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प्रधानमंत्री ने गोरक्षकों को फिर चेताया, सर्वदलीय बैठक में दागी नेताओं और भ्रष्टाचार पर भी निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक समारोह के दौरान लोगों से तोहफे में ‘बुके की बजाए बुक’ देने की अपनी अपील पर खुद अमल करना शुरू कर दिया है।
Author नई दिल्ली | July 17, 2017 12:45 pm
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक समारोह के दौरान लोगों से तोहफे में ‘बुके की बजाए बुक’ देने की अपनी अपील पर खुद अमल करना शुरू कर दिया है। इसके तहत अब मोदी जिस किसी भी राज्य के दौरे पर जाएंगे वहां अपने स्वागत में कीमती फूलों के गुलदस्ते या अन्य तोहफे लेने से परहेज करेंगे। इस बाबत केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों से प्रधानमंत्री की इस इच्छा के अनुरूप ही उनका स्वागत करने हेतु अनुरोध किया है। इसके लिए पिछले सप्ताह गृह मंत्रालय द्वारा सभी राज्य सरकारों के मुख्य सचिव और संघ शासित क्षेत्र के प्रशासकों को भेजे पत्र में प्रधानमंत्री के स्वागत संबंधी उनके अनुरोध का पालन बाकी पेज 8 पर सुनिश्चित करने को कहा गया है। मंत्रालय द्वारा भेजे पत्र में कहा गया है कि भारत के अंदर किसी भी राज्य के दौरे पर प्रधानमंत्री के स्वागत में संबद्ध राज्य सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा उन्हें गुलदस्ता (बुके) भेंट स्वरूप न दिए जाएं। सर्वश्रेष्ठ तो यह होगा कि उन्हें पुष्पगुच्छ के बजाए महज एक फूल ही दिया जाए।’ इतना ही नहीं मंत्रालय ने राज्य सरकारों से यह भी कहा है कि स्वागत के दौरान पीएम को फूल के साथ खादी का एक रुमाल या कोई एक पुस्तक भी अगर भेंट स्वरूप दी जाती है तो इसमें कोई हर्ज नहीं होगा।

केरल में पिछले 19 जून को मोदी ने पीएन. पनिक्कर नेशनल रीडिंग डे के आयोजन की शुरुआत करते हुए लोगों से भेंट स्वरूप बुके की बजाए बुक देने का नया शिष्टाचार शुरू करने की अपील की थी। कोच्चि में हर साल एक महीने तक चलने वाले इस आयोजन में उन्होंने कहा था कि पढ़ने से बेहतर कोई दूसरा आनंददायक काम नहीं है और पढ़ने से मिले ज्ञान से बढ़कर दूसरी कोई शक्ति नहीं है। प्रधानमंत्री की अपील के बावजूद उन्हें गुलदस्ता देने की परिपाटी बंद नहीं होने के बाद गृह मंत्रालय ने राज्यों को यह निर्देश जारी किया है। मंत्रालय ने राज्य सरकारों के सभी सक्षम प्राधिकारियों से प्रधानमंत्री के स्वागत संबंधी इस निर्देश का पालन सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

राज्यों के दौरे पर मोदी अब लेंगे किताब

संसद के सोमवार से शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरक्षकों पर एक बार फटकार लगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए दागी छवि वाले नेताओं की बात उठाई। आतंकवाद पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार जम्मू कश्मीर में शांति बनाए रखने और राष्ट्रविरोधी ताकतों को जड़मूल से खत्म करने को प्रतिबद्ध है।  इस बैठक में प्रधानमंत्री ने राजनीतिक भ्रष्टाचार पर निशाना साधते हुए कहा कि हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है कि वह अपने बीच मौजूद दागी नेताओं को पहचाने, उन्हें अपने दल की राजनीतिक यात्रा से अलग करे। सार्वजनिक जीवन में भ्रष्ट नेताओं पर कार्रवाई आवश्यक है। बैठक में भ्रष्ट नेताओं के मुद्दे उठाने को बिहार में चल रही सियासी कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है। सत्ताधारी राजग इस मुद्दे को उछालकर विपक्षी गठबंधन की दरार और चौड़ी करना चाहता है। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामले और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं के खिलाफ अनियमितताओं के मामले की चल रही जांच के मद्देनजर प्रधानमंत्री का यह बयान महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। कुछ विपक्षी दल इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहे हैं।  सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कई दशकों में नेताओं की साख हमारे बीच के ही कुछ नेताओं के बर्ताव की वजह से कठघरे में है। हमें जनता को यह भरोसा दिलाना ही होगा कि हर नेता दागी नहीं, हर नेता पैसे के पीछे नहीं भागता। इसलिए सार्वजनिक जीवन में बाकी पेज 8 पर स्वच्छता के साथ ही भ्रष्ट नेताओं पर कार्रवाई भी आवश्यक है। मोदी ने कहा कि हर राजनीतिक दल की जिम्­मेदारी है कि वह अपने बीच मौजूद ऐसे नेताओं को पहचाने और उन्हें अपने दल की राजनीतिक यात्रा से अलग करता चले। कानून अगर अपना काम कर रहा है तो सियासी साजिश की बात करके बचने का रास्ता देख रहे लोगों के प्रति हमें एकजुट होकर काम करना होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिन लोगों ने देश को लूटा है, उनके साथ खड़े रह कर देश को कुछ हासिल नहीं होगा।

