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ललित मोदी प्रकरण पर लोकसभा में हंगामा, नहीं हो सका प्रश्नकाल

संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन ललित मोदी प्रकरण को लेकर कांग्रेसी सदस्यों के भारी हंगामे के कारण लोकसभा में प्रश्नकाल नहीं हो सका...
संसद के मानसून सत्र में लोकसभा के पहले कामकाजी दिवस की कार्यवाही ललित मोदी प्रकरण को लेकर विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।

संसद के मानसून सत्र में लोकसभा के पहले कामकाजी दिवस की कार्यवाही ललित मोदी प्रकरण को लेकर विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों के खिलाफ अध्यक्ष द्वारा कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बावजूद हंगामा जारी रहा, जिसके चलते भोजनावकाश से पहले ही सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।

अध्यक्ष की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए कांग्रेस और वामदलों के सदस्य प्लेकार्ड लिए हुए आसन के समक्ष आ गए जिससे संकेत मिलता है कि वे विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और व्यापम मामले में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हटाए जाने की अपनी मांग पर कदम पीछे खींचने वाले नहीं हैं।
राजद और राकांपा के सदस्य भी इस मुद्दे पर सदन में कांग्रेस की मांग का समर्थन करते नजर आए।

विपक्षी सदस्यों द्वारा आसन के समक्ष दिखाए जा रहे प्लेकार्डो पर लिखा था, ‘‘ बड़े मोदी मेहरबान तो छोटे मोदी पहलवान ’’, ‘‘पीएम चुप्पी तोड़ो’’ और ‘‘मोदीजी 56इंच दिखाओ ,सुषमा , राजे को तुरंत हटाओ।’’


प्रधानमंत्री नरेन््रद मोदी इस हंगामे के समय सदन में मौजूद नहीं थे लेकिन सुषमा गृह मंत्री राजनाथ सिंह तथा परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के साथ सत्ता पक्ष की ओर अग्रिम पंक्ति में बैठी थीं।

उपाध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेसी सदस्य काली पट्टी लगाकर सदन में आए थे और अध्यक्ष की चेतावनी के बावजूद उन्होंने काली पट्टी पहने हुए और प्लेकार्ड दिखाते हुए नारेबाजी की।

सदन के वर्तमान सदस्य दिलीप सिंह भूरिया का निधन हो जाने के कारण, उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद लोकसभा की कल की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गयी थी।

अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने विपक्षी सदस्यों के इस आचरण पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि वह सदस्यों के अमर्यादित व्यवहार से बेहद चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि सदस्य सदन की कार्यवाही के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं जबकि कई बार उनसे ऐसा करने को कहा गया है।

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कार्यवाही के संचालन से जुड़े विभिन्न नियमों का हवाला देते हुए अध्यक्ष ने आक्रोशित सदस्यों को बताया कि यदि वे सदन में कोई मुद्दा उठाना चाहते हैं तो उन्हें इसके लिए उचित नोटिस देना होगा।

उन्होंने विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच कहा, ‘‘ नियम विरूद्ध व्यवहार की स्थिति में, मैं अनुशानात्मक कार्रवाई करने को बाध्य होउंगी।’’

उनकी इस चेतावनी ने आग में घी डालने का काम किया और कांग्रेस तथा वामदल सदस्य तुरंत फिर से पोस्टर, पर्चे लहराते आसन के समक्ष आ गए जबकि टीआरएस सदस्य तेलंगाना के लिए अलग से उच्च न्यायालय की मांग को लेकर आसन के आगे आए।

हंगामा शांत नहीं होने पर अध्यक्ष ने करीब साढ़े 12 बजे सदन की बैठक दोपहर बाद दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पूर्व, सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने पर भी कांग्रेस, वामदलों और टीआरएस सदस्यों ने अपने अपने मुद्दे उठाते हुए नारेबाजी की जिसके कारण सदन की बैठक कुछ ही मिनट बाद 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।

इससे पहले सदन की कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष ने कुछ स्थानों पर प्राकृतिक आपदाओं तथा देश एवं दुनिया के कुछ हिस्सों में आतंकी घटनाओं का जिक्र किया एवं सदस्यों ने कुछ पल मौन रखकर इनसे प्रभावित शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

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