December 09, 2016

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बैन नोट जमा कराने के दौरान सरकार को शक हुआ और आपका पैसा काला धन साबित हुआ तो क्‍या हो सकती है कार्रवाई, जानिए

आयकर विभाग आपके ट्रांजैक्शन पर नजर रखेगा और जरूरी हुआ तो आपको आयकर विभाग नोटिस भेजकर पैसे का हिसाब-किताब मांग सकता है।

दिल्‍ली में बैंकों के बाहर भारी भीड़ है। किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस तैनात की गई है। (Source: Twitter)

अगर आप अपने बैंक खाते में ढाई लाख रुपये से ज्यादा नकद पैसे जमा करते हैं तो जुर्माना भरने के लिए तैयार रहिए। आयकर विभाग आपके ट्रांजैक्शन पर नजर रखेगा और जरूरी हुआ तो आपको आयकर विभाग नोटिस भेजकर पैसे का हिसाब-किताब मांग सकता है। अगर आप पर्याप्त सबूत देने में नाकाम रहे तो आयकर अधिकारी काला धन समझकर आप पर जुर्माना लगा सकते हैं। हम आपको बता रहे हैं कि आयकर अधिनियम के तहत कौन-कौन से दंड लगाए जा सकते हैं और किन प्रावधानों के तहत आप राहत पा सकते हैं।

1. आयकर अधिनियम की धारा 270A के तहत जुर्माना: आय कर अधिकारी के आंकलन कार्यवाही के दौरान अगर आप उन्हें पैसों के बारे में गलत सूचना देते हैं तो आप पर आयकर अधिनियम की धारा 270A के तहत कठोरतम कार्रवाई हो सकती है। जिस राशि के बारे में आप उपयुक्त जबाब नहीं देंगे, उतनी राशि पर 50 फीसदी टैक्स लगाया जा सकता है। अगर अधिकारी को लगता है कि आप गलत सूचना दे रहे हैं तो जुर्माने की राशि टैक्स के अलावा 200 फीसदी हो सकती है। हालांकि, अधिकांश मामलों में आयकर विभाग अधिकतम जुर्माना यानी 200 फीसदी लगाने के पक्ष में है। इसके अलावा अगर आपने आयकर विवरणी में जो आय दिखाई है और उससे ज्यादा आय आपकी है तब भी आप पर आयकर के 143(2) सेक्शन के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है।

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2.आयकर अधिनियम की धारा 271A के तहत जुर्माना: आयकर आंकलन के दौरान अगर यह पाया जाता है कि आपने खाता-बही सही तरीके से नहीं लिखा है और न ही सेक्शन 44AA के तहत 6 सालों की आमदनी और खर्च का सही-सही विवरण का रिकॉर्ड रखा है तब अधिकारी आप पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगा सकते हैं।

3.आयकर अधिनियम की धारा 271 B के तहत जुर्माना: आयकर अधिकारी आंकलन के दौरान यह पाते हैं कि आपने टैक्स ऑडिट नहीं कराया है और उसकी रिपोर्ट 3CD फॉर्म नहीं भरा है तो आयकर अधिनियम की धारा 271बी के तहत कुल बिक्री या कुल टर्न ओवर या कुल रसीदी मूल्य का 0.5 फीसदी जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि इस जुर्माने की अधिकतम राशि 50 हजार से ज्यादा नहीं हो सकती है।

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4.आयकर अधिनियम की धारा 271 C के तहत जुर्माना: आयकर अधिकारी आंकलन के दौरान अगर यह पाते हैं कि किसी नियोक्ता ने आंशिक या पूर्ण टीडीएस नहीं काटा है तो आयकर कानून के तहत उतना ही जुर्माना लगाया जाएगा जितना कि टैक्स बकाया है।

5.आयकर अधिनियम की धारा 271 CA के तहत जुर्माना: आयकर अधिकारी आंकलन के दौरान अगर यह पाते हैं कि आपने आंशिक या पूर्ण टीसीएस (टैक्स कलेक्शन एट सोर्स) नहीं काटा है तो आयकर कानून के तहत उतना ही जुर्माना लगाया जाएगा जितना कि टैक्स बकाया है।

6. नकद लोन लेने पर 271 D के तहत जुर्माना: अगर आपने किसी वित्तीय वर्ष में किसी व्यक्ति से 20 हजार से ज्यादा का कैश लोन लिया है या खाते में जमा कराया है तो आयकर कानून के तहत आप पर उतनी ही राशि का जुर्माना लगाया जा सकता है।

7. ऋण की राशि नकद भुगतान करने पर 271 E के तहत जुर्माना: अगर आपने किसी वित्तीय वर्ष में 20 हजार से ज्यादा की ऋण राशि नकद में लौटाई हो या उसका भुगतान किसी और को किया है तो उतनी ही राशि पर आयकर विभाग जुर्माना वसूल सकता है।

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8. ITR नहीं भरने पर आयकर की धारा 271 F के तहत जुर्माना: अगर आपने किसी वित्तीय वर्ष में तय समय सीमा के तहत अपनी आयकर विवरणी (ITR) आयकर विभाग को नहीं जमा कराया है तो आप पर आयकर की धारा 271F के तहत 5000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

9. टीडीएस रिटर्न नहीं फाइल करने पर धारा 271H के तहत जुर्माना: अगर आयकर अधिकारी यह पाते हैं कि आपने तय समय सीमा बीत जाने के एक साल बाद भी टीडीएस रिटर्न फाइल नहीं किया है या टीडीएस रिटर्न में कुछ गलत जानकारी दी है तो आप पर कम से कम 10 हजार रुपये और अधिकतम 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

10. पैन कार्ड नहीं होने या गलत पैन कार्ड देने पर धारा 272 B के तहत जुर्माना: अगर यह पाया जाता है कि आप ने पैन कार्ड नहीं बनवाया है या उसकी सूचना बैंक को नहीं दी है या गलत पैन कार्ड की सूचना बैंक को दी है तो आप पर आयकर कानून के तहत 10 हजार रुपये की जुर्माना लगाया जा सकता है।

11. टैन नहीं होने या गलत टैन देने पर धारा 272BB और 273BBB के तहत जुर्माना: आयकर विभाग के अधिकारी अगर यह पाते हैं कि आपने टैक्स डिडक्शन अकाउंट या टैक्स कलेक्शन अकाउंट नंबर नहीं लिया है या कहीं आपने गलत टैन नंबर दिया है तो आप पर आयकर कानून के तहत 10 हजार रुपये की जुर्माना लगाया जा सकता है।

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इतना ही नहीं, अगर आयकर विभाग ने आपको वित्तीय अनियमितताओं में संलिप्त पाया तो आपको जेल की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है। अधिकारियों के मुताबिक अगर आपने जानबूझकर आयकर विवरणी (ITR) नहीं भरी है तो आयकर की धारा 276CC के तहत 6 महीने से लेकर अधिकतम 7 साल तक की जेल हो सकती है। इसी तरह अगर किसी व्यक्ति ने जानबूझकर टैक्स अदा नहीं किया है या कम टैक्स अदा किया है तो आयकर नियमों के तहत उसे 3 महीने से लेकर 2 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। आयकर विभाग के नोटिस का जबाव नहीं देने पर भी एक साल की जेल हो सकती है।

 

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First Published on November 10, 2016 2:42 pm

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