ताज़ा खबर
 

दंतेवाड़ा में नरेंद्र मोदी ने विकास और शांति का नारा दे कहा, खत्म होगा मौत का खेल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नक्सलवादियों से कहा कि वह हिंसा छोड़कर अमन के रास्ते पर चलें ताकि मौत का तांडव खत्म हो और विकास का मार्ग प्रशस्त हो। तीस बरस में यह पहला...
Author May 10, 2015 08:47 am
तीस बरस में यह पहला मौका है जब देश के किसी प्रधानमंत्री ने नक्सलवादियों के इस गढ़ की यात्रा की है। (फ़ोटो-पीटीआई)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित इलाके के लोगों को आश्वासन दिया कि यहां मौत का खेल खत्म होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को चरमपंथियों से अपील की कि वे हिंसा के बारे में पुनर्विचार करें और उन लोगों के बच्चों के साथ बस पांच दिन बिताएं जिनकी उन्होंने हत्या की थी।

प्रधानमंत्री बनने के बाद दंतेवाड़ा में अपनी पहली यात्रा के दौरान एक जनसभा में मोदी ने कहा-आदिवासियों का रूप धर कर उन बच्चों के घर जाइए जिन्होंने अपने मां-बाप खोए हैं। उनके साथ पांच दिन रहिए। उनसे बात करिए। उन्हें अपनी असलियत नहीं बताइए। मैं आपको पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि वे अपनी बात और अनुभव से आपको पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर देंगे।

मोदी ने आगे कहा-केवल एक बार मानवता को गले लगा आप अपनी हिंसा से प्रभावित व्यक्तियों के परिवारों से मिलिए और आप कभी दोबारा इस रास्ते पर जाने की नहीं सोचेंगे। आप सोचेंगे कि आपने कुछ गलत किया है। सरकार, कानून या प्रलोभन आपको नहीं रोक सकते। लेकिन वे रोक सकते हैं जो आपकी बंदूक की गोली से प्रभावित हुए हैं।

पिछले तीस सालों में यह पहला मौका था जब देश के प्रधानमंत्री नक्सलियों के इस गढ़ के दौरे पर आए। मोदी ने यहां एक जनसभा में कहा-जो यह सोचते हैं कि यह मौत का खेल बंद होगा या नहीं, मैं आपसे यह पूर्ण प्रतिबद्धता से कह सकता हूं और आपको यह विश्वास दिला सकता हूं कि निराश होने की जरूरत नहीं है। यह रुकेगा।

मोदी ने छत्तीसगढ़ के अपने संक्षिप्त प्रवास के दौरान माओवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित बस्तर क्षेत्र के लिए 24,000 करोड़ रुपए की कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की, जिनमें एक विशाल इस्पात संयंत्र, एक रेलवे लाइन, स्लरी पाइपलाइन और पेलेट संयंत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा-देश में हिंसा का कोई भविष्य नहीं है। यदि कोई भविष्य है तो वह शांतिपूर्ण तरीकों से है। भारत में जो लोग यह पूछते हैं कि उन लोगों को वापस लाने का क्या तरीका है जिन्होंने हिंसा का रास्ता चुन लिया है। मैं समझता हूं कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने वह रास्ता निकाला है। कंधे पर एक हल ही हल है, बंदूक नहीं।

1985 में राजीव गांधी के दौरे के बाद मोदी पिछले तीन दशकों में नक्सल प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं। मोदी ने पंजाब और नक्सलबाड़ी (पश्चिम बंगाल में) का उदाहरण दिया जहां लोग पूर्व में हिंसा से प्रभावित रहने के बाद अब एक शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे हैं। मोदी ने कहा-वह भूमि जहां नक्सलवाद का जन्म हुआ था, उसका दौरा करिए और आप देखेंगे कि उन्होंने अपने अनुभव से सीख ली है और वह रास्ता छोड़ दिया है। आज वह नक्सलबाड़ी जहां से हिंसा का रास्ता शुरू हुआ था, जहां बम और बंदूकों की आवाजें होती थीं, रक्तपात होता था, आज वहां पर वह समाप्त हो गया है।

मोदी ने कहा-वार्ता से समस्याओं के समाधान के रास्ते निकल सकते हैं। अगर छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त हो जाता है तो यह देश में आर्थिक विकास के मामले में नंबर एक होगा। छत्तीसगढ़ में वह शक्ति है जो देश का भविष्य बदल सकता है। केवल विकास ही समस्याओं का हल ला सकता है।

उन्होंने इसके साथ ही कांग्रेस पर यह कहते हुए निशाना साधा कि चुनाव में जनता के नजरंदाज किए गए लोग सरकार के कार्य के बारे में झूठी अफवाह फैला रहे हैं। मोदी ने कहा-कुछ ऐसे लोग हैं जिन्हें गरीब को आजीवन उसी स्थिति में रखना अच्छा लगता है। उन्हें दुखी रखना उन्हें अच्छा लगता है। यदि वे उसमें कोई परिवर्तन देखते हैं, वे दुखी हो जाते हैं। मैं उनकी मुश्किल समझ सकता हूं।

उन्होंने पिछले साल चुनाव प्रचार के दौरान इस क्षेत्र के अपने दौरे को याद करते हुए कहा कि जब मैं आया था हमेशा लूटने की खबरें रहती थीं। कोयले की चोरी हुई थी। मेरी सरकार के एक वर्ष हुए हैं। क्या आपने वैसी कोई एक भी खबर सुनी? क्या कोई देश ईमानदारी के आधार पर नहीं चल सकता। चल सकता है। मैं आपको यह अपने एक वर्ष के अनुभव से कह सकता हूं। यहां पर सरकारें भी थीं लेकिन विकास इतनी कम गति से हो रहा था कि लोग निराश थे। यह रेल लाइन (जगदलपुर-रावघाट) आपको मुख्यधारा और देश के अन्य हिस्सों से जोड़ेगी। यह आर्थिक विकास में सहायक होगी।

उन्होंने कहा-इस क्षेत्र से लौह अयस्क भेजा जाता है। लेकिन इस्पात का आयात किया जाता है। हमें यह काम बंद करने की जरूरत है। अगर लौह अयस्क हमारा है तो इस्पात भी हमारा ही होगा। हम लौह अयस्क से इस्पात बनाएंगे।

मोदी ने कहा कि वे जहां भी जाते हैं लोग उनसे यह तय करने के लिए कहते हैं कि उनके बच्चों को नौकरी मिले। मोदी ने अपना संबोधन शुरू करने से पहले लोगों का ‘गोंडी’ भाषा में अभिवादन किया। मोदी को ‘गौर (जंगली भैंसा) सींग मुकुट’ भेंट किया गया।

इस मौके पर मौजूद गणमान्य व्यक्तियों में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह और केंद्रीय इस्पात मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर शामिल थे।

मोदी ने यहां पहुंचने पर जवांग गांव में शिक्षा शहर का दौरा किया जिसका मकसद उस क्षेत्र में रहने वाले कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा मुहैया कराना है। उन्होंने छात्रों विशेष तौर पर शारीरिक चुनौतियों वाले बच्चों से बात की जो कि विशेष विद्यालय ‘सक्षम’ में शिक्षा प्राप्त करते हैं। छात्र तुलसीराम ने प्रधानमंत्री को अपना नाम सांकेतिक भाषा में बताया। शिक्षा शहर सौ से अधिक एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और इसका निर्माण 120 करोड़ रुपए की लागत से हुआ है। यह आवासीय व कक्षा शिक्षा सुविधाएं मुहैया कराता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.