April 25, 2017

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नोटबंदी पर नरेंद्र मोदी कर गए ये 5 बड़ी गलतियां, क्‍या हो सकता है अंजाम?

सरकार ने नोटबंदी की घोषणा के एक हफ्ते बाद दवा की दुकानों पर 500-1000 के नए नोटों को चलाने की इजाजत दी।

Author नई दिल्ली | November 18, 2016 18:27 pm
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

पीएम मोदी ने 2014 के लोक सभा चुनाव से पहले कालेधन को बड़ा मुद्दा बनाया था। एक चुनावी सभा में मोदी ने यहां तक कह दिया कि विदेशों में भारत का इतना कालाधन पड़ा है कि अगर वो वापस आ जाए तो हर देशवासी के खाते में 15-15 लाख रुपये आ सकते हैं। बीजेपी गठबंधन को लोक सभा में प्रचंड बहुमत मिला और केंद्र में उसकी सरकार बन गई। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार के पहले ढाई साल के कार्यकाल में विदेश से कोई कालाधन नहीं आया। पीएम मोदी पर “15-15 लाख हर खाते में” आने की बात याद दिलाकर ताने मारे जाने लगे। शायद यही वजह थी कि मोदी सरकार ने सोचा कि विदेश न सही देश के अंदर पड़े कालेधन पर ही निशाना साधा जाए। मोदी सरकार ने पहले कालेधन की स्वैच्छिक घोषणा की योजना पेश की। इस योजना के तहत 30 सितंबर 2016 तक जो लोग आयकर विभाग में कालाधन जमा करने वालों से कुल जमा राशि पर केवल 45 प्रतिशत टैक्स लिया जाना था।  इस योजना के तहत करीब 65 हजार करोड़ रुपये का कालाधन सामने आया जिससे सरकार को करीब 27 करोड़ रुपये मिले। देश में पड़े कालेधन के खिलाफ मोदी सरकार ने दूसरी बड़ी कार्रवाई नोटबंदी के तौर पर की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब आठ नवंबर को रात आठ बजे 500 और 1000 के पुराने नोटों को बंद करने की घोषणा की तो आम जनता का शुरुआती रुझान सरकार के इस फैसले के प्रति काफी सकारात्मक था लेकिन इसे अमलीजामा पहनाए जाने को लेकर सरकार की तैयारी इतनी खराब निकली कि वो आलोचनाओं में घिर गई। आइए देखते हैं कि पीएम मोदी ने नोटबंदी को लागू करने में कौन सी पांच बड़ी गलतियां कीं-

1- पीएम नरेंद्र मोदी की घोषणा से गया गलत संदेश- नरेंद्र मोदी ने जब नोटबंदी की घोषणा की तो उन्होंने जोर देकर कहा कि रात 12 बजे से “500 और 1000 के नोट कागज के टुकड़े” रह जाएंगे। पीएम मोदी ने अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में ये साफ किया कि पुराने नोटों को 30 दिसंबर तक बैंकों में बदला जा सकेगा लेकिन उनका शुरुआती स्वर ऐसा थे जिससे कई लोगों खासकर अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे गरीब तबके को लगा कि पुराने नोट उस दिन के बाद किसी काम के नहीं रहेंगे। इसकी वजह से एक तरह से बदहवासी का आलम हो गया। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए जिसमें भिखारी या कोई बेहद गरीब आदमी 500 या 1000 के नोट नहीं ले रहा है। शुरुआती घोषणा में सरकार ये स्पष्ट नहीं किया कि देश में ढाई लाख रुपये तक की सालान आय कर मुक्त है और  10-20-50 हजार या एक-दो लाख रुपये नकद जमा करने वालों को डरने की जरूरत नहीं है। सरकार की शुरुआती घोषणा से ये भी साफ नहीं हुआ कि जिन लोगों ने अपने बैंक खातों बड़ी धनराशि शादी या इलाज के लिए नकद निकाल रखा है उन्हें डरने की कतई जरूरत नहीं क्योंकि उस पैसे को बगैर किसी कानूनी अड़चन के वापस बैंक में जमा किया जा सकता है। वित्त मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने घोषणा के दो दिन बाद कहा कि ढाई लाख रुपये से अधिक राशि जमा करने वालों की ही जांच की जाएगी लेकिन तब तक थोड़ी देर हो चुकी थी।

