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बेफिक्र है ये एतिहासिक डाक बंगला, कोई नहीं ले रहा सुध

पटना के ऐतिहासिक डाक बंगले में एक समय जिम कॉर्बेट और ईएम फोरस्टर जैसे दिग्गज ठहरे थे। समय के साथ पटना की यह विरासत अब खत्म होने के कगार पर है।
Author पटना | November 25, 2015 02:00 am

पटना के ऐतिहासिक डाक बंगले में एक समय जिम कॉर्बेट और ईएम फोरस्टर जैसे दिग्गज ठहरे थे। समय के साथ पटना की यह विरासत अब खत्म होने के कगार पर है। डाक बंगला चौराहा आज पटना की यातायात व्यवस्था का सबसे व्यस्त इलाका है। ऐसे में यह विश्वास ही नहीं होता कि कभी यह स्थान नीरवता से परिपूर्ण था। टाइल्स की छत वाले इस भव्य बंगले में कभी थके-हारे यात्री और सरकारी अधिकारी ठहरते थे।

पटना में जन्मे फोटोग्राफर राजीव सोनी ने कहा कि डाक बंगला भले ही बहुत पहले खत्म हो चुका हो लेकिन उसकी छाया आज भी वहां मौजूद है। राजीव अब कोलकाता में रहते हैं। जिले में कुछ साल पहले ‘पटना कैलाइडोस्कोप’ के नाम से एक प्रदर्शनी लगाने वाले सोनी ने शहर की कुछ ऐतिहासिक व दुर्लभ इमारतों की तस्वीरें दिखाईं। उसमें से कई इमारतें उस समय तक खत्म हो चुकी थीं और कई बाद में खत्म हो गईं। सोनी ने कहा कि मैं 70-80 के दशक के अपने निगेटिव देख रहा था। तभी डाक बंगला चौराहे का एक श्वेत-श्याम चित्र दिखा। मैंने उसे फेसबुक पर साझा किया। लोग इसको देखकर भावुक हो गए। कई लोगों ने कहा कि इस इमारत को हमारे इतिहास की विरासत के रूप में संजोकर रखा जाना चाहिए।

कला व शिल्प महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य अनुन्या चौबे ने कहा कि जिम कॉर्बेट ब्रिटिश राज में पटना के बाहरी इलाके मोकामा में पदस्थापित थे और इस बंगले में ठहरे थे। अपनी ऐतिहासिक कृति ‘ए पैसेज टू इंडिया’ के लिए शोध करने के दौरान ब्रिटिश लेखक फोरस्टर ने 1913 में पटना के बांकीपुर का दौरा किया था जहां 1912 में बिहार और ओड़ीश प्रांत के विभाजन के बाद नई राजधानी आकार ले रही थी। कहा जाता है कि अपने बिहार दौरे के दौरान फोरस्टर वहां और ऐतिहासिक बांकीपुर क्लब में ठहरे थे। बांकीपुर क्लब की स्थापना 1865 में हुई थी। चौबे के मुताबिक फोरस्टर की रचना में चंद्रपुर शहर व फील्डिंग कॉलेज कुछ अलग नहीं बल्कि बांकीपुर और पटना कॉलेज हैं।

पटना के इतिहास के लिए बेहद अहम माने जाने वाले बेली रोड, फ्रेजर रोड और डाक बंगला रोड एक स्थान पर मिलते हंै जो डाक बंगला चौराहे के नाम से मशहूर है। आजादी के बाद इन तीनों मार्गों के नाम बदल दिए गए थे लेकिन वे आज भी इन्हीं नामों से मशहूर हैं। डाक बंगला रोड के पास फ्रेजर रोड में एक से बढ़कर एक इमारतें और कोठी थीं। उनमें से अधिकतर का अस्तित्व अब लगभग खत्म हो चुका है। फ्रेजर रोड को फ्लीट स्ट्रीट आॅफ पटना कहा जाता था।

पटना कॉलेज में प्रोफेसर के पद से हाल में सेवानिवृत्त महाश्वेता घोष को शहर में अब अपनापन नजर नहीं आता। बैरिस्टर और इमाम बंधुओं की बनवाई गई इमारतें- हसन मंजिल (हसन इमाम), अली मंजिल (सर अली इमाम), नशेमन डाक बंगले से लगी थीं। डुमरांव रियासत काल की डुमरांव कोठी थी। प्रख्यात ग्रैंड होटल था, जहां पटना दौरे में फिल्मी सितारे ठहरते थे। आज इनमें से कुछ नहीं बचा। घोष का मानना है कि 19 से 25 नवंबर तक चलने वाला विश्व विरासत सप्ताह पटना जैसे ऐतिहासिक और अमूल्य विरासत वाले शहर के लिए मजाक के समान है। विश्व के साथ साझा करने के लिए हमारे पास बहुत कुछ था। हमने एक-एक कर सब गंवा दिया। पूर्व थलसेना उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एसके सिन्हा के दिल में पटना का आज भी विशेष स्थान है। लेकिन वह इससे दुखी हैं कि विरासत वाला शहर गगनचुंबी इमारतों से पट रहा है।

 

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