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ओड़ीशा-2015: सूखे और मुखर विपक्ष से परेशान रही पटनायक सरकार

ओड़ीशा में नवीन पटनायक की बीजद सरकार के लिए 2015 का साल थोड़ा मुश्किलों भरा रहा, क्योंकि पूरे साल सरकार मुखर विपक्ष के लगातार हमलों के साथ ही सूखे, किसानों की आत्महत्या और भुखमरी से हुई संदिग्ध मौत जैसे मुद्दों से जूझती रही..
Author भुवनेश्वर | December 21, 2015 23:59 pm
ओड़ीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक। (फाइल फोटो)

ओड़ीशा में नवीन पटनायक की बीजद सरकार के लिए 2015 का साल थोड़ा मुश्किलों भरा रहा, क्योंकि पूरे साल सरकार मुखर विपक्ष के लगातार हमलों के साथ ही सूखे, किसानों की आत्महत्या और भुखमरी से हुई संदिग्ध मौत जैसे मुद्दों से जूझती रही। बीजू जनता दल (बीजद) शासन को भगवान जगन्नाथ के नवकलेवर महोत्सव की असफलता, कटक के शिशु भवन में एक पखवाड़े में 60 से अधिक नवजात की मौत और बिजली संकट जैसे मुद्दों को लेकर भी आलोचना झेलनी पड़ी। बहरहाल, सरकार इन सभी मुद्दों से अच्छी तरह निपटने का दावा करती रही।

राज्य के 30 में से 26 जिले सूखा प्रभावित हैं और फसल की कथित बर्बादी और कर्ज के बोझ के कारण करीब 140 किसानों ने खुदकुशी की। विपक्ष ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि अगर सरकार ने अपने वादे पूरे किए होते और आपात योजना बनाई होती तो इस तरह की परिस्थितियों को रोका जा सकता था। दिग्गज कांग्रेसी नेता और विपक्ष के नेता नरसिंह मिश्रा का कहना है कि बीजद सरकार ने 2006 में पांच साल के अंदर राज्य के हर ब्लॉक में 35 फीसद सिंचाई तय करने का वादा किया था। फिर 2008 में उन्होंने हर गांव की 35 फीसद जमीन की सिंचाई की व्यवस्था करने का वादा किया था। ये वादे अब तक पूरे नहीं हुए।

राज्य भाजपा प्रमुख केवी सिंह देव ने भी पटनायक पर खराब सिंचाई सुविधा का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार के उदासीन, गैरजिम्मेदार और असंवेदनशील रवैए के कारण ही किसान समुदाय की हालत दयनीय है। उल्लेखनीय है कि पटनायक के पास ही जल संसाधन का विभाग है।

राज्य सरकार ने दावा किया कि किसान फसल नुकसान और कर्ज के बोझ के कारण आत्महत्या नहीं कर रहे, बल्कि पारिवारिक समस्याओं सहित किन्हीं और कारणों से ऐसा कर रहे हैं। राज्य सरकार ने राज्य के 314 में सूखाग्रस्त 215 ब्लॉक की खरीफ फसल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए राहत उपाय के तहत 2,199 करोड़ रुपए की केंद्रीय मदद के लिए दो अंतरिम ज्ञापन पेश किया है। पटनायक पर किसानों की दयनीय हालत के प्रति असंवेदनशील रवैया बनाए रखने और किसी भी मृतक के परिवार से मुलाकात नहीं करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सितंबर में बारगढ़ जिला में ‘किसान बचाओ मार्च’ का नेतृत्व किया और आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की।

अक्तूबर में सूखा राहत पैकेज की राज्य सरकार की घोषणा के बावजूद किसानों के आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ने का दावा करते हुए विपक्ष ने बीजद सरकार से किसानों के मुद्दे से निपटने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने और इस मुद्दे पर श्वेत पत्र लाने, कृषि कर्ज की माफी, प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ 20 लाख रुपए और मृतक किसानों के परिवारों को 10-10 लाख रुपए की मदद मुहैया कराने को कहा।

इसके अलावा उन्होंने सात दिसंबर को बोलनगीर जिले में गुटुपल्ली गांव में कथित भुखमरी से एक महिला की मौत की खबर सामने आने पर भी चिंता जाहिर की। इन मुद्दों के अलावा, अपने-अपने इलाकों में फसल नुकसान और कर्ज के कारण किसानों की खुदकुशी की घटनाओं को लेकर सत्ताधारी पार्टी के कई नेताओं के खुलकर सामने आने पर राज्य सरकार को शर्मिंदगी भी झेलनी पड़ी। इन सभी के विचार राज्य सरकार के दावों से बिल्कुल मेल नहीं खाते थे।

राज्य में नवकलेवर महोत्सव के दौरान राज्य में कई विवाद हुए। नवकलेवर महोत्सव के दौरान प्रसिद्ध पुरी मंदिर के ईष्ट देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को बदला जाता है जिसकी रस्म अदायगी में गड़बड़ी के आरोप लगे। इस बीच जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ने और जल विद्युत उत्पादन में सुधार से बिजली कटौती की समस्या से जूझ रहे ओड़ीशा के लोगों को राहत मिली। अगस्त-सितंबर में दो हफ्ते के भीतर कटक में स्थित ‘शिशु भवन’ नामक एक प्रमुख बाल चिकित्सा अस्पताल में 60 से अधिक नवजात शिशुओं की मौत भी राज्य के लिए एक मुद्दा रहा।

देरी से की गई कार्रवाई में ‘शिशु भवन’ के नाम से मशहूर राज्य सरकार की ‘सरदार वल्लभ भाई पटेल पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ पेडियाट्रिक्स’ में हादसे को लेकर जिम्मेदार छह कर्मियों को निलंबित कर दिया गया। इस्पात के क्षेत्र को नई ऊंचाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल में राउरकेला इस्पात संयंत्र का 12,000 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित 45 लाख टन वजनी द्वितीय आधुनिकीकरण परियोजना देश को समर्पित किया।

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