2- अस्पतालों और दवा की दुकानों को कड़ा संदेश न देना- नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा स्थिति का सामना ऐसे लोगों को करना पड़ा जो अस्पताल में भर्ती थे या जिन्हें इलाज कराना था। ऐसी कई खबरें आईं कि अस्पतालों ने  पीएम मोदी की घोषणा के तुरंत बाद पुराने नोट लेना बंद कर दिया। इस वजह से एक बड़ी आबादी को गंभीर संकट का सामना करना पड़ा। शहरी आबादी के पास कार्ड पेमेंट की सुविधा होती है लेकिन आज भी भारत की 68 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है जो प्लास्टिक मनी का बहुत ज्यादा इस्तेमाल नहीं करती। मोदी सरकार घोषणा के साथ ही चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को ये कड़ा संदेश में विफल रही कि अगर उनकी वजह से मरीजों को दिक्कत हुई तो उन्हें सरकार के कोपभाजन का शिकार करना पड़ेगा। शुरुआती घोषणा में दवा की दुकानों पर 500-1000 के नोट चलाने की छूट नहीं दी गई थी। इसकी वजह से बीमार लोगों को निजी दवा की दुकानों पर दवाएं लेने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा। पीएम मोदी ने नोटबंदी की घोषणा के समय कहा कि पुराने नोट सरकारी अस्पतालों, पेट्रोल पंपों, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों पर 11 नवंबर तक चलते रहेंगे। बाद में सरकार ने इस समय सीमा को पहले 14 नवंबर, फिर 18 नवंबर और उसके बाद 24 नवंबर किया। यानी सरकार शुरू में ये अनुमान लगाने में विफल रही कि हालात कितने समय में सामान्य हो पाएंगे। निजी दवा की दुकानों पर पुराने नोट चलेंगे ये फैसला लेने में भी सरकार को छह दिन लग गए।

3- मंडी व्यापारियों की दिक्कत के बारे में नहीं सोचा- मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार नोटबंदी की तैयारी छह महीने से कर रही थी लेकिन इसके बाद जिस तरह के हालात पैदा हुए उससे ऐसा कत्तई नहीं लगता। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2016 तक भारत में 16.42 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट बाजार में थे जिसमें से करीब 14.18 लाख करोड़ रुपये 500 और 1000 के नोटों के रूप में थे। यानी आरबीआई द्वारा जारी कुल नोटों में करीब 85 प्रतिशत 500 और 1000 के नोटों के रूप में था। ऐसे में वित्त मंत्रालय के अफसरों को यह बात समझनी चाहिए थी कि अगर बाजार से 85 प्रतिशत नकद राशि बाहर हो जाएगी तो रोजमर्रा के लेन-देन के लिए पैसे की भारी किल्लत हो जाएगी। इस भावी किल्लत को पूरा करने के लिए आरबीआई 100 और 50 रुपये के नोटों की अधिक मात्रा पहले से बाजार में उतार सकता था जिससे जनता पर तुरंत नकद की कमी का इतना ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार देश में 31 मार्च तक मौजूद कुल 9026 करोड़ नोटों में करीब 24 प्रतिशत नोट (करीब 2203 करोड़ रुपये) ही प्रचलन में थे। यानी आरबीआई ने 100 और 50 के नोटों की मात्रा बाजार में बढ़ाई होती तो नगद की कमी को एक हद तक पूरा किया जा सकता था।

