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाए कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी पंजाब में वैसा ही माहौल पैदा करना चाहती है जैसा आतंकवाद के दौर में रहा है।

लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता अमरिंदर सिंह ने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि कांग्रेस कट्टरपंथियों एवं राष्ट्र विरोधी ताकतों का समर्थन कर रही है और दावा किया कि पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल अपनी स्वयं की विफलता का दोष कांग्रेस पर मढ़ने का प्रयास कर रहे हैं।

सिंह ने शनिवार को यहां कहा, ‘‘हमें देशभक्ति और राष्ट्रवाद पर सुखबीर बादल जैसे किसी व्यक्ति से सीख लेने की जरूरत नहीं जिसके पिता एवं मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल खालिस्तान आंदोलन के दौरान भारत के संविधान की प्रतियां जलाने पर अभी भी गर्व करते हैं।’’

उन्होंने हाल में अमृतसर में आयोजित सिखों के धार्मिक जमावड़े ‘सरबत खालसा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां पर बड़ी संख्या में लोगों का जुटना बादल सरकार के खिलाफ ‘गुस्से’ की अभिव्यक्ति थी और वह खालिस्तान का समर्थन करने के लिए नहीं था जैसा सुखबीर बादल और खालिस्तान समर्थक सिमरनजीत सिंह मान मिलकर पेश कर रहे हैं।

सुखबीर के दावों पर कि उनके पास इसके सबूत हैं कि सरबत खालसा में किस तरह से राष्ट्र विरोधी प्रस्ताव तैयार किये गए और पारित हुए, अमरिंदर ने कहा कि राज्य के उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के तौर पर वह क्या कर रहे थे। उन्होंने सवाल किया, क्या उनकी जिम्मेदारी कांग्रेस पर आरोप लगाकर समाप्त हो जाती है। बेहतर होगा कि वह नैतिक जिम्मेदारी लें और त्यागपत्र दे दें।

अमरिंदर ने दावा किया कि सुखबीर खुद की गलतियों के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराकर अपनी हताशा और उस ‘पूर्वाग्रह’ को प्रतिबिंबित कर रहे हैं जिससे वह ग्रस्त हैं। उन्होंने कहा, ‘सुखबीर और उनके पिता के लिए ऐसे में हताशा का अनुभव करना स्वाभाविक हैं जब राहुल गांधी का पूरे पंजाब में उनकी पदयात्रा के दौरान खुली बाहों से स्वागत किया जाता है जबकि बादल परिवार के सदस्य बाहर निकलने की हिम्मत भी नहीं कर सकते क्योंकि ऐसा न हो कि लोग उन्हें उनके मंत्रियों की तरह पीटने लगें।’

बादल ने कहा कि उनकी सरकार ने गृहमंत्रालय को भी राज्य के घटनाक्रम के बारे में लिखा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की भूमिका का ‘पर्दाफाश हो गया है’ क्योंकि उसके नेता 10 नवंबर को अमृतसर में एक जमावड़े में शामिल हुए थे जहां ‘प्रमुख मांग एक अलग खालिस्तान थी।’

बादल ने ‘सरबत खालसा’ का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने बेअंत सिंह की हत्या के दोषी को जत्थेदार बनाया है। अकाली नेता ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर वीडियो हैं जिनमें दिखाया गया है कि कांग्रेस नेता अलगाववादियों को निर्देश दे रहे हैं कि वे क्या कहें। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने जमावड़े को अन्य तरह के समर्थन दिए।

बादल ने यह भी दावा किया कि वहां मौजूद एक कांग्रसी नेता रमनजीत सिंह सिक्की पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता अमरिन्दर सिंह के निकट माना जाता है। उपमुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस नेता इंदरजीत सिंह जिरा भी उस जमावड़े में मौजूद थे। अकाली नेता ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी पंजाब गए थे और ऐसे समय में चरमपंथी तत्वों को प्रोत्साहन दिया था जब पाकिस्तान की आईएसआई पहले ही राज्य में समस्या पैदा करने की कोशिश कर रही थी। बादल ने कांग्रेस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उपमुख्यमंत्री ने पत्रकारों को बताया कि राष्ट्रपति ने उन्हें आश्वासन दिया कि मामले पर गौर किया जाएगा।

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