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फसल बीमा योजना के साथ पीएम का नाम जोड़ने को लेकर बीजेपी और जदयू के बीच तकरार बढ़ी

जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा फसल बीमा योजना का आधा पैसा राज्य देता है इसलिए उसे पीएम फसल बीमा योजना कहना सही नहीं।
Author नई दिल्ली | August 9, 2016 07:00 am
नीतीश कुमार ने फसल बीमा योजना के नाम पर आपत्ति जताई है। (फाइल फोटो)

बिहार सरकार और केंद्र सरकार के बीच प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) को लागू करने को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। बिहार में सत्ताधारी जदयू ने कहा कि वो देश के दूसरे गैर-एनडीए मुख्यमंत्रियों से इस योजना का नाम बदलने को लेकर समर्थन मांगेगी। जदयू ने केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह द्वारा बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर की गई टिप्पणी की भी निंदा की है। सोमवार को बिहार के सहकारी मंत्री आलोक कुमार मेहता ने केंद्रीय कृषि मंत्री से इस मुद्दे पर चर्चा की फिर भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। कही।

जदयू के महासचिव केसी त्यागी ने कहा, “दिन ब दिन केंद्र सरकार की योजनाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोऑपरेटिव फेडरलिज्म की बात करते हैं लेकिन ये प्रवृत्ति उनके इस विचार का गला घोंट रही है।” त्यागी ने आगे कहा, “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस योजना का नाम बदलने की मांग करके क्या गलत किया। अगर योजना में पचास प्रतिशत राशि राज्य को देनी है तो इसका नाम पीएम फसल बीमा योजना क्यों होना चाहिए? इसका नाम पीएम-सीएम फसल योजना होना चाहिए क्योंकि आधा फंड राज्य दे रहा है।” पीएमएफीवाई में करीब 6500 करोड़ रुपये राज्य वहन करेगा।

त्यागी राधामोहन सिंह के उस बयान का जवाब दे रहे थे जिसमें उन्होंने पीएमएफबीवाई का नाम बदलने की नीतीश की मांग को बेतुका बताते हुए कहा था कि इसे लागू करने वाले अन्य 22 राज्यों ने नाम पर कोई आपत्ति नहीं की। त्यागी ने कहा, “नीतीश कुमार जागरुक प्रधानमंत्री हैं। वो पहले भी केंद्र की योजनाओं की बढ़ती संख्या पर चिंता जता चुके हैं। जब ये कांग्रेस शासनकाल में होता था तो बीजपी भी इसकी आलोचना करती थी। अब खुद बीजेपी वही कर रही है। हम दूसरे गैर-एनडीए मुख्यमंत्रियों ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और नवीन पटनायक से इस मुद्दे पर समर्थन मांगेंगे। हम वामपंथी दलों के मुख्यमंत्रियों से भी साथ आने को कहेंगे।”

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वहीं राधामोहन सिंह से मुलाकात करने वाले मेहता ने उन्हें अपनी चिंता से अवगत कराया। मेहता पहले भी केंद्रीय कृषि मंत्री से मुलाकात कर चुके हैं। एक अगस्त को पत्र लिखकर मेहता ने केंद्रीय कृषि मंत्री को बिहार में इस योजना को लागू करने में आ रही दिक्कतों के बारे में बताया था। उनके पत्र के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये योजना बिहार समेत सभी राज्यों से व्यापक चर्चा के बाद ही बनाई गई थी।

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