January 21, 2017

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पाकिस्‍तानी कलाकारों पर बैन को लेकर बोलीं राधिका आप्‍टे- विदेशों की घड़ियां भारत आ सकती हैं, पाकिस्‍तानी क्‍यों नहीं?

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने फवाद खान और माहिरा खान जैसे पाकिस्तानी अदाकारों से भारत छोड़ने को कहा था।

Author पणजी | October 4, 2016 18:37 pm
बॉलीवुड एक्ट्रेस राधिका आप्टे।

अभिनेत्री राधिका आप्टे को नहीं लगता कि पाकिस्तानी कलाकारों को भारतीय फिल्मों में काम करने से रोका जाना चाहिए। हाल ही में आई फिल्म ‘पार्च्ड’ में अभिनय को लेकर चर्चा में बनी हुईं राधिका भी इस बहस में शामिल हो गयी हैं कि उरी आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी कलाकारों को यहां काम करने की इजाजत होनी चाहिए या नहीं। घड़ियों के प्रसिद्ध ब्रांड ‘स्वाच’ के लांच के मौके पर इस बारे में जब राधिका से पूछा गया तो उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि जब कोई स्विस घड़ी कंपनी देश में आ सकती है और अपने कॉर्पोरेट स्टोर खोल सकती है तो मेरा मानना है कि पाकिस्तानी कलाकार को भी यहां आना चाहिए और भारत में काम करना चाहिए। यही मेरी राय है।’’ उरी हमले के मद्देनजर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने फवाद खान और माहिरा खान जैसे पाकिस्तानी अदाकारों से भारत छोड़ने को कहा था और ऐसा नहीं करने पर उनकी फिल्मों की शूटिंग रोकने की धमकी दी थी। उन्होंने भारतीय फिल्म जगत में काम कर रहे पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध की मांग उठाई थी।

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इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया को लेकर बॉलीवुड बंटा हुआ है। सोमवार को बॉलीवुड के वरिष्‍ठ अभिनेता नाना पाटेकर ने कहा था कि ‘देश और जवान सबसे बड़े हैं और फिल्‍मी सितारों की हालत उनके सामने खटमल जैसी है।’ निर्माता-निर्दशक करण जौहर का कहना है कि ‘क्‍या पाकिस्‍तानी कलाकारों को वापस भेजने से समस्‍या का हल निकल जाएगा।’ करण की आने वाली फिल्‍म ‘ए दिल है मुश्किल’ में पाकिस्‍तानी कलाकार फवाद खान नजर आने वाले हैं। फिल्‍म निर्माता अनुराग कश्‍यप ने कहा है कि ‘कलाकार, कलाकार होता हैै, आतंकी नहीं।’ वरिष्‍ठ अभ‍िनेता आेम पुरी के बयान पर भारी विवाद हुआ।

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बॉलीवुड निर्माता निर्देशक महेश भट्ट का कहना है कि ”सीमा पार रहने वाले मेरे भाई-बहन आतंकवाद से सबसे ज्‍यादा ग्रस्‍त हैं, उन्‍हें आतंक के खिलाफ सख्‍त रवैया अख्तियार करना ही होगा। जब पेशावर में 131 बच्‍चों का खून बहा था तो भारत में हम रोए क्‍योंकि हमने वही महसूस किया जो वो कर रहे थे। स्‍टार्स किसी से अलग नहीं हैं, इसलिए आप उनके सामने आइना रखकर सवाल करते हैं तो आप उन पर कृपा करते हैं। मैं हाथ जोड़कर और घुटनों पर आकर फवाद (खान) और यहां आने वाले सभी कलाकारों से अपील करता हूं कि वे आगे आएं और हमारी धरती पर हुए आतंकवाद की निंदा करें। इससे रिश्‍ते बेहतर होंगे।”

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First Published on October 4, 2016 6:36 pm

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