December 04, 2016

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नोटबंदी : आम लोगों के साथ बैंक कर्मचारी भी बेहाल

केंद्र सरकार के इस फैसले का बड़ा असर राजधानी के बैंक कर्मचारियों पर भी पड़ रहा है। सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों के कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।

Author नई दिल्ली | November 13, 2016 05:26 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

पुराने नोट बंद करने के केंद्र सरकार के फैसले का खमियाजा आम लोगों के अलावा बैंक कर्मचारियों को भी भुगतना पड़ रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एसोसिएशन पहले ही से सरकार से नए स्टाफ की भर्ती की मांग कर रहे हैं। बैंक एसोसिएशंस का कहना है कि नया स्टाफ रखने के बजाए बैंक कर्मचारियों पर अतिरिक्त भार थोप दिया है। केंद्र सरकार की ओर से 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने के बाद रोजाना हजारों दिल्लीवासी बैंक और एटीएम के बाहर लंबी कतारों में लगे नजर आते हैं।

केंद्र सरकार के इस फैसले का बड़ा असर राजधानी के बैंक कर्मचारियों पर भी पड़ रहा है। सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों के कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। बैंकों में दूसरे व चौथे शनिवार को छुट्टी होती है। सरकार ने फिलहाल ये छुट्टी रद्द कर दी है। इन दिनों रविवार को भी कर्मचारियों को ड्यूटी पर रहने को कहा गया है। वहीं बैंकों में स्टाफ की कमी से ज्यादातर काउंटरों पर उपभोक्ता का कार्य करने के लिए कोई भी कर्मचारी नहीं होता है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों में ज्यादातर इन दिनों रकम के लेन-देन में लगे हुए हैं। यह सिलसिला बीते चार दिनों से चल रहा है। कई बैंकों में तो यह काम प्रबंधक कर रहे हैं। जिन बैंकों में पहले एक दिन में 80 से 90 उपभोक्ता विभिन्न बैंकिंग कार्यों से जाते थे, वहां पर इन दिनों पांच से छह सौ उपभोक्ता पहुंच रहे हैं।

बैंक आॅफ बड़ौदा के एक कर्मचारी प्रवीण कुमार ने बताया कि जिन कर्मचरियों ने कैश काउंटरों पर कम काम किया है, अब उन्हें रोजाना इन्हीं काउंटरों पर बैठना पड़ रहा है। इन काउंटरों पर उपभोक्ताओंं की भीड़ और शोर-शराबे की वजह से कर्मचारी अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। कई स्थानों पर बैंक कर्मचारी नगदी की किल्लत की शिकायत भी कर रहें हैं। कनॉट प्लेस इनर सर्किल स्थित स्टेट बैंक आॅफ इंडिया में शनिवार को एक काउंटर पर ढाई हजार रुपए कम पाए गए, जिसकी भरपाई वहां पर बैठने वाले कर्मचारी को करने को कहा गया। आॅल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन के उपाध्यक्ष जेपी शर्मा ने कहा कि कई बैंकों के कर्मचारियों से कैश काउंटरों पर जमा नगदी ज्यादा और गिनती में रकम की कमी की शिकायतें मिल रही हैं।

उन्होंने कहा कि उनका एसोसिएशन लगातार सरकार से बैंकों में अतिरिक्त स्टाफ की भर्ती की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार ने उसे पूरा करने के बजाए बैंक कर्मचारियों पर अतिरिक्त भार डाल दिया। राजधानी में बैंक कर्मचारियों को रोजाना उपभोक्ताओं के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है। रिजर्व बैंक से विभिन्न बैंकों को नई करंसी काफी कम मिल रही है। जिसकी वजह से अभी भी ज्यादातर एटीएम बिना करंसी के खाली पड़े हुए हैं। एटीएम से नई करंसी नहीं निकल रही है, इसलिए लोग बैंकों के बाहर लाइन लगा रहे हैं। पहले दो दिन उपभोक्ताओं को एक फार्म भरने और उसके साथ अपने वोटर कार्ड या आधार कार्ड की फोटो कॉपी जमा करवाकर नई करंसी दी जा रही थी, लेकिन अब इन दोनों औपचारिकताओं के अलावा बैंक कर्मचारियों को उपभोक्ता का ब्योरा भी कंप्यूटर में डालना पड़ रहा है। इस काम में कम से कम पांच से सात मिनट का समय लगता है।

बैंक कर्मचारियों का कहना है कि उनकी शाखाओं पर रिजर्व बैंक से काफी कम राशि आ रही है, जिसकी वजह से ज्यादातर बैंकों में दो बजे ही उपभोक्ता को नई नगदी देने का काम बंद करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार ने फैसला लिया था कि एक उपभोक्ता एक दिन में बैंक से चार हजार रुपए के पुराने नोट बदलवा सकता है। यह काम शुरू के दो दिन जारी रहा, लेकिन नई करंसी के अभाव में अब उपभोक्ता को एक दिन में सिर्फ दो हजार रुपए ही दिए जा रहे हैं।

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First Published on November 13, 2016 5:26 am

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