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ओवरलोडेड हैं भारत की 40% से ज्‍यादा पटरियां, सिर्फ 15 मिनट में दिल्‍ली-कानपुर की लाइन चेक कर लेता है रेलवे

भारत में सड़क परिवहन की तुलना में रेलवे के निवेश में लगातार गिरावट आ रही है।
भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में 7 मार्च को हुए विस्फोट को बाद की तस्वीर। (Source: ANI)

भारत के 40% से ज्यादा रेलवे ट्रैकों पर क्षमता से ज्यादा बोझ पड़ रहा है। 1,219 ट्रैक पर उसकी क्षमता से 90% वजन आ रहा है। यह हालात भारतीय रेलवे को असुरक्षित बना रहे हैं। फर्स्‍टपोस्‍ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते 15 सालों में पैसेंजर्स ट्रेनों की संख्या में 56% इजाफा हुआ है। 2000-01 के दौरान इनकी संख्या 8,520 थी, जबकि 2015-16 तक आते-आते पटरियों पर रोजाना 13,313 पैसेंजर्स ट्रेनें दौड़ने लगीं। इसी दौरान मालगाड़ियों की संख्या में भी 59% बढ़ोत्तरी देखने को मिली। 1950-2016 के दौरान 23% रेल रूट्स में 1,344% तक का इजाफा हुआ। ऐसे में इस बात पर भी गौर करना होगा कि दिल्ली-कानुपर के बीच रेल लाइन की जांच स्टाफ महज 13 मिनट ही कर लेता है। आजादी के बाद से आज तक 15 हजार किलोमीटर रेल ट्रैक के दोहरीकरण एवं तिहरीकरण का कार्य किया जा चुका है।

बीते वर्षों में कई बड़े रेल हादसे हो चुके हैं. इनका मुख्य कारण ट्रेन में भारी भीड़ और पटरी की ठीक से जांच ना करना है। आइए नजर डालते हैं कुछ ऐसे ही हादसों पर…

– 21 जनवरी 2017 को इंजन समेत जगदलपुर-भुवनेश्वर एक्सप्रेस की 9 बोगी पटरी से उतर गई. इसमें 39 यात्री मारे गए, जबकि 60 से ज्यादा लोग घायल हुए।

– बीते साल 20 नवंबर को हुए इंदौर-पटना रेल हादसे की मुख्य वजह भी पटरी की ठीक से जांच ना करना ही थी। इसके चलते 149 लोगों की जान चली गई. वहीं 182 यात्री घायल हुए।

– 14 फरवरी 2009 को रेल बजट के दिन हावड़ा से चेन्नई जा रही कोरोमंडल एक्सप्रेस के 14 डिब्बे ओडिशा में जाजपुर रेलवे स्टेशन के पास पटरी से उतरे। हादसे में 16 लोगों ने जान गंवाई जबकि 50 घायल हुए।

– 28 मई 2010 को पश्चिम बंगाल में ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस पटरी से उतरी। इस हादसे में 170 लोगों की मौत हुई।

– 4 मई 2014 को दिवा सावंतवादी पैसेंजर ट्रेन नागोठाने और रोहा स्टेशन के बीच पटरी से उतरी। 20 लोगों की मौत और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

8.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य:

हालांकि रेल मंत्री सुरेश प्रभु का कहना है कि इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने पांच वर्षों में 8.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य बनाया और वह पिछले ढाई सालों में 3.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की ओर बढ़ा रहे हैं। आने वाले समय में इसका परिणाम दिखने लगेगा।

रेलवे पर भारत से दोगुना खर्चता है चीन:

बता दें कि भारत में सड़क परिवहन की तुलना में रेलवे के निवेश में लगातार गिरावट आ रही है। अगर चीन से तुलना करें तो उसने अपनी रेलों के लिए हमसे 2 गुना अधिक निवेश बढ़ाया है। ऐसे में भारत को भी इस दिशा में यात्रियों की सुरक्षा का ख्याल रखते हुए जल्द बेहतर कदम उठाने चाहिए।

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