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नरेंद्र मोदी सरकार के ढाई साल में ऐसे बदल रहा है देश

नरेंद्र मोदी सरकार के स्वच्छता अभियान के तहत वित्त वर्ष 2016-17 में अब तक 1.04 करोड़ शौचालयों का निर्माण हो चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नोटबंदी का फैसला फिलहाल विवादों में है। उनके राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि बीजेपी ने अगले साल पांच राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनाव और साल 2019 में होने वाले लोक सभा चुनाव को देखते हुए नोटबंदी का फैसला लिया है। मायावती और अरविंद केजरीवाल जैसे विपक्षी नेता नरेंद्र मोदी को अभी से चुनाव के लिए ललकार रहे हैं। दूसरी तरफ पीएम मोदी और बीजेपी दावा कर रहे हैं कि जनता का समर्थन उनके साथ है। विपक्ष का दावा है कि मोदी सरकार ने अपनी विफलता को छिपाने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी जैसे फैसले लिए हैं। ऐसे में जब मोदी सरकार के ढाई साल पूरे हो गए हैं तो आइए आंकड़ों की नजर में देखें कि पीएम मोदी अपने वादे पूरे करने में कितने सफल रहे हैं।

1- 2022 तक सबको घर- जून 2015 में नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल ने “2022 तक सबको घर” कार्यक्रम को मंजूरी दी। इस योजना का मकसद शहरी झुग्गियों को खत्म करना और लोगों को किफायती कीमत पर घर उपलब्ध कराना है। केपीएमजी एलएलपी की रिपोर्ट के अनुसार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए शहरी और ग्रामीण इलाकों में 11 करोड़ घर बनाने पड़ेंगे जिस पर करीब दो हजार अरब डॉलर की लागत आएगी। यानी भारत सरकार को आवास योजना पर 2022 तक हर साल 250-260 अरब डॉलर खर्च करने होंगे। आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय के अनुसार इस योजना के तहत साल 27 अक्टूबर 2016 तक 14,511 घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। 144,321 घरों का निर्माण चल रहा है और 434,723 घरों का निर्माण शुरू होना बाकी है।

2- भ्रष्टाचार से मुकाबला- नरेंद्र मोदी ने लोक सभा चुनाव के दौरान भ्रष्टाचार को अहम मुद्दा बनाया था। पीएम मोदी ने हाल ही भ्रष्टाचार और कालाधन खत्म करने की दिशा में कदम उठाते हुए 500 और 1000 के पुराने नोट बंद कर दिए। पीएम मोदी के नए फैसले का भ्रष्टाचार पर क्या असर होगा ये कुछ महीने बाद पता चलेगा। अंतरराष्ट्रीय संस्था ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल की करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (सीपीआई) 2015 में भारत को 168 देशों में 76वें स्थान पर रखा गया था। भ्रष्टाचार के मामले में संस्था ने भारत को 100 में 38 अंक दिए गए थे। (0 अंक यानी पूरी तरह भ्रष्ट, 100 अंक यानी पूरी तरह ईमानदार) साल 2014 में भी भारत सीपीआई तालिका में इसी स्थान पर था। भ्रष्टाचार के मामले में भारत ब्राजील, बुरकीना फासोऔर थाईलैंड जैसे देशों के समकक्ष था। साल 2013 और 2012 में भारत को इस तालिका में 36 अंक मिले थे।

3- स्वच्छता अभियान- नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने से पहले ही स्वच्छता पर काफी जोर देते रहे हैं। 2013 में दिए उनके बयान कि देश को “देवालय से ज्यादा शौचालय की जरूरत है” पर काफी विवाद हुआ था। पीएम बनने के बाद स्वच्छता नरेंद्र मोदी सरकार के एजेंडे में प्राथमिक सूची में रहा है। मोदी सरकार ने अक्टूबर 2014 में स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया। इस अभियान के तहत 2019 तक देश में 11 करोड़ नए शौचालय बनाने का लक्ष्य है। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस योजना के तहत देश में 2.8 करोड़ शौचालयों का निर्माण कार्य चालू है। वित्त वर्ष 2016-17 में अब तक 1.04 करोड़ शौचालयों का निर्माण हो चुका है। चालू वित्त वर्ष में कुल 1,26,62,724 शौचालय बनाए जाने हैं। वित्त वर्ष 2014-15 में 58,17,442, वित्त वर्ष 2013-14 में  49,76,294 और वित्त वर्ष 2012-13 में 45,59,162 शौचालयों का निर्माण हुआ था।

4- डिजिटल इंडिया-  नरेंद्र मोदी सरकार डिजिटल तकनीकी को लेकर काफी आक्रामक है। विभिन्न केंद्रीय योजनाओं तक पहुंच से लेकर नकद-मुक्त अर्थव्यवस्था के लिए मोदी सरकार डिजिटल इंडिया को बढ़ावा दे रही है। दूरसंचार क्षेत्र की नियामक संस्था ट्राई के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रति 100 व्यक्ति फोन की संख्या 2014 के 75.23 से बढ़कर 2015 में 79.38 हो गई थी। वहीं 2014 में देश में मोबाइल फोन सेवा इस्तेमाल करने वालों की संख्या 90.45 करोड़ थी जो साल 2015 में बढ़कर 96.90 करोड़ हो गई। शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में फोन का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ा है। ग्रामीण इलाकों में फोन का इस्तेमाल करने वालों की संख्या साल 2014 के 37.17 करोड़ से बढ़कर 2015 में 41.48 करोड़ हो गई। रिलायंस जियो द्वारा 31 दिंसबर तक मुफ्त 4-जी इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराए जाने के बाद 2016 में ये संख्या काफी अधिक बढ़ सकती है।

5- पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर-  पीएम नरेंद्र मोदी ने माताओं और बच्चों की मृत्यु दर कम करने का भी लक्ष्य बनाया था। पीएम मोदी ने अगस्त 2015 में एक कार्यक्रम में कहा था, “हमें ये दुखद सच्चाई स्वीकार करनी होगी कि दुनिया में हर साल 2,89,000 माताओं और पांच साल से कम उम्र के 63 लाख बच्चों की मौत हो जाती है।” पीएम की चिंता स्वाभाविक है क्योंकि साल 2015 में भारत में करीब 12 लाख बच्चों की पांच साल से कम उम्र में मौत हो गई थी। ये संख्या पूरी दुनिया में पिछले साल मृत्यु के मुख में चले गए 59 लाख बच्चों का करीब 20 प्रतिशत है। इस मामले में नाइजीरिया के बाद भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर था। भारत में साल 2015 में पांच साल से कम उम्र के प्रति 100 बच्चों की मृत्यु दर 48 थी, जबकि ये दर 2013 में 49 थी। संयुक्त राष्ट्र के मिलेनियम लक्ष्य के तहत भारत को 2015 तक ये दर 42 करनी थी जिसमें वो विफल रहा था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु की दर में साल 2014 में 5.4 प्रतिशत का और साल 2015 में 4.7 प्रतिशत का सुधार हुआ था।

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