4- एटीएम में नए नोटों की उपलब्धता सुनिश्चित न करना- वित्त मंत्रालय की योजना के अनुसार 10 नवंबर से सभी एटीएम से हर कार्ड से दो हजार रुपये निकाल जा सकेंगे। जब 10 नवंबर को सारे एटीएम खुले तो उनके सामने भी बैंकों ही की तरह लम्बी कतार लग गई। लेकिन उनका हाल भी बैंकों जैसा ही हुआ। देश के सारे एटीएम में केवल 100-100 के नोट उपलब्ध थे। नतीजा ये हुआ कि सभी एटीएम कुछ ही घंटों में खाली हो गए और लोगों की हताशा बढ़ गई। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मीडिया को बताया कि सभी एटीएम के सामान्य तरीके से काम करने में तीन हफ्ते का वक्त लगेगा। एटीएम में 2000 और पांच सौ के नए नोट उपलब्ध कराने के लिए उनका रीकैलिब्रेशन (बदलाव) करना होगा। मंत्रालय समय रहते पर्याप्त एटीएम का रीकैलिब्रेशन करवाने में विफल रहा, वरना आम लोगों को इतनी मुसीबत नहीं झेलनी पड़ती।

5- 2000 का नोट पहले उतारा 500 का बाद में– बैंकों से 10 नवंबर को जनता को 2000 के नए नोट मिलने शुरू हो गए। गिने-चुने जगहों पर 500 नोटों की उपलब्धता की खबर आई। जिन लोगों को 2000 के नए नोट मिले भी उनकी मुसीबत कम नहीं हुई क्योंकि बाजार में बहुत कम ही दुकानदार 2000 के नोट के बदले 50-100-200 रुपये का सामान देने को तैयार हो रहे थे। जिन लोगों के पास 100 रुपये के नोट थे वो हालात को देखते हुए उसे खर्च करने में बहुत ज्यादा किफायत बरत रहे थे। बाजार में पहले से ही नगद पैसे कम थे ऊपर से इतना बड़े नोट के आने से लोगों के सामने छुट्टे पैसों का संकट बढ़ गया। देश के कई शहरों में लोगों ने शिकायत की कि उन्हें दो हजार रुपये का नोट तो मिल गया लेकिन उसे कोई ले नहीं रहा है। अगर सरकार ने दो हजार रुपये से पहले 500 के नए नोट बाजार में जारी किए होते तो लोगों को इस संकट से बचाया जा सकता था। सरकार की आँख थोड़ी देर से खुली और रविवार को बड़ी संख्या में 500 रुपये के नए नोट जारी किए गए। अगर वित्त मंत्रालय के अफसर आम आदमी की नजर से एक बार इस मसले को देखते तो इस मुश्किल से बचा जा सकता था।

वीडियोः जानिए भारत में कब-कब हुई है नोटबंदी-

वीडियोः वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी की आलोचना को किया खारिज-

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First Published on November 18, 2016 5:24 pm

