ताज़ा खबर
 

जीवित भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को दे दी गई श्रद्धांजलि, घोषित किया गया अवकाश

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी फिलहाल भले ही खबरों में चर्चा का विषय न हों लेकिन आज वे समाचारों आए तो ऐसे कि उन्हें श्रद्धांजलि दे दी गयी।
Author नई दिल्ली | September 14, 2015 16:16 pm
जीवित अटल बिहारी वाजपेयी को दे दी गई श्रद्धांजलि, घोषित किया गया अवकाश

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी फिलहाल भले ही खबरों में चर्चा का विषय न हों लेकिन आज वे समाचारों आए तो ऐसे कि उन्हें श्रद्धांजलि दे दी गयी। जी हां ओड़ीसा के एक सराकरी स्कूल ने पूर्व प्रधानमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके सम्मान में एक दिन के लिए छुट्टी की घोषणा भी कर दी। घटना बीते शुक्रवार की बताई जा रही है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, उड़ीसा के बालासोर जिले में अवस्थित एक प्राइमरी स्कूल के प्राचार्य कमलकांत दास ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की खबर दी।

वाजपेयी जी बीते कुछ सालों से बीमार चल रहे हैं और बहुत कम सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आते हैं। हालांकि, उनके निधन की खबर झूठी थी और वे पूर्णतः स्वस्थ व जीवित हैं।

बताया जा रहा है कि दास एक अन्य स्कूल में टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए गए हुए थे, जहां उन्हें साथी शिक्षक ने यह गलत खबर दी। इसके बाद प्राचार्य के निर्देश के तहत छात्रों व शिक्षकों ने स्कूल में वाजपेयी जी की याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया और उन्हें आदरांजलि दी। इसके बाद स्कूल की छुट्टी कर दी गई।

मामला सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों ने जिला कलेक्टर के पास इसकी शिकायत की। जिला कलेक्टर सनातन मल्लिक ने बताया कि स्कूल प्राचार्य दास को निलंबित कर दिया गया है और जरूरत हुई तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला भी चलाया जाएगा। गौर करने वाली बात यह भी कि एक स्कूल का प्रिंसिपल इतनी बड़ी गलती आखिर कैसे कर सकता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. देवराज
    Sep 14, 2015 at 11:53 pm
    जनसत्ता का समाचार विश्लेषण और इसमें प्रकाशित टिप्पणियाँ पढ़ कर महसूस होता है कि तानाशाही और फासीवाद प्रेरित समूहों तथा जन-विरोधी ताक़तों के विरुद्ध प्रतिरोध का स्वर कमजोर नहीं हुआ है| मैं इस अखबार के प्रकाशन के पहले दिन से ही इसका पाठक रहा हूँ, मणिपुर में रहते हुए भी इसे पच्चीस साल तक पढ़ता रहा| लेकिन वर्धा में जनसत्ता पढने को नहीं मिलता| बहुत अफसोस होता है| रात को लौट कर नेट पर पढ़ता हूँ, थोड़ी भूख शांत होती है| प्रभाष जी से तो परिचय था, लेकिन वर्त्तमान संपादक जी से कोई पहचान नहीं है| किससे कहूँ!
    (0)(0)
    Reply