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…जब प्रणब मुखर्जी ने अमेरिका के आगे नहीं झुक कर बचाई थी बांग्‍लादेशी पीएम शेख हसीना की कुर्सी

अंग्रेजी अखबार द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शेख हसीना का तब साथ दिया था जब कुछ अंतर्राष्ट्रीय ताकतें शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से हटाना चाहती थी
2010 में तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से मुलाकात करती बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना (EXPRESS FILE PHOTO)

भारत दौरे पर पर आईं बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना का राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ गहरा लगाव है और इन दोनों नेताओं के बीच पारिवारिक रिश्ते हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी बांग्लादेश के ‘अभिभावक’ की भूमिका निभा चुके हैं। 1971 में बांग्लादेश निर्माण के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रणब मुखर्जी को ये जिम्मा दिया था। यही नहीं अंग्रेजी अखबार द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शेख हसीना का तब साथ दिया था जब कुछ अंतर्राष्ट्रीय ताकतें शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से हटाना चाहती थी। द टेलिग्राफ के मुताबिक तब प्रणब मुखर्जी यूपीए शासन काल के दौरान देश के वित्त मंत्री थे इस दौरान ही उन्हें अमेरिकी सरकार की मंत्री हिलेरी क्लिंटन का फोन आया। हिलेरी ने प्रणब मुखर्जी से एक अपील कर कहा कि वे बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन में साथ दें, इस दौरान शेख हसीना बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं, और बांग्लादेश में ग्रामीण बैंक के संस्थापक मोहम्मद यूनुस को पीएम बनाने की मांग को लेकर जबर्दस्त प्रदर्शन चल रहा था।

यूपीए शासन काल के दौरान वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के लिए यह एक अहम सवाल था एक और अमेरिका का दबाव दूसरी तरफ सालों पुराना रिश्ता। लेकिन प्रणब मुखर्जी ने किसी की नहीं सुनी और हिलेरी क्लिंटन जैसी शक्तिशाली नेता की अपील को मानने से इनकार कर दिया। अमेरिका इस दौरान यूक्रेन, जॉर्जिया और मिस्र जैसे देशों में क्रांति के नाम पर सत्ता में बदलाव करवा चुका था, और वह यही प्रयोग बांग्लादेश में दुहराना चाहता था। लेकिन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की दृढ़इच्छा शक्ति की बदौलत अमेरिका की ये कोशिश कामयाब नहीं हो सकी। अमेरिका का मानना था कि शेख हसीना और खालिदा जिया पर लगे करप्शन के आरोप बांग्लादेश के विकास में बाधक बन रहे हैं, इसलिए इन लोगों को सत्ता से जाना चाहिए और नॉबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को देश की बागडोर संभालनी चाहिए। लेकिन भारत ने ऐसा नहीं होने दिया। शेख हसीना सात साल के लंबे अंतराल के बाद भारत के सरकारी दौरे पर आई हैं, निश्चित रुप से वह प्रणब मुखर्जी को इसके लिए धन्यवाद देना चाहेंगी।

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