प्रधानमंत्री ने गोरक्षा के नाम पर कानून तोड़ने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य सरकारों को ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और सभी राजनीतिक दलों को गोरक्षा के नाम पर हो रही इस तरह की गुंडागर्दी की कड़ी भर्त्सना करनी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने बताया कि संसद सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘गोरक्षा के नाम पर कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सभी राज्य सरकारों को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।’
प्रधानमंत्री ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा कर रहे लोगों पर राज्य सरकारें सख्ती दिखाएं। गोरक्षा को कुछ असामाजिक तत्वों ने अराजकता फैलाने का माध्यम बना लिया है। इसका फायदा देश में सौहार्द बिगाड़ने में लगे लोग भी उठा रहे हैं। देश की छवि पर भी इसका असर पड़ रहा है। राज्य सरकारों को ऐसे असामाजिक तत्वों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। मोदी ने कहा कि गाय को हमारे यहां माता माना जाता है। लोगों की भावनाएं गाय से जुड़ी हुई हैं। लेकिन लोगों को यह भी याद रखना चाहिए कि गाय की रक्षा के लिए कानून है और कानून तोड़ना कोई विकल्प नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘कानून व्यवस्था को बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और जहां भी ऐसी घटनाएं हो रही है, वहां राज्य सरकारों को इनसे सख्ती से निपटना चाहिए। राज्य सरकारों को यह भी देखना चाहिए कि कहीं कुछ लोग गोरक्षा के नाम पर अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी तो नहीं निकाल रहे हैं।’

जम्मू कश्मीर में अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले की निंदा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार जम्मू -कश्मीर में शांति बनाए रखने के लिए और देश विरोधी ताकतों को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अमरनाथ यात्रियों पर आतंकवादी हमले से पूरा देश सदमे मे हैं और सरकार इस हमले के जिम्मेदार आतंकवादियों को सजा देकर ही रहेगी। मोदी ने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर में शांति बनाए रखने के लिए और देश विरोधी ताकतों को जड़ से खत्म करने के लिए हम सब पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।’प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमवार से मानसून सत्र का प्रारंभ हो रहा है। आज समय की मांग है कि समय का ज्यादा से ज्यादा सदुपयोग हो। एक-दो अपवादों को छोड़ दें तो पिछले तीन वर्षों मे लगभग हर सत्र में संसद के कामकाज के मामले में काफी बढ़ोतरी हुई है। मोदी ने कहा कि समय, संसाधन और सदन की मर्यादा का ध्यान रखते हुए सार्थक विचार-मंथन से ही हम सभी अपनी जिम्मेदारियोंको भली-भांति निभा सकते हैं। जीएसटी के लिए सभी राजनीतिक दलों का आभार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी के समय जिस तरह से सभी राजनीतिक दल एकसाथ आए, उसके लिए मैं एक बार फिर आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू हुए 15 दिन से ज्यादा हो रहे हैं और इन 15 दिनों में ही सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं। कई राज्यों के बॉर्डर से चुंगी हट चुकी है और ट्रकों की आवाजाही आसान हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य सरकारों के सहयोग से केंद्र सरकार प्रयास कर रही है कि जिन व्यापारियों ने अब भी जीएसटी के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, वे सभी जल्द से जल्द इस प्रकिया को पूरा करें।

बजट सत्र पहले बुलाने के फायदों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि पिछला बजट सत्र लगभग एक महीना पहले बुलाया गया था। सभी राजनीतिक दलों ने इसमें सहयोग किया था। मोदी ने कहा कि बजट की पूरी प्रक्रिया एक महीना पहले करने का असर यह हुआ कि मानसून से पहले ही अधिकांश विभागों के पास उनकी योजनाओं के लिए तय राशि पहुंच गई। पहले होता ये था कि विभागों तक तय योजनाओं का पैसा पहुंचने में दो-तीन महीने लग जाते थे। मानसून की वजह से और देरी होती थी। इस बार ऐसा नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कंट्रोलर जनरल आॅफ अकाउंट्स से मिले आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल अप्रैल जून के मुकाबले इस बार 30 फीसद ज्यादा राशि खर्च की गई है। आधारभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में इस बार पूंजीगत व्यय पिछले साल के मुकाबले 49 फीसद बढ़ा है। उन्होंने कहा कि योजनाओं पर पैसा खर्च करने का जो ट्रेंड सामने आ रहा है, उससे तय है कि अब पूरे साल भर एक संतुलित तरीके से योजनाओं पर तय राशि खर्च होगी, जबकि पहले मानसून खत्म होने के बाद खर्च शुरू होते थे और फिर उस पैसे को मार्च से पहले खत्म करने का दबाव बढ़ जाता था।

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