  1. U
    Umesh ram
    Nov 23, 2016 at 12:51 pm
    Sir ham aam pablice hain par aap se ek bat kehna hain chahte hain aap ke 100me 96%pablice aap ke sath Hai poultice party se darte kyu jo aap NE phesla lya hain use aapase mat Lena sir ham aapke sath hain Mai bihar ka Hu bihar ke bacha aap ke sath Hai
    Reply
    1. U
      Umesh ram
      Nov 23, 2016 at 12:56 pm
      Surry bacha Mata pita bhai bhahen sab aap ke sath Hai
      Reply
      1. A
        Ajit Rajput
        Nov 19, 2016 at 9:16 am
        नोटबंदी पे अब तक जो हुआ जाने दो, उससे आगे सरकार को अभी बहुत कुछ करना बाकि है सरकार अब फिर से कालाधन ना बने उसके लिए क्या उपाय कर रही है, तथा कॅश में जो रोज लेनदारी देनदारी होती है बड़े आकड़ो की वो कैसे रोकेगी. ऐसे बहुत सारे लोग और धंधे है उन पर लगाम कैसे कसेगी. उद्धारहण के लिए नमी डॉक्टर,वकील,बिल्डर,डोनेशन दे कर होने वाले दाखले,हॉस्पिटल,होटल,रेस्टुरेन्ट,ट्यूशन लेने वाले, इत्यादि. साथ ही साथ जो लोग करोडो अरबो के लोन नहीं चूकते उनके विरुद्ध क्या नए नियम लेन वाली है. आम आदमी ने आपन काम कर दिया है.
        Reply
        1. S
          Sonu vishwakarma
          Nov 19, 2016 at 6:03 pm
          Jai hind
          Reply
          1. I
            Iqbal Siddiqui
            Nov 18, 2016 at 2:10 pm
            kewal siyasi maqsad se u.p.chunao mein mayawati aur mulayam singh ko apang karne ke liye amit shah ne modiji ko yeh sujhao diya jisko modiji ne bina uske parinamo ko soche ya experts ki raye liye laagoo kar diya.
            Reply
            1. J
              joil
              Nov 19, 2016 at 1:02 am
              sahi likha
              Reply
              1. J
                joil
                Nov 19, 2016 at 1:11 am
                एक तरफ करोड़ों लोग रोज कितने तंग हो रहे हैं और दूसरी तरफ कुछ लोगों ने अपने करोड़ों-अरबों रु. काले से सफेद कर लिये हैं। दो हजार का नोट छापना हमारी सरकार के भौंदूपन पर मोहर लगाता है।अब काला धन दुगुनी तेजी से बनता चला जाएगा। नकली नोट भी अभी से बाजार में आ गए हैं। संकट की इस घड़ी में वे जल्दी और ज्यादा लिये और दिये जाएंगे।अर्थक्रांति’ के संयोजक अनिल बोकिल की यह मूल योजना थी। बोकिल की योजना के मुताबिक सिर्फ 1000 और 500 के नोट ही नहीं, 100 के नोट भी खत्म होना चाहिए थे। इसके अलावा सबसे जरुरी यह था कि आय
                Reply
                1. J
                  joil
                  Nov 19, 2016 at 1:04 am
                  डॉ. वेदप्रताप वैदिक‘काले धन’ को लेकर भाजपा-सरकार सांसत में पड़ गई है। हवन करते हुए उसके हाथ जल रहे हैं। ‘काले धन’ को खत्म करने का उसका इरादा क्रांतिकारी और एतिहासिक है लेकिन ऐसा लगता है कि अभिमन्यु ने चक्र-व्यूह में घुसना तो सीख लिया है किंतु उसे बाहर निकलना नहीं आता!मैं शुरु में समझ रहा था कि यह हमारा अभिमन्यु विदेश नीति के माे में ही नौसिखिया है लेकिन आर्थिक माों में उसकी समझ कितनी दरिद्र है, इसका पता पिछले एक सप्ताह से पूरे देश को चल रहा है।एक तरफ करोड़ों लोग रोज कितने तंग हो रहे हैं और
                  Reply
                  1. R
                    Ramesh Chhabra
                    Nov 19, 2016 at 10:11 am
                    जब मीडिया साथ हैं तो क्या गम हैं! सभी मीडिया टीवी Newspaper की एक ही आवाज़, वाह वाह मोदी जी
                    Reply
                    1. R
                      Ravindra Singh
                      Nov 19, 2016 at 4:15 pm
                      सरकार अपनी असफलताओं को ढकने के लिये बाबाओं को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रही है और इमोशनल कार्ड खेल रही है. नोटबंदी के कारण हुई मौतों की अब न्यायिक जांच होनी चाहिये और मरने वाले देशवासियों को किस सम्मान से नवाज़ा जाय इस पर बहस छिड़नी चाहिये.कालाधन रोकने की दिशा में नोटबंदी ( 1000 और 500 के नोट) एक साहसिक और क्रांतिकारी क़दम है लेकिन इस फैसले को लागू करने के तरीके बेहद बचकाने और अदूरदर्शिता से भरे हुए हैं. देश को 100% साक्षर मानकर और प्लास्टिक मानी( क्रेडिट कार्ड/ डेबिट कार्ड, ई-वॉलेट , ऑनलाइन ट्रा
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