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34वीं मन की बात में बोले मोदी- गरीबी, भुखमरी, गंदगाी, संप्रदायवाद, जातिवाद भारत छोड़ो

Mann ki Baat Live: नरेंद्र मोदी का 'मन की बात' कार्यक्रम 20 भाषाओं में सुनाया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह 34वीं मन की बात है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (30 जुलाई, 2017) को 34वीं बार मन की बात की। इसमें उन्होंने असम और गुजरात में आई भयंकर बाढ़ का जिक्र करते हुए कहा, ‘वर्षाकाल हर जीवित के लिए बहुत जरूरी होती है, लेकिन जब ये विकराल रूप लेती है तो पता चलता है कि ये विनाशकारी रूप भी ले सकती है। असम और गुजरात में भारी बाढ़ की वजह से आज दोनों राज्यों में विनाशक स्थिति बनी हुई। किसान भाईयों को इन दिनों बहुत नुकसान हुआ है। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए सेना और अन्य फोर्स चौबीस घंटे काम कर रही हैं। पीड़ित लोगों से लगातार बात की जा रही है। देशवासी इस मुसीबत में कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े हैं। लोग बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए हैं।’ मोदी ने जीएसटी पर भी बात की और कहा कि जीएसटी लागू होने के एक ही महीने के भीतर ही बहुत से फायदे मिले हैं। ट्रकों की आवाजाही बड़ी है, वातारण को लाभ हुआ है। व्यापारी भी इससे अब खुश हैं। जीएसटी पर लोगों की बहुत चिट्ठियां आई हैं। लोगों ने फोन किया और मुझसे सवाल किए। गरीबों ने इसपर मुझसे सवाल पूछे, लोगों ने बताया कि उन्हें जीएसटी लागू होने पर कितना डर लग रहा था। लेकिन अब लोगों को इसके फायदे मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि इतने बड़े देश में जीएसटी लागू करना बहुत बड़ी कामयाबी है। आने वाले समय में विश्व इसपर जरूर अध्ययन करेगा। सभी राज्यों सरकारों ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जीएसटी से जुड़ी हर जानकारी आप मोबाइल पर ले सकते हैं। वहां आपको हर चीज की जानकारी मिलेगी। जीएसटी भारत की सामूहिक सफलता का एक ऐतिहासिक उदाहरण है। ये सामाजिक विकास का अभियान है। इसके लिए अपने सभी देशवासियों को नमन करता हूं।

वहीं भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं सालगिरह पर पीएम मोदी ने कहा कि आने वाला अगस्त का महीना बहुत महत्वपूर्ण है। इसी महीने में हम भारत छोड़ो और असहयोग आंदोलन की 75वीं सालगिरह मनाने जा रहे हैं। भारत छोड़ो आंदोलन ने ही ब्रिटिश राज्य की सत्ता को झकझोर दिया था। इस आंदोलन में हर किसी ने कंधा से कंधा मिलाकर देश की आजादी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महात्मा गांधी के कहने पर लोगों ने आजादी में हिस्सा लिया। 9 अगस्त को महत्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो का बिगुल तो छोड़ दिया लेकिन अंग्रेस सरकार ने हमारे वरिष्ठ नेताओं को जेल में डाल दिया। 1942 में तो ऐसी स्थिति आई कि महात्मा गांधी ने करो या मरो का नारा दे दिया। लोगों को आजादी के लिए आगे आने के लिए कहा। 1857 से शुरू हुआ स्वतंत्रता संग्राम साल 1942 तक किसी ना किसी रूप में चलता रहा। भारतीयों ने किसी ना किसी रूप में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बहुत कुछ किया। और 1942 के पांच साल बाद देश आजाद हो गया। आजादी के बाद देश में कई सरकारें आईं कई सरकारें गईं। इस दौरान सरकारों ने अपने-अपने स्तर पर देश के विकास के लिए काम किए।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि 2017 की 15 अगस्त को हम संकल्प दिवस के रूप में मनाए। इस 15 अगस्त को हर भारतवासी संकल्प करे कि वो अपने देश के लिए क्या करेगा। कोई नागरिक अपने परिवार के लिए, देश के लिए क्या करेगा। इसके लिए निर्णय लें। ये भारत के भविष्य के लिए निर्णायक होगा। पांच साल बाद हम देश की आजादी के 75 साल मनाएंगे। हमें संकल्प करना हैं, गरीबी, भूख, गंदगाी, सांप्रदायवाद, जातिवाद भारत छोड़ो। हमें न्यू इंडिया के लिए कुछ ना कुछ संकल्प करना है। देश को आगे ले जाना है। एक राष्ट्र के रूप में हमें कहां पहुंचना है। ये सब हमें सोचना है।

