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बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-5’ का परीक्षण सफल

देश की सामरिक मारक क्षमता को और धार देते हुए भारत ने आज ओडिशा के तट से अपने सर्वाधिक सक्षम प्रक्षेपास्त्र अग्नि पांच का पहला कैनिस्टर आधारित परीक्षण सफलतापूर्वक किया। अग्नि पांच की मारक क्षमता 5000 किमी है और यह एक टन से अधिक परमाणु आयुध ले जा सकता है। यह प्रक्षेपास्त्र व्हीलर द्वीप पर […]
Author January 31, 2015 15:04 pm
अग्नि मिसाइल (पीटीआई फाइल फोटो)

देश की सामरिक मारक क्षमता को और धार देते हुए भारत ने आज ओडिशा के तट से अपने सर्वाधिक सक्षम प्रक्षेपास्त्र अग्नि पांच का पहला कैनिस्टर आधारित परीक्षण सफलतापूर्वक किया। अग्नि पांच की मारक क्षमता 5000 किमी है और यह एक टन से अधिक परमाणु आयुध ले जा सकता है। यह प्रक्षेपास्त्र व्हीलर द्वीप पर एक सचल प्रक्षेपक पर बनाए गए एक कैनिस्टर से प्रक्षेपित किया गया।

आईटीआर के निदेशक एम वी के वी प्रसाद ने पीटीआई-भाषा को बताया कि तीन चरण वाले ठोस प्रणोदक प्रक्षेपास्त्र को करीब 8 बज कर 6 मिनट पर एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) के प्रक्षेपक परिसर 4 से एक सचल प्रक्षेपक द्वारा प्रायोगिक तौर पर दागा गया।

आईटीआर पर मौजूद एक वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक ने बताया ‘‘कैनिस्टर के नीचे लगे एक गैस जनरेटर ने 17.5 मीटर लंबे, 50 टन वजन वाले अग्नि पांच को कैनिस्टर से बाहर धकेला। 5000 किमी से अधिक दूर स्थित लक्ष्य पर निशाना लगाने में सक्षम इस प्रक्षेपास्त्र के साथ आज के परीक्षण में एक डमी पेलोड भी था।’’

प्रक्षेपास्त्र संस्करण अच्छी तरह सील कर रखे गए एक कैनिस्टर में संग्रहित किया गया और इसी से प्रक्षेपित किया गया। स्टील का कंटेनर उच्च गुणवत्ता वाले स्टील से बनाया गया था। रक्षा विश्लेषकों ने बताया कि कैनिस्टर की वजह से इस प्रक्षेपास्त्र को सड़क या रेल के जरिये ले जाया जा सकेगा। साथ ही इससे देश की सामरिक मारक क्षमता को गोपनीयता और लचीलापन भी मिलेगा।

एक अन्य प्रक्षेपास्त्र शोधार्थी आर के कर ने बताया ‘‘हम प्रक्षेपास्त्र को कहीं भी ले जा सकते हैं और वहां से दाग सकते हैं। इससे फायदा होगा। इसके अलावा, कैनिस्टर प्रक्षेपास्त्र को समुचित माहौल में रख सकता है।’’

प्रसाद ने कहा कि अग्नि पांच प्रक्षेपास्त्र का कैनिस्टर संस्करण सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। प्रसाद ने बताया ‘‘प्रक्षेपास्त्र त्रुटिरहित तरीके से स्वत:प्रक्षेपित हुआ और विस्तृत परिणाम की जानकारी विभिन्न रडारों एवं नेटवर्क प्रणालियों से सभी आंकड़े मिलने के बाद प्राप्त हो सकेगी।’’

आज का प्रक्षेपण लंबी दूरी के इस प्रक्षेपास्त्र का तीसरा विकासात्मक परीक्षण था। इसका पहला परीक्षण 19 अप्रैल 2012 को और दूसरा परीक्षण 15 सितंबर 2013 को इसी स्थान से किया गया था। स्वदेश में विकसित सतह से सतह पर मार करने वाला अग्नि पांच प्रक्षेपास्त्र 5000 किमी से अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम है। इस प्रक्षेपास्त्र की लंबाई करीब 17 मीटर, चौड़ाई दो मीटर और प्रक्षेपण के समय वजन करीब 50 टन है। यह प्रक्षेपास्त्र एक टन से अधिक परमाणु आयुध ले जा सकता है।

प्रसाद ने बताया कि अग्नि श्रृंखला के अन्य प्रक्षेपास्त्रों के विपरीत अग्नि पांच ज्यादा आधुनिक है क्योंकि इसे नौवहन, दिशानिर्देश, आयुध और इंजन के संदर्भ में कुछ नवीनतम प्रौद्योगिकियों से लैस किया गया है। उन्होंने बताया ‘‘स्वदेश में विकसित कई नयी प्रौद्योगिकियों का अग्नि पांच के पहले संस्करण में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। उच्च शुद्धता वाले रिंग लेजर गायरो आधारित इनर्शियल नैवीगेशन सिस्टम (आरआईएनएस) और अत्याधुनिक तथा सटीक माइक्रो नैवीगेशन सिस्टम (एमआईएनएस) ने यह सुनिश्चित किया कि प्रक्षेपास्त्र लक्षित बिंदु तक पूरी सटीकता से पहुंचे।’’

एक अधिकारी ने बताया ‘‘हाई स्पीड ऑन बोर्ड कंप्यूटर और फाल्ट टॉलरेन्ट सॉफ्टवेयर प्रक्षेपास्त्र को त्रुटिरहित तरीके से आगे बढ़ने में मदद करते हैं।

भारत के पास वर्तमान में अग्नि श्रृंखला के तहत 700 किलोमीटर मारक क्षमता वाला अग्नि-एक, 2000 किलोमीटर रेंज का अग्नि-दो और 2500 किलोमीटर एवं 3500 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाले अग्नि 3 और अग्नि 4 प्रक्षेपास्त्र हैं। कुछ और परीक्षणों के बाद अग्नि-5 को सेवा में शामिल कर लिया जाएगा।

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