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इंदिरा गांधी के ‘ग़रीबी हटाओ’ नारे पर बरसे मोदी, भाजपा को बताया ‘विकास का पर्याय’

‘विकास उत्सव’ में करीब एक घंटे के अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद को देश का प्रधान सेवक बताया और सरकार के कामकाज का लोगों द्वारा मूल्यांकन का स्वागत किया।
Author बालासोर (ओड़िशा) | June 2, 2016 21:17 pm
बालेश्वर (ओड़िशा)में जनसभा को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फोटो)

इंदिरा गांधी के ‘गरीबी हटाओ’ नारे पर प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (2 जून) को कहा कि यह नारा विफल रहा क्योंकि उसे लागू करने के लिए चुना गया रास्ता गलत था। उन्होंने कहा, ‘हमने 40-50 सालों तक ‘गरीबी हटाओ’ का नारा सुना। जिन्होंने यह नारा दिया, हो सकता है, उनकी नीयत अच्छी रही हो, लेकिन उन्होंने गरीबी उन्मूलन का जो रास्ता चुना, वह निश्चित रूप से गलत था क्योंकि गरीबी, बेरोजगारी और बीमारियां बढ़ी ही।’

मोदी ने भाजपा को विकास का पर्याय करार दिया और कहा कि पार्टी शासित सभी राज्य अन्य राज्यों से कहीं तेजी से विकास कर रहे हैं। उन्होंने नवीन पटनायक सरकार पर परोक्ष प्रहार करते हुए कहा, ‘आप उन राज्यों की स्थिति देख सकते हैं जहां भाजपा के पैर अबतक नहीं जमे हैं।’ अपनी सरकार के दो साल पूरे होने पर यहां ‘मिसाइल शहर’ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने राज्य के लोगों से राजनीतिक बदलाव लाने का आह्वान किया। ओड़िशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार ओर असम के विकास की जोरदार वकालत करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार देश को गरीबी से मुक्त बनाने के लिए कटिबद्ध है।

उन्होंने कहा, ‘संसद में अपने पहले ही भाषण में मैंने कहा था कि मेरी सरकार गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित है। मेरा लक्ष्य सभी राज्यों का संपोषणीय विकास सुनिश्चित करना है। विकास का समेकित पथ होना चाहिए ताकि सभी राज्य समान रूप से आगे बढ़ें।’ मोदी ने कहा, ‘समय आ गया है कि जब व्यक्ति को सोचना होगा कि देश का पश्चिमी हिस्सा पूर्वी हिस्से से अधिक विकसित क्यों हैं? ओड़िशा में विपुल प्राकृतिक संसाधन हैं लेकिन यहां के लोग अब भी उपेक्षित हैं और राज्य में विकास नहीं है।’

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उन्होंने कहा कि गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य दर्शाते हैं कि भाजपा का मतलब विकास हे और विकास का मतलब भाजपा है। उन्होंने कहा कि विकास सर्वांगीण खुशहाली का सृजन करता है और उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्यों और केंद्र के बीच अवश्य ही तालेमल होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मेरी सरकार रेल, सड़क, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को महत्व दे रही है। योजनाओं में लोगों को साथ लिया जाना चाहिए अन्यथा वह महज कागजों पर ही रह जाएंगी।’

गरीबों के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गयी विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन कदमों से लोगों के बीच विश्वास पैदा हुआ है और उनका सामाजिक-आर्थिक कल्याण हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकारें धनवानों के लिए नहीं होती हैं और उन्हें गरीबी के खिलाफ संघर्ष के लिए काम करना चाहिए। गरीबी दूर करने के लिए वैज्ञानिक हल की जरूरत है।

‘विकास उत्सव’ में करीब एक घंटे के अपने भाषण के दौरान उन्होंने खुद को देश का प्रधान सेवक बताया और सरकार के कामकाज का लोगों द्वारा मूल्यांकन का स्वागत किया। मोदी ने कहा कि जो काम किया जा रहा है और जो पैसा खर्च हो रहा है, उसका लेखा जोखा देना और हर पैसे का हिसाब देना उनकी जिम्मेदारी है। अतीत में सरकारें ऐसे किसी लेखे जोखे के साथ सामने नहीं आयी।

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उन्होंने कहा, ‘मैं खुश हूं कि ओड़िशा की जनता के सामने देश का प्रधान सेवक किए गए कामकाज का लेखा जोखा प्रस्तुत कर रहा है। क्या अतीत में सरकारें लेखा जोखा देने यहां आयीं। पिछले 70 सालों में क्या किसी सरकार ने ऐसा लेखा-जोखा दिया। जब चुनाव आते थे तो वे कुछ सौगाते लेकर सामने आती थीं।’

कांग्रेस की सरकारों पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा, ‘पिछली सरकारें सोचती थीं कि वे अच्छी थीं। लेकिन हमने परिणाम देखे हैं। हम सबका साथ सबका विकास-लोगों की भागीदारी से विकास में यकीन करते हैं।’ मोदी ने कहा कि समाज में महिला-पुरुष भेदभाव विद्यमान है, ‘जब महिला-पुरुष समानता की बात है तो वैसे तो हम 21 वीं सदी में रह रहे हैं लेकिन कई लोगों की अब भी वही मानसिकता है जो 18 वीं सदी में थी। वह अवश्य बदलना चाहिए।’

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उन्होंने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना का जिक्र किया और विभिन्न परीक्षाओं में लड़कियों की उपलब्धियों को लेकर उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘इंद्रधनुष योजना’ जैसे टीकाककरण कार्यक्रम, पांच से छह साल के बच्चों से संबंधित आंगनवाडी जैसी योजनाओं, मध्याह्न भोजन, ‘सुकन्या समृद्धि’, स्कूली बच्चों के लिए शौचालय तथा अन्य कार्यक्रमों के नतीजे सामने आए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार लक्षित 18,000 गांवों में से 7000 में बिजली 300 दिन में पहुंचाने में सफल रही है। बाकी काम लक्ष्य के अनुसार 1000 दिन में पूरा होगा।

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