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कश्मीर के पत्थरबाजों पर पीएम मोदी ने मारा ताना, की सेना की तारीफ

पीएम ने कहा कि जवान कश्मीर में बाढ़ आने पर लोगों की जान बचाते हैं, लोग उनके लिए तालियां बजाते हैं लेकिन बाद में हमारे फौजी पत्थर भी खाते हैं।
सिविल सर्विस डे के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अधिकारी को सम्मानित करते हुए। साथ में हैं केंद्रीय मंत्री जीतेन्द्र सिंह। (फोटो-PTI)

सिविल सर्विस डे के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज (21 अप्रैल को) नई दिल्ली के विज्ञान भवन में अफसरों को संबोधित करते हुए सेना की तारीफ की। पीएम ने अपने भाषण में कश्मीर में चल रही गतिविधियों की चर्चा करते हुए कहा कि जवान कश्मीर में बाढ़ आने पर लोगों की जान बचाते हैं, लोग उनके लिए तालियां बजाते हैं लेकिन बाद में हमारे फौजी पत्थर भी खाते हैं। उन्होंने कहा कि ताली बजाना जनता का भाव जाहिर करता है लेकिन कई मौकों पर इस भाव का अभाव नजर आता है। उन्होंने कहा कि चुनौतियों को अवसर में बदलने का माद्दा आज हर अफसर में होना चाहिए। पीएम ने कहा कि सभी को इस पर चिंतन-मनन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि 20 साल पहले और आज की परिस्थितियों में काफी अंतर है।  इस मौके पर प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को सम्मानित भी किया।

राजनैतिक इच्छा शक्ति की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति सुधार कर सकती है लेकिन अफसरशाही और जन भागीदारी उसे नए आयाम तक पहुंचा सकती है। हमें इन दोनों शक्तियों का समावेश कर विकास की दिशा में आगे बढ़ना होगा।” पीएम मोदी ने कहा कि सुधारवादी कदम उठाने में हमारी राजनैतिक इच्छाशक्ति न कम पड़ी है और ना आगे कम पड़ेगी। पीएम ने कहा कि वो चाहते हैं कि आने वाले एक साल में वर्क क्वालिटी में बदलाव हो। उन्होंने कहा कि सिर्फ सर्वश्रेष्ठ होने से काम नहीं चलेगा। आपको सर्वश्रेष्ठ होने को अपनी आदत बनाना होगा। हालांकि, हल्के अंदाज में पीएम ने यह भी कहा कि उनमें कुछ ज्यादा ही राजनैतिक इच्छाशक्ति है।

पीएम ने अफसरों से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने को कहा। उन्होंने कहा कि आम जनमानस तक पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया से बेहतर विकल्प उपलब्ध नहीं है। मोदी ने कहा, “ई-गवर्नेंस, एम-गवर्नेंस, और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर लोगों तक पहुंच बनाएं।” उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि अधिकारी नीति नियंता और नियामक बनने की जगह लोगों के मददगार साबित हों। उन्होंने कहा कि पिछले 15-20 वर्षों में तकनीक ने हमारी कार्यशैली का तरीका बदला है। अब हमारी जिम्मेदारी और चुनौतियां दोनों पहले से ज्यादा बढ़ गई हैं।

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