December 05, 2016

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पठानकोट हमला: NDTV पर बैन तो लगा दिया, पर उन आतंकियों के अस्तित्व पर लगा प्रश्नचिन्ह अब तक नहीं हटा सकी है सरकार

सरकार ने हिंदी न्यूज चैनल एनडीटीवी इंडिया पर पठानकोट एयरबेस की संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप में एक दिन का प्रतिबंध लगाया।

प्रतीकात्मक तस्वीर

सरकार ने हिंदी न्यूज चैनल एनडीटीवी इंडिया पर पठानकोट एयरबेस की संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप में एक दिन का प्रतिबंध लगाया लेकिन सरकार जिन आतंकियों को उससे फायदा होने की बात कर रही है फिलहाल उसकी ही जांच पूरी नहीं हुई है कि असल में वे वहां थे भी या नहीं। दरअसल, सरकार का कहना है कि 4 जनवरी 2016 को अपने लाइव शो में एनडीटीवी के पत्रकार ने कहा था कि बिल्डिंग में दो आतंकी जिंदा हैं और उनके पास ही हथियारों का डिपो भी है। सेना और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के जो जवान वहां आतंकियों से लड़ रहे थे उनका कहना था कि आतंकियों को नहीं पता था कि पास में ही हथियारों का डीपो है। ऐसे में अगर वे वहां तक पहुंच जाते तो उन्हें रोकना और पकड़ना काफी कठिन हो जाता। हालांकि, ऑपरेशन खत्म होने के बाद भी उस जली हुई बिल्डिंग में से कोई मृत शरीर बरामद नहीं किया गया जिसके वहां छिपे होने का शक था। वहां से कोई हथियार या किसी तरह की गोलियां भी नहीं मिली थीं। लेकिन उससे पहले हुए हमले में चार आतंकी जरूर मारे गए थे।

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16 मई 2016 को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में फोरेंसिक जांच में मिले अवशेषों का हवाले देते हुए कहा था कि जो दो लोग बिल्डिंग में थे वे आतंकी थे। लेकिन 21 मई को फोरेंसिक टेस्ट के हवाले से एक खबर आई थी कि रिपोर्ट में मिले सेंपल से कुछ पता नहीं लगा था और वह जलने की वजह से पूरी तरह खराब हो गए थे। रिपोर्ट में बस पुरुष के DNA सैंपल मिले थे। उससे यह नहीं पता लगा था कि वह कितने लोगों के थे। जले अवशेष से पता चला था कि उसमें कई व्यक्तियों से आनुवंशिक सामग्री शामिल थी।

वहीं एनडीटीवी की जिस रिपोर्ट को लेकर उसपर कार्रवाई हो रही है उसके जैसी ही रिपोर्ट कई न्यूज चैनल 2 जनवरी से ही दिखा रहे थे। साथ ही गूगल मैप पर भी पठानकोट एयरफोर्स बेस की ‘अच्छी और साफ’ तस्वीरें थी जिसमें उन लोकेशन को साफ देखा जा सकता था जहां पर भारतीय एयरक्राफ्ट खड़े थे। ऐसे में आतंकी जानकारी के लिए किसी न्यूज चैनल पर निर्भर हों इसके आसार कम ही लगते हैं।

 

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First Published on November 5, 2016 9:22 am

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