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चीन से तनातनी खत्‍म करवाने अपना दूत भेजेंगे पीएम नरेंद्र मोदी, एनएसए अजित डोवाल करेंगे दौरा

पिछले हफ्ते जर्मनी के हैम्बर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन से हटकर ब्रिक्स देशों के प्रमुखों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल। (फाइल फोटो)

पिछले दे हफ्ते से सिक्किम के डोकलाम पठार को लेकर भारत और चीन के बीच तनातनी चल रही है। चीन इस मसले पर जहां सख्त रुख अपनाए हुए है, वहीं भारत की तरफ से नपे-तुले अंदाज में कूटनीतिक प्रतिक्रिया सामने आ रही है। गुरुवार (13 जुलाई) को भारत की तरफ से कहा गया कि मामले के देखने और हल करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं। हालांकि, भारतीय सैनिक भी तंबू गाड़कर वहां डटे हुए हैं। इस बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 26-27 जुलाई को चीन दौरे पर जा रहे हैं।

ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में हिस्सा लेने के अलावा डोभाल चीनी समकक्ष यांग जिशी से सिक्किम विवाद पर भी बातचीत कर सकते हैं। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि चीनी समकक्ष से बातचीत के बाद सिक्किम सीमा विवाद पर दो हफ्तों से जारी तनातनी खत्म हो सकती है। डोभाल और जिशी दोनों ही अपने-अपने देश की तरफ से सीमा विवाद पर बातचीत करने और हल निकालने के लिए नामित किए गए हैं।

बता दें कि पिछले हफ्ते जर्मनी के हैम्बर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन से हटकर ब्रिक्स देशों के प्रमुखों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई थी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच मौजूदा सीमा विवाद पर भी चर्चा की गई। नई दिल्ली की ओर से इसकी पुष्टि की गई थी लेकिन चीनी सरकार ने इसका खंडन करते हुए कहा था कि दोनों देशों के नेताओं के बीच कोई आधिकारिक बैठक नहीं हुई है।

विवाद की जड़ क्या है?
बता दें कि भारत-चीन के बीच कुल 3500 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है। इन दोनों देशों के बीच सीमा विवाद की वजह से 1962 में युद्ध हो चुका है। बावजूद इसके सीमा विवाद नहीं सुलझ सका। यही वजह है कि अलग-अलग हिस्सों में अक्सर भारत-चीन के बीच सीमा विवाद उठता रहा है। मौजूदा सीमा विवाद भारत-भूटान और चीन सीमा के मिलान बिन्दु से जुड़ा हुआ है। सिक्किम में भारतीय सीमा से सटे डोकलाम पठार है, जहां चीन सड़क निर्माण कराने पर आमादा है। भारतीय सैनिकों ने पिछले दिनों चीन की इस कोशिश का विरोध किया था। डोकलाम पठार का कुछ हिस्सा भूटान में भी पड़ता है। भूटान ने भी चीन की इस कोशिश का विरोध किया। भूटान में यह पठार डोक ला कहलाता है, जबकि चीन में डोकलांग। भूटान और चीन के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं है। भूटान को अक्सर ऐसे मामलों में भारतीय सैन्य और राजनयिक सहयोग मिलता रहा है। लिहाजा, भारतीय सेना ने इस बार भी चीनी सैनिकों के सड़क निर्माण की कोशिशों का विरोध किया है। चीन को यह बात नागवार गुजरी है।

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