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भाजपा की मंत्री पंकजा मुंडे पर घोटाले का कीचड़

बुधवार को भारतीय जनता पार्टी की तीसरी महिला मंत्री विवादों में घिरती नजर आई। ललित मोदी कांड में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बाद महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे विवादों में घिर गई हैं।
Author June 25, 2015 09:29 am
206 करोड़ की खरीदी में घोटाला? कांग्रेस ने घेरा पंकजा मुंडे को

बुधवार को भारतीय जनता पार्टी की तीसरी महिला मंत्री विवादों में घिरती नजर आई। ललित मोदी कांड में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बाद महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे विवादों में घिर गई हैं।

पंकजा मुंडे पर आरोप है कि उन्होंने नियमों की अनदेखी कर अपने विभाग के लिए एक ही दिन में 206 करोड़ रुपए की खरीद कर डाली। विपक्ष ने इसे घोटाला बताते हुए पंकजा मुंडे के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत दर्ज की है। सूबे के मुख्य विपक्षी दल ने इस अनियमितता को फडणवीस सरकार का पहला घोटाला बताते हुए सीबीआइ जांच की मांग की है।

पंकजा विदेश में हैं और इन आरोपों का खंडन कर चुकी हैं। उनका कहना है कि खरीदारी में किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है। अधिकृत दर उपलब्ध होने के कारण ई निविदा जारी करने की जरूरत नहीं थी और सभी ठेके मान्यताप्राप्त संस्थाओं को दिए गए।

पंकजा मुंडे ने राज्य सरकार के नियमों को हाशिये पर पटकते हुए एक ही दिन में 24 अध्यादेश निकाल कर अपने विभाग के लिए 206 करोड़ रुपए की खरीदारी की। सरकार ने नियम बनाया है कि तीन लाख रुपए से ऊपर की खरीदारी के लिए ई निविदा जारी करना जरूरी है। मगर खरीदारी में इस नियम की उपेक्षा की गई है।


महिला और बाल विकास मंत्री मुंडे ने आदिवासी बच्चों के सरकारी स्कूलों के लिए किताबें और कापियां, बच्चों के स्वास्थ्य पर नजर रखने के यंत्र, बच्चों के नाश्ते के लिए चिक्की, चटाई, डिशें, दवाइयों के किट, वाटर फिल्टर जैसी चीजें खरीदी हैं। विपक्ष का आरोप है कि मुंडे ने नियमों को धता बता कर काली सूची में डाल दिए लोगों को ठेके दिए। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि पहली नजर में यह घोटाला नजर आता है और इसकी सीबीआइ से जांच करवाई जानी चाहिए। कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से की है।

मुंडे पर आरोप है कि उन्होंने जगतगुरू कंपनी से पांच करोड़ 60 लाख रुपए की किताबें और कापियां खरीदीं, मगर कंपनी के बजाय भुगतान व्यक्तिगत तौर पर भानुदास टेकवडे को किया। नाशिक की एवरेस्ट कंपनी से खरीदे वॉटर फिल्टर की कीमत 4500 रुपए से बढ़ा कर 5200 रुपए कर दी गई।

बच्चों में कुपोषण की जांच करने के यंत्रों के लिए साई हाईटेक और नीतिराज नामक उत्तर महाराष्ट्र की दो कंपनियों को 24 करोड़ रुपए का ठेका बिना निविदा जारी किए दिया गया। दवाइयों की किट के लिए 500 रुपए स्वीकृत होते हुए भी 720 रुपए दिए गए। नियमों के अनुकूल खरीद रखने के लिए किट की दवाइयां कम कर दी गईं।

बच्चों के नाश्ते की चिक्की के लिए सूर्यकांता सहकारी महिला संस्था ने 37 करोड़ रुपए का ठेका मांगा था, जिसे 80 करोड़ रुपए का ठेका दे दिया गया। केंद्रीय खरीदारी आयुक्त राधिका रस्तोगी ने इसके लिए ई निविदा जारी करने का फैसला लिया था। मगर पंकजा मुंडे ने इसमें हस्तक्षेप किया। खरीदी गई चिक्की की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि यह घोटाला आदिवासी बच्चों में बांटी गई घटिया चिक्की के कारण ही सामने आया।

नगर जिला परिषद की अध्यक्ष मंजूश्री गुंड ने 15 जून को महिला और बाल विकास मंत्रालय को पत्र लिख कर शिकायत की थी कि बच्चों को नाश्ते में जो चिक्की दी जा रही है, उसमें मिट्टी मिली हुई है। यह चिक्की खाने लायक नहीं है, इसलिए विभाग जरूरी कार्रवाई करे। इसके बाद जांच के आदेश जारी किए गए और सारा घोटाला सामने आया।

13 फरवरी, 2015 को एक ही दिन में 24 अध्यादेशों के जरिये यह विभागीय खरीदारी की गई है, जिसमें करोड़ों रुपए की निविदा जारी की गई मगर नियमों को धता बता कर ई निविदाएं जारी नहीं की गई हैं। अभी तक फडणवीस सरकार के किसी भी मंत्री ने विभागीय खरीदारी के लिए एक ही दिन में इतने अध्यादेश नहीं निकाले हैं इसलिए मुंडे के इस निर्णय को संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है।

खुद को जनता के दिलों की मुख्यमंत्री कहने वाली और दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे इस समय विदेश में हैं और दो जुलाई को लौटेंगी। उनके बचाव का काम इस समय शिव सेना कर रही है, जिससे पंकजा के घनिष्ठ रिश्ते रहे हैं। उद्धव ठाकरे पंकजा को बहन मानते हैं और उनके खिलाफ बीते साल हुए विधानसभा चुनाव में शिव सेना ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। विधान सभा चुनाव नतीजों के बाद जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में मुख्यमंत्री पद के लिए नाम चले थे, तो शिव सेना ने पंकजा मुंडे का नाम आगे किया था। शिव सेना नेताओं का कहना है कि मीडिया पंकजा के स्पष्टीकरण का इंतजार करे।

मंत्री बनने के बाद यह दूसरा मौका है जब पंकजा मुंडे के फैसले की आलोचना की जा रही है। इससे पहले इसी साल फरवरी में पंकजा ने जिला परिषद की योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने के लिए दो दिवसीय चर्चा सत्र सरकारी अतिथि गृह के बजाय पांच सितारा होटल में रखा था। वह भी तब जब मुख्यमंत्री फडणवीस ने खजाना खाली होने का बयान जारी करते हुए कई योजनाओं में कटौती शुरू कर दी थी। इस सत्र की यह कहकर आलोचना की गई कि गांव की समस्याओं पर मुंडे पांच सितारा होटल में चरचा कर रही हैं।

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