December 03, 2016

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कांग्रेस समेत आठ पार्टियों के नेता मिले, सरकार पर वार के लिए विपक्ष तैयार

संसद सत्र नजदीक है, कुछ पार्टियों ने इस मुद्दे पर कार्य स्थगन प्रस्ताव और चर्चा के नोटिस दिए हैं।

Author नई दिल्ली | November 15, 2016 02:06 am
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी किए गए 500 रुपए के नए नोट। (Photo: PTI)

बड़े नोटों को अमान्य कर दिए जाने की औचक घोषणा से पैदा हुए नकदी संकट और लोगों को हो रही असुविधा को विपक्षी पार्टियां हथियार बनाने की तैयारी में हैं। इस मुद्दे के जरिए विपक्षी एकजुटता की कोशिश शुरू कर दी गई है। सोमवार को कांग्रेस समेत आठ विपक्षी पार्टियों के नेता मिले और 16 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा की। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी समेत छह अन्य विपक्षी दलों को भी साथ लेने की कोशिश की जा रही है। सोमवार की बैठक में तीनों पार्टिंयों से कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ। मंगलवार को विपक्षी दलों की दोबारा बैठक होनी है, जिसमें आगामी रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के संसद भवन स्थित कक्ष में तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद), जनता दल (एकी), भाकपा, माकपा, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और वाईएसआर कांग्रेस के नेता मिले और इस बात पर चर्चा की कि एकजुट होकर सरकार को कैसे घेरा जाए। इस बैठक में चिरप्रतिद्वंद्वी तृणमूल कांग्रेस और माकपा मोदी सरकार के खिलाफ एक मंच पर नजर आए। बैठक में जद (एकी) नेता शरद यादव, माकपा नेता सीताराम येचुरी, तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय और डेरेक ओ ब्रायन, भाकपा के डी राजा, राजद के प्रेम चंद गुप्ता, झामुमो के सुशील  कुमार और वाईएसआर कांग्रेस के एम. राजामोहन रेड्डी भी शामिल थे। कांग्रेस नेता आजाद के अलावा लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता आनंद शर्मा भी इस बैठक में शामिल थे।

नोटों को प्रतिबंधित करने के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और आम आदमी पार्टी (आप) ने सरकार की तीखी आलोचना की है, लेकिन इनके नेताओं ने इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया। द्रमुक, अन्नाद्रमुक और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेताओं ने भी इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया। इन सभी दलों को साथ लेने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा के अनुसार, इन पार्टियों में से कुछ के नेता बैठक में इसलिए शामिल नहीं हो सके, क्योंकि वे दिल्ली में नहीं थे। सभी पार्टियां एकजुट विपक्ष का हिस्सा हैं।

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी और अन्य विपक्षी नेताओं से बातचीत कर सरकार के खिलाफ एकजुट होने का विचार रखा था। कांग्रेस नेताओं ने भी संसद के शीतकालीन सत्र से पूर्व संयुक्त रणनीति बनाने के लिए तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों से संपर्क किया था। इस कवायद में तृणमूल कांग्रेस और माकपा साथ हो रहे हैं, जो बंगाल की राजनीति में एक-दूसरे को फूटी आंखों नहीं सुहाते। उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा-बसपा की यही स्थिति है। कांग्रेस इस मुद्दे पर सपा और बसपा को एक साथ लेने की कोशिश में है।

क्या एकजुट होने के लिए ये पार्टियां अपनी राजनीति के अंदाज को बदलेंगी? फिलहाल, सभी सावधानी से प्रतिक्रिया दे रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस को साथ लेने के बारे में माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि हम सदन में तृणमूल कांग्रेस का रुख देखना चाहेंगे, क्योंकि सारदा चिटफंड घोटाले और नारद सीडी कांड के मामलों में सीबीआइ जांच में खास प्रगति नहीं हुई है। तृणमूल अध्यक्ष ममता बनर्जी के उनसे टेलीफोन पर बात करने के बाबत येचुरी ने कहा, ‘उन्होंने मुझे फोन करके कहा कि लोगों को इस फैसले की वजह से कठिनाई हो रही है, यह गलत है और हमें इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। मैंने उनसे कहा कि संसद सत्र नजदीक है, कुछ पार्टियों ने इस मुद्दे पर कार्य स्थगन प्रस्ताव और चर्चा के नोटिस दिए हैं।’ बंगाल के विधानसभा चुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ लगाए गए अपनी पार्टी के आरोपों को दोहराते हुए उन्होंने कहा, ‘दीदी भाई और मोदी भाई में मैच-फिक्सिंग है।’ उन्होंने कहा, ‘सारदा, नारद घोटाले के मामले सीबीआई के सामने लंबित हैं। इसमें कोई प्रगति क्यों नहीं हुई? जो भी हो, सदन में साफ होगा।’ जाहिर है, नोटों को प्रतिबंधित करने के मुद्दे पर एकजुटता दिखा रहे विपक्षी दलों में रणनीतिक तालमेल कितना बन पाएगा, इसको लेकर सवाल बना हुआ है।

 

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First Published on November 15, 2016 2:06 am

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