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सरकार की गिरती छवि से परेशान हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्रियों से मिलकर कहा- करो प्रचार

बैठक में प्रधानमंत्री कार्यालय के एक शीर्ष अधिकारी ने सोशल मीडिया पर भी प्रेजेंटेशन दिया।
Author November 11, 2017 20:56 pm
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को रात 8 बजे 500 व 1,000 रुपये के नोट बंद होने का ऐलान किया था। (Photo: PTI)

सरकार की गिरती छवि से चिंतित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल के मंत्रियों को प्रोत्साहित करते हुए उनसे सरकार की नीतियों और जमीनी स्तर पर की गई पहल के बारे में प्रचार करने और अच्छी बात कहने के लिए कहा है। मोदी ने शुक्रवार की रात केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में अपने सहयोगियों से कड़ी मेहनत करने और सरकार की नीतियों व कदमों से लोगों के जीवन में आए बदलाव के बारे में व्यापक रूप से जनता को बताने के लिए कहा। सूत्रों ने बताया कि बैठक में तीन मंत्रियों ने विभिन्न कार्यक्रमों और सरकार द्वारा की गई पहल ने कैसे लोगों के जीवन में ‘ईज ऑफ लिविंग’ (जीवनयापन करने में आसानी) करने का अवसर प्रदान किया, इस पर विस्तार से प्रेजेंटेशन दिया। बैठक में प्रधानमंत्री कार्यालय के एक शीर्ष अधिकारी ने सोशल मीडिया पर भी प्रेजेंटेशन दिया।

सूत्रों ने बताया कि ‘ईज ऑफ लिविंग’ पर दिया गया प्रेजेंटेशन करीब एक घंटे तक चला और इसमें तीन हिस्सों में 90 स्लाइड के साथ सरकार द्वारा पिछले साढ़े तीन साल में किए गए कामों को दर्शाया गया। ‘ईज ऑफ लिविंग’ प्रेजेंटेशन को कृषि राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, कौशल विकास राज्यमंत्री अनंत कुमार हेगड़े और शहरी विकास एवं आवास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पेश किया।

प्रेजेंटेशन में नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अलावा मुद्रा, डिजिटल इंडिया, किफायती आवास और उज्ज्वला योजना के लाभ बताते हुए दावा किया गया कि इन योजनाओं ने लोगों के जीवन को आसान बनाया है।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों द्वारा नोटबंदी और जीएसटी लागू करने को लेकर लगातार निशाना बनाए जाने के मद्देनजर सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव के बारे में लोगों को बताने के लिए उत्सुक है।

