ताज़ा खबर
 

बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने कहा- प्राइवेट प्‍लेस में अश्‍लील हरकत करना अपराध नहीं

बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने कहा, ''प्राइवेट प्‍लेस में अश्‍लील हरकत करना या इसे देखना आईपीसी की धारा 294 के तहत नहीं आता।
Author March 20, 2016 11:46 am
हाईकोर्ट ने कहा कि निजी जगह पर इस तरह की कृत्‍य आईपीसी के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आता।

बॉम्‍बे हाई कोर्ट ने उन 13 लोगों के खिलाफ केस खारिज कर दिए, जिन पर एक फ्लैट में महिलाओं के साथ अश्‍लील हरकत करने के आरोप थे। हाईकोर्ट ने कहा कि निजी जगह पर इस तरह की कृत्‍य आईपीसी के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आता।

जस्‍ट‍िस एनएच पाटिल और एएम बदर की बेंच उस याचिका पर सुनवाई की गई थी, जिसमें इन लोगों पर से आईपीसी की धारा 294 के तहत दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी। याचिका आरोपियों में से ही एक की ओर से दायर की गई थी। आईपीसी की धारा 294 का मतलब है कि पब्‍ल‍िक प्‍लेस में अश्‍लील हरकत करना या पब्‍लि‍क प्‍लेस में अश्‍लील गाना या शब्‍द बोलना जिससे दूसरों को दिक्‍कत हो।

पुलिस का आरोप है कि 12 दिसंबर 2015 को उन्‍हें एक जर्नलिस्‍ट ने शिकायत की कि बगल के फ्लैट से काफी तेज संगीत की आवाज आ रही थी। जर्नलिस्‍ट के मुताबिक, घर के अंदर कम कपड़ों में महिलाओं नाच रही थीं और कुछ लोग उन पर रुपए लुटा रहे थे। इस शिकायत पर पुलिस ने उस फ्लैट पर छापा मारा। वहां उसे कम कपड़ों में छह महिलाएं मिलीं। इसके अलावा, 13 लोग नशे की हालत में मिले। सभी लोगों को कस्‍टडी में ले लिया गया। उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर दी गई।

याचिकाकर्ता के एडवोकेट राजेंद्र शिरोडकर ने दलील दी कि फ्लैट को पब्‍लि‍क प्‍लेस नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इस दलील को माना। कोर्ट ने कहा, ”प्राइवेट प्‍लेस में अश्‍लील हरकत करना या इसे देखना आईपीसी की धारा 294 के तहत नहीं आता। फ्लैट किसी प्राइवेट व्‍यक्‍त‍ि के जरिए प्राइवेट इस्‍तेमाल के लिए है। उसे पब्‍ल‍िक प्‍लेस नहीं कहा जा सकता। धारा 294 उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए है जो पब्‍ल‍िक प्‍लेस पर अश्‍लील कृत्‍य में शामिल होते हैं और दूसरों के लिए परेशानी का सबब बनते हैं।”

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग