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70 साल बाद भारत का कोई पीएम इजराइल गया है तो यहूदियों-फिलस्‍तीनियों पर महात्‍मा गांधी का नजरिया भी पढ़ लीजि‍ए

महात्मा गांधी ने "यहूदी लोग" शीर्षक लेख नवंबर 1938 में लिखा था।
राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (1869-1948) (फाइल फोटो)

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल के गठन के बाद वहां जाने वाले पहले भारतीय पीएम बन गए हैं। पीएम मोदी मंगलवार (चार जुलाई) को इजराइल पहुंचे। इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने उनका स्वागत करते हुए उन्हें “दोस्त” बताया। इजराइली पीएम ने कहा कि उनके देश को 70 सालों से भारतीय प्रधानमंत्री के आगमन का इतंजार था। पीएम मोदी की यात्रा दोनों देशों के प्रगाढ़ होते रिश्तों के अलावा इस बात के लिए भी चर्चा में है कि पहली बार ऐसा होगा कि इजराइल जाने वाला कोई भारतीय राजनेता वहां जाकर फिलस्तीन नहीं जाएगा। साल 2015 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अपने इजराइल दौरे में फिलस्तीन भी गए थे। इजराइल का गठन 1948 में हुआ था। 1949 में संयुक्त राष्ट्र ने 1950 में भारत ने इसे मान्यता दी थी। भारत आधिकारिक तौर पर फिलस्तीन और इजराइल के विवाद के बीच तटस्थ रहा है।

इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच पत्रकार प्रमोद जोशी ने महात्मा गांधी का नवंबर 1938 में यहूदी-फिलस्तीनियों पर लिखा एक लेख शेयर किया है। लेख में गांधीजी ने लिखा है कि उन्हें कई लोगों ने पत्र लिखकर इस समस्या पर उनसे राय मांगी है। गांधीजी ने लिखा है कि उन्हें यहूदियों से पूरी सहानुभूति है। गांधीजी ने लिखा है, “लेकिन मेरी सहानुभूति इस बात की ओर मेरी आंखें बन्द नहीं कर सकती कि न्याय के तकाजे क्या हैं। यहूदियों के लिए एक अलग देश की मांग मुझे कोई खास नहीं जंचती। इस मांग का समर्थन “बाइबिल” के हवाले से और यहूदियों के फिलस्तीन लौटने की सतत और तीव्र लालसा की चर्चा करके किया जाता है। लेकिन संसार की अन्य अनेक जातियों की तरह वे भी उसी देश को अपना देश और अपना घर क्यों नहीं बना लेते जहां उनका जन्म हुआ और जहां वे जीविकोपार्जन करते हैं?”

गांधीजी ने लिखा है, “फिलस्तीन अरबों का है- ठीक उसी तरह जिस तरह इंग्लैंड अंग्रेजों का और फ्रान्स फ्रांसीसियों का है। यहूदियों को अरबों के सिर थोप देना गलत और अमानवीय कार्य है। आज फिलस्तीन में जो कुछ हो रहा है वह नैतिक आचरण के किसी भी नियम के अनुसार उचित नहीं साबति किया जा सकता। (राष्ट्र संघ द्वारा दिए गए) शासनाधिकार का पिछले युद्ध के परिणाम के अतिरिक्त और कोई आधार, कोई औचित्य नहीं है। यहूदियों के वतन के रूप में फिलस्तीन उन्हें पू्र्णतः या अंशतः वापस मिल जाए, इसके लिए स्वाभिमानी अरबों को तबाह करना निश्चय ही मानवता विरुद्ध अपराध होगा। ”

गांधीजी ने लेख के अंत में लिखा है, “और अब दो शब्द फिलस्तीन के यहूदियों के बारे में। मुझे इस बात में तनिक भी संदेह नहीं है कि जो रास्ता उन्होंने अपनाया है वह गलत है। बाइबिल में वर्णित फिलस्तीन कोई भौगोलिक सीमा नहीं है। वो उनके दिल में है। लेकिन अगर उन्हें भौगोलिक फिलस्तीन को अपना देश मानना ही है, उसे स्वदेश के रूप में देखना ही है तो ब्रिटेन की संगीनों की छाया में उसमें प्रवेश करना तो उनका बिल्कुल गलत तरीका है। कोई धर्म-कार्य संगीनों और बमों के बलपर कैसे किया जा सकता है। वे फिलस्तीन में अरबों के सद्भावना के सहारे ही बस सकते हैं। उन्हें अरबों का हृदय परिवर्तन करने की कोशिश करनी चाहिए।”

पढ़ें महात्मा गांधी के लेख “यहूदी लोग” –

Gandhi, Gandhi on Jews महात्मा गांधी के यहूदियों और फिलस्तीनियों पर लिखे लेख का पहला पन्ना। gandhi, gandhi on jews महात्मा गांधी के यहूदियों और फिलस्तीनियों पर लिखे लेख का दूसरा पन्ना। gandhi, gandhi on jews महात्मा गांधी के यहूदियों और फिलस्तीनियों पर लिखे लेख का तीसरा पन्ना। gandhi, gandhi on jews महात्मा गांधी के यहूदियों और फिलस्तीनियों पर लिखे लेख का चौथा पन्ना।

वीडियो- इजराइल जाने वाले पहले पीएम बने नरेंद्र मोदी

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  1. M
    Mahendra Yadav
    Jul 6, 2017 at 10:33 pm
    अरे भाई इनलोगों के लिए तोह सारा संसार ही इनके बाप मुसलमानो की लिए है
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    Reply
    1. P
      paatidaar
      Jul 7, 2017 at 3:33 am
      aaj mujhe pata chal gaya gandhi kitna bada shadayantrakari kattar muslim tha dramebaaj iski yahoodiyo se kitni sahanubhooti thi dikh raha hai
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      Reply