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  1. T
    Trilochan
    Nov 12, 2017 at 6:56 am
    नरेंद्र माफी को लगता है कि सिर्फ प्रचार करने से काम बन जायेगा तो ऐसा सिर्फ उनके साथ हो सकता है जिनके आंख में पट्टी और दिमाग मे ताला लगा हो। सबको उल्लू बना सकते है वो?
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    1. M
      MIGHTY BOMBER
      Nov 12, 2017 at 12:17 am
      ease of living तब होती है जब आम नागरिक की जेब में पैसा हो, महंगाई काबू में हो, "कल क्या होगा" यह चिंता नागरिकों को न सताए. भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान सरकार शायद यह समझती है कि केवल लोन देना और टैक्स कलेक्शन सरकार का काम है, बाकी कुछ नहीं. सरकारी लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दर कम हुआ है, नए नियम बनाकर इनको और कम करने कि कोशिश कि जा रही है लेकिन p-a-r-t-i-c-i-p-a-t-o-r-y notes पर कोई अंकुश नहीं लगाया गया है. स्टॉक मार्किट उफान पर है लेकिन कैपिटल गेन टैक्स से अमीरों को लाभ पहुंचाया जा रहा है , क्यों सरकार स्टॉक मार्किट से होने वाले मुनाफे पर उसी तरह से टैक्स नहीं लेती जैसे कि बैंक फिक्स्ड डिपाजिट पर लिया जाता है ? किसान की परवाह तो सरकार कभी करती नहीं, केवल कृषि कल्याण सेस आम नागरिक से लिया जा रहा है, जो कहाँ जा रहा है मालूम नहीं. वर्ग विशेष जैसे सरकारी कर्मचारी को कुछ फायदा हुआ है लेकिन कुल जनसँख्या का बहुत कम प्रतिशत सरकारी नौकरी में है, इसलिए वेतन आयोग का कुछ ख़ास असर नहीं हुआ है. कुल मिलाकर आर्थिक नीतियों से फायदा केवल अमीरों का हो रहा है.
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      1. M
        MIGHTY BOMBER
        Nov 12, 2017 at 12:00 am
        ease of living तब आती है जब आम नागरिक की जेब में पैसा हो, महंगाई काबू में हो, "कल क्या होगा" यह चिंता नागरिकों को न सताए. भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान सरकार शायद यह समझती है कि केवल लोन देना और टैक्स कलेक्शन सरकार का काम है, बाकी कुछ नहीं. सरकारी लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दर कम हुआ है, नए नियम बनाकर इनको और कम करने कि कोशिश कि जा रही है लेकिन parti tory notes पर कोई अंकुश नहीं लगाया गया है. स्टॉक मार्किट उफान पर है लेकिन कैपिटल गेन टैक्स से अमीरों को लाभ पहुंचाया जा रहा है , क्यों सरकार स्टॉक मार्किट से होने वाले मुनाफे पर उसी तरह से टैक्स नहीं लेती जैसे कि बैंक फिक्स्ड डिपाजिट पर लिया जाता है ? किसान की परवाह तो सरकार कभी करती नहीं, केवल कृषि कल्याण सेस आम नागरिक से लिया जा रहा है, जो कहाँ जा रहा है मालूम नहीं. वर्ग विशेष जैसे सरकारी कर्मचारी को कुछ फायदा हुआ है लेकिन कुल जनसँख्या का बहुत कम प्रतिशत सरकारी नौकरी में है, इसलिए वेतन आयोग का कुछ ख़ास असर नहीं हुआ है. कुल मिलाकर आर्थिक नीतियों से फायदा केवल अमीरों का हो रहा है.
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        1. M
          MIGHTY BOMBER
          Nov 11, 2017 at 10:39 pm
          ease of living तब होती है जब सरकार की प्रवृत्ति लोगों को कुछ देने की होती है. भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान सरकार शायद भारत की पहली ऐसी आत्मुग्ध सरकार है जिसने लोगों से केवल "लिया" या "छीन लिया", "दिया" कुछ भी नहीं. केवल वातानुकूलित कक्षों में बैठकर प्राइवेट सेक्टर को सब कुछ सौंप देने की नीति बना देने से ease of living नहीं आ सकती. जो थोड़े बहुत अच्छे कदम सरकार ने उठाये वह भी नोटबंदी, जल्दबाज़ी में लाये गए gst ,गैरजरूरी आधार लिंकिंग के अनचाहे प्रभाव में कहीं खो गए. हर सरकारी विभाग का बजट कम किया जा रहा है तो ऎसे हालात में ease of living कैसे होगा ? कुछ दिनों पहले खबर आयी कि अब गैर सरकारी स्कूल में शिक्षक बनने के लिए भी tet पास करना जरूरी है, यानि अगर व्यक्ति नोबल प्राइज विजेता भी है तो भी वह शिक्षक नहीं बन सकता क्योंकि उसने tet तो पास किया नहीं होगा. कई दशकों से सरकारी स्कूलों में केवल बी.एड पास शिक्षक ही भर्ती होते हैं, तो क्या इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर अच्छा हो गया है? नहीं. इसी तरह हर सरकारी विभाग में अजब गजब नियम बनाये जा रहे हैं बिना किसी समझ के, इससे नागरिक परेशान हैं.
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          1. S
            surjeetshyamal
            Nov 11, 2017 at 9:36 pm
            महापड़ाव: सरकार अगर जेल भरो अभियान से नहीं मानी तो होगा अनिश्चितिकालीन हड़ताल : workervoice /2017/11/Modi-Govt-Mahapadav-Sansad-Marg
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            1. N
              Nadeem Ansari
              Nov 11, 2017 at 9:01 pm
              Adverti t ki sarkar aur kya kar sakti hai..
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              1. Jagdish Chander
                Nov 11, 2017 at 8:57 pm
                जयादा प्रचार भी मुश्किल करेगा . या तो कुछ किया नहीं और जो किया उसने सत्यानाश कर दिया. जितना प्रचार होगा उतनी ही पोल खुलेगी. अब प्रचार पे समय ना बर्बाद करें और कुछ अच्छा काम करो जिससे लोगों का रहन न आसान और आराम दायक हो. आधार से सबकुछ लिंक करना सरकार के लिए भारी पड़नेवाला है. इससे लगभग हर नागरिक दुखी है. प्राइवेसी का कारण इतना नहीं जितना सर्विसेज ना मिलने का है. लोगों के बॉयोमीट्रिक्स नहीं मिल पते हैं बार बार लोग जगह जगह भागते फिरते हैं. ऐसे काम से जनता खुश तो नहीं होगी.
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