मन की बात में प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन दुनिया पर भी बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं ऑनलाइन दुनिया को आमंत्रित करता हूं कि नए भारत के निर्माण के लिए आगे आएं। नरेंद्र मोदी एप पर भी युवाओं के लिए ट्वीट इंडिया क्वीज लांच किया गया। लालकिले से 125 करोड़ देशवासियों की आवाज गूंजती हैं। मुझे खुशी है कि पिछले तीन सालों में लगातार मुझे देशभर से सुझाव मिलते हैं कि लालकिले से मुझे क्या कहना चाहिए। मुझे शिकायत मिलती है कि मेरा भाषण बहुत लंबा रहता है। इस बार में कोशिश करूंगा कि अपना भाषण कम से कम शब्दों में पूरा कर सकूं। वहीं मोदी ने सभी देशवासियों को सभी त्योहारों के लिए बधाई दी।

महिला वर्ल्डकप पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में हमारी बेटियां देश का नाम रोशन कर रही हैं। देश की बेटियों ने विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया। पिछले सप्ताह मुझे उनसे मिलने का मौका मिला। मैंने कई बार देखा है कि जब टीम हार जाती है तो भारत के लोग जमकर उन्हें कोसते हैं। लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है जब देश की बेटियां फाइनल नहीं जीत पाईं तो किसी ने उनका विरोध नहीं किया जबकि हर भारतीय इस दर्द को अपने कंधे पर ले लिया। सचमुच में हमारे देश की युवा पीढ़ी, खातौर पर हमारी बेटियां बहुत अच्छा कर रही हैं। मैं फिर कहता हूं देश को हमें आगे ले जाना है।

बता दें कि मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम 20 भाषाओं में सुनाया जाता है। लोग 1922 पर मिस कॉल करके मन की बात को अपने मोबइल पर भी सुन सकते हैं। इसके अलावा दूरदर्शन पर यह दिखाया जाता है। इसमें पीएम मोदी अपनी बात कहने के अलावा कुछ लोगों की बातों को भी शामिल करते हैं। जो कि उनको श्रोताओं ने भेजी होती हैं। मन की बात कार्यक्रम की शुरुआत 3 अक्टूबर 2014 से हुई थी। विपक्ष मन की बात कार्यक्रम पर बराबर हमला बोलता रहा है। मोदी मन की बात सुनाते हैं लेकिन किसी और के मन की बात नहीं सुनते यह कहकर ताना भी मारा जाता है।

अपने पिछले कार्यक्रम में मोदी ने 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल पर बात की थी। उसपर काफी हंगामा भी हुआ था। मोदी ने मन की बात में कहा था, ‘लोकतंत्र से प्यार करने वाला कोई भी शख्स उस काली रात को नहीं भूल सकता। कोई भी भारतीय उसको नहीं भूलेगा। लोग याद रखेंगे कि आपातकाल के खिलाफ भारतीय कैसे उठे और लोकतंत्र को बचाया। जिस तरह से लोगों को पकड़ा जा रहा था वह विपक्ष को दबाने का तरीका था।’

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