December 05, 2016

ताज़ा खबर

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले- मीडिया में सरकार का दखल ना हो, आत्मनियंत्रण की व्यवस्था सही

पीएम मोदी ने कहा कि मीडिया में बाहर से दखल नहीं होना चाहिए। यह दखल समाज को आगे बिल्कुल नहीं जाने देगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को प्रेस काउंसिल के एक कार्यक्रम में बोला कि मीडिया में सरकार का दखल नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि मीडिया में आत्मनियंत्रण की व्यवस्था सही है। पीएम मोदी ने कहा, ‘अभिव्यक्ति की आजादी बनी रहनी चाहिए। गलतियों से मीडिया का मूल्यांकन नहीं होना चाहिए। मीडिया ने समाज में जागरूकता फैलाई है। इसने स्वच्छता अभियान में भी अहम भूमिका निभाई है। इमरजेंस के दौरान प्रेस की आवाज को दबाया गया था, लेकिन मोरारजी भाई के पीएम बनने के बाद चीजें सही हो गई थीं। सरकार और मीडिया दोनों को ही बदलाव लाना होगा। तंदुरुस्त स्पर्धा समाज के विकास के लिए बहुत जरुरी है। पत्रकारों की मौत हो रही है, क्योंकि वे सच दिखाने की कोशिश करते हैं, यह और भी ज्यादा गंभीर है।’

पीएम मोदी बोले, ‘प्रेस काउंसिल को 50 साल पूरे हो रहे हैं। बीच में एक कालखंड ऐसा भी आया था, जब प्रेस काउंसिल को खत्म कर दिया गया था। यह स्वतंत्र व्यवस्था है। यह व्यवस्था ज्यादात्तर तो इस क्षेत्र की स्वतंत्रता बनाए रखना, अभिव्यक्ति की आजादी को बरकरार रखना और कभी कोई तकलीफ आए तो खुद बैठकर सुलझाना, खुद ही इसमें बदलाव लाते रहना चाहिए। पुराने युग में इतनी चुनौतियां नहीं थी, जो अब है। पहले पत्रकारों के पास सोचने के लिए समय रहता था, जब वो अपना रिपोर्ट फाइल करके शाम को घर लौटते थे तब भी दिमाग में रहता था कि मैंने आज रिपोर्ट फाइल की थी, कल छपकर आएगी। ये शब्द सही नहीं रहेगा। लिखने के बाद सुबह छपने तक उसके मन पर एक दबाव रहता था, चिंता रहती थी कि जो मैं रिपोर्ट करके आया हूं, जो लिखकर आया हूं उसके क्या क्या प्रभाव होंगे। मेरा शब्द सही था या नहीं। उसमें सुधार के लिए कोशिश भी करता था। आज के पत्रकारों के पास यह अवसर ही नहीं है। इतनी तेज गति से उसे दौड़ना पड़ रहा है। खबरों की भी स्पर्धा है। ऐसे में उसके सामने बड़ा संकट रहता है कि जो बोलने वालों के लिए जो बोलना था बोल दिया, दिखाने वालों के लिए दिखा दिया। इतना तेजी से बदलाव आया है। इस स्थिति में इस प्रकार के संस्थान कैसे इन सब कठिनााइयों को दूर करें सोचना होगा।’

यहां देखें- पीएम मोदी का पूरा भाषण-

साथ ही उन्होंने कहा, ‘सीनियर लोग बैठकर नई पीढ़ी के लिए उपयोग के लिए कोई तंत्र तैयार करें। क्योंकि ये एक ऐसा क्षेत्र है कि उस क्षेत्र को महात्मा गांधी कहते थे कि अनियंत्रित लेखनी बहुत संकट पैदा कर सकती थी। लेकिन गांधी ये भी कहते थे कि बाहर का नियंत्रण तो तबाही पैदा कर देगा। इसलिए बाहर के दखल की कल्पना, उस समाज को आगे ले जाने वाली कल्पना हो ही नहीं सकती। इसमें अंदर से ही नियंत्रण होना चाहिए, बाहर से दखल तो बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। सरकारों को तो बिल्कुल भी टांग नहीं लगानी चाहिए। आप ही लोगों ने बैठकर, इसी प्रेस काउंसिल के माध्यम से और समाज स्वर्ग्राही हित देखकर हम इन व्यवस्थाओं को विकसित कैसे करें, सोचना होगा। यह कठिन है कि वे अपनों के बीच में किसी की आलोचना कैसे करें। अपना अवलोकन बहुत कठिन होता है। कंधार की घटना के वक्त हमारे देश में टीवी मीडिया शुरुआती दौर में था, उस वक्त जो परिवार के लोग के लोगों की रिपोर्ट दिखाई जाती थी। उसमें दिखाया जाता था कि जहाज में फंसे लोगों के परिवार वालों को गुस्सा दिखाया जाता था। यहां गुस्सा बढ़ता था, वहां आतंकवादियों का हौसला बुलंद होता था। उसके बाद मीडिया जगत के वरिष्ठ लोगों ने बैठकर खुद से ही अपना अवलोकन किया था। इस पर चर्चा की थी कि कहां, कैसे और क्यों ये गलती हुई। यह कोई छोटी घटना नहीं है। इस दौरान कुछ प्लान भी बनाए गए ते। यह बहुत बड़ी सेवा का अवसर था। इसके बाद 26/11 में भी ऐसा ही देखने को मिला। लेकिन उस वक्त किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका। मैं मानता हूं कि गलती हमसे भी होती है और गलती औरों से भी होती है। गलतियों के आधार पर मीडिया का मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा। उसमें जिम्मेदार वर्ग है, जो कि चाहता है कि इसको हम ही बैठकर बुराईयों से कैसे बचाएं। ये अपने आप में इस जगत के लिए एक अच्छा प्रयास है। यह लगातार चलता रहना चाहिए।’

वीडियो में देखें - “सरकार को मीडिया के काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए”: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

वीडियो में देखें- रामनाथ गोयनका अवॉर्ड्स: मीडिया की भूमिका पर बोले पीएम मोदी

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 16, 2016 3:57 pm

सबरंग