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यूएनएससी में भारत की सदस्यता को साइप्रस का समर्थन, भारत ने की प्रशंसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुकवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करने के लिए वह साइप्रस की प्रशंसा करते हैं।
Author नई दिल्ली | April 29, 2017 02:12 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस अनेस्तेसियादेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुकवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करने के लिए वह साइप्रस की प्रशंसा करते हैं। दोनों पक्षों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस अनेस्तेसियादेस की अध्यक्षता में यहां एक प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता के बाद विमान सेवा तथा मर्चेट शिपिंग सहित चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए। साइप्रस के राष्ट्रपति अनेस्तेसियादेस के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, “भारत तथा साइप्रस दोनों का साझा उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जल्द से जल्द सुधार लाना है। उन्होंने कहा, “हममें से दोनों का मानना है कि मौजूदा दौर में दुनिया की कई तरह की चुनौतियों के समाधान के लिए सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “महामहिम, इस संदर्भ में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार में भारत के स्थायी सदस्य बनने के दावे का समर्थन करने के लिए मैं आपकी दिल से प्रशंसा करता हूं। मोदी ने कहा कि उन्होंने और अनेस्तेसियादेस ने परस्पर चिंता के अहम वैश्विक तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने यह भी कहा कि साइप्रस तथा भारत दोनों आपसी आर्थिक संबंधों का लाभ उठा रहे हैं और यह भारत में आठवां सबसे बड़ा निवेशक है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “पिछले साल, हमारे पूंजी व निवेश संबंधों को बढ़ावा देने के लिए हमने दोहरा कराधान वंचना समझौता (डीटीएए) में संशोधन किया।” उन्होंने कहा कि भारत ने साइप्रस के उद्यमियों के लिए निवेश के बेहतरीन मौके उपलब्ध कराए। पिछले साल दोनों देशों ने संशोधित दोहरा कराधान वंचना समझौते पर हस्ताक्षर किए। डीटीएए के प्रावधान एक अप्रैल से लागू हो गए। मोदी ने कहा, “दोनों देशों के उद्योग तथा अर्थव्यवस्था मेरी सरकार द्वारा शुरू किए गए महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों के साथ साझेदारी कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “साइप्रस के खूबसूरत परिदृश्य तथा ‘अतुल्य भारत’ का विस्तृत फलक दोनों देशों के पर्यटन को बढ़ावा देने का एक स्रोत हो सकते हैं।”

पाकिस्तान का नाम लिए बिना दशकों से भारत द्वारा सीमा पार आतंकवाद से मुकाबला करने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “हम इस बात से सहमत हैं कि सभी देशों के लिए यह बेहद जरूरी हो गया है कि वे उन राष्ट्रों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करें, जो हमारे क्षेत्रों में हिंसा की इन फैक्ट्रियों को पैदा करते हैं, उन्हें आश्रय देते हैं और उनका पोषण करते हैं। राष्ट्रपति और मैंने खासकर कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म के नतीजों के माध्यम से एक व्यापक वैश्विक कानूनी ढांचे के निर्माण की जरूरत पर चर्चा की। वहीं, अपनी तरफ से अनेस्तेसियादेस ने कहा कि उन्होंने तथा मोदी ने भारत तथा यूरोपीय संघ के संबंधों पर चर्चा की और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता पर समर्थन जताया।
शुक्रवा की वार्ता के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने ट्वीट किया, “बहुपक्षीय साझेदारी आगे बढ़ी। प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता के बाद दोनों नेता चार समझौतों के साक्षी बने।”

दोनों पक्षों ने संस्कृति, शिक्षा तथा वैज्ञानिक सहयोग के क्षेत्र में साल 2017 से 2020 के लिए एक कार्यकारी कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने साल 2017-18 में कृषि में सहयोग के लिए एक कार्ययोजना पर हस्ताक्षर किए। एक अन्य समझौता मर्चेट शिपिंग के क्षेत्र में सहयोग को लेकर हुआ। चौथा समझौता दोनों देशों के बीच विमान सेवा को बढ़ावा देने को लेकर हुआ। इससे पहले साइप्रस के राष्ट्रपति का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया। अनेस्तेसियादेस ने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें साइप्रस का आध्यात्मिक नेता और उसकी आजादी की लड़ाई का प्रेरणास्रोत करार दिया।

इसके बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उनसे मुलाकात की। अनेस्तेसियादेस, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को शुक्रवार शाम साइप्रस के सर्वोच्च सम्मान ग्रैंड कॉलर ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियॉस-3 से सम्मानित करेंगे। साइप्रस के राष्ट्रपति के सम्मान में प्रणब मुखर्जी शुक्रवार रात भोज की मेजबानी की। मंगलवार को मुंबई पहुंचे अनेस्तेसियादेस शनिवार को नई दिल्ली से स्वदेश रवाना होंगे। साइप्रस, भारत में आठवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है, जिसका फाइनेंशियल लीजिंग, शेयर बाजार, ऑटो विनिर्माण, विनिर्माण उद्योग, रियल एस्टेट, कार्गो हैंडलिंग, कंस्ट्रक्शन, शिपिंग तथा लॉजिस्टिक के क्षेत्र में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लगभग नौ अरब डॉलर है।

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