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भाजपा ने किया भारत बंद का झूठा प्रचार, केवल धरना प्रदर्शन करेगा विपक्ष

भाजपा यह भ्रम फैला रही है कि कांग्रेस और अन्य दलों ने ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। विपक्षी दल कल ‘जन आक्रोश दिवस’ मनाएंगे और देशभर में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
Author नई दिल्ली | November 27, 2016 23:16 pm
पुतला फूंकते कांग्रेस कार्यकर्ता।

बड़े नोटों को अमान्य करने के सरकार के ऐलान के विरोध में कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने सोमवार को ‘जन आक्रोश दिवस’ दिवस का ऐलान किया है, जिसके तहत देश भर में विरोध प्रदर्शन की अपील की गई है। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को यह स्पष्ट किया कि इस अभियान को लेकर यह गलत प्रचार कर रही है कि विपक्ष ने ‘भारत बंद’ की अपील कर रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने करीबियों को लाभ पहुंचाने के लिए विमुद्रीकरण का राजनीतिक कदम उठाया, जिसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई बताया जा रहा है।

जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘धमाका’ राजनीति में विश्वास करते हैं। उनको लगता है कि काला धन का मुद्दा भुनाने के लिए विमुद्रीकरण के कदम को वे उत्तर प्रदेश के चुनाव में भुना ले जाएंगे। श्री रमेश ने दावा किया कि विदेशों में जमा कालाधन वापस लाने के प्रधानमंत्री के चुनावी वादे पर सरकार नाकाम रही। इस नाकामी को ढंकने के लिए विमुद्रीकरण का ‘नाटकीय’ कदम उठाया गया। अब इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के रूप में बेचा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अवैध तरीकों से धन जमा करने वाले लोगों को परेशानी नहीं हो रही है। परेशानी सिर्फ आम लोगों को हुई है। उन्होंने कहा, ‘दुर्भाग्य से जिन लोगों पर हमले की जरूरत थी, वे बचकर निकल गए। सूट-बूट वाले लोगों का एक वर्ग अब भी विलासिता की जिंदगी जी रहा है।’ उन्होंने दावा किया कि भाजपा यह भ्रम फैला रही है कि कांग्रेस और अन्य दलों ने ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। विपक्षी दल कल ‘जन आक्रोश दिवस’ मनाएंगे और देशभर में विरोध प्रदर्शन करेंगे।

रमेश ने कहा कि नौ नवंबर से आर्थिक गतिविधियां ठहर गई हैं। इस मुद्दे पर संसद में चर्चा से प्रधानमंत्री भाग रहे हैं। उन्होंने नए नोट लाने में सरकार की तैयारी पर सवाल उठाया और कहा कि अनुमान के मुताबिक नए नोटों की छपाई में और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में 250 दिन लग सकते हैं। रमेश ने ‘कैशलेस’ या ‘लेसकैश’ समाज के प्रधानमंत्री के आह्वान की आलोचना करते हुए कहा कि भारत में बड़ी संख्या में लोग दैनिक लेनदेन में नकदी का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की चीजों में वक्त लगता है और झटके देकर लोगों को मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुमानों के हवाले से कहा कि देश की कुल जारी मुद्रा में केवल 0.02 फीसद जाली नोट हैं। इसे खत्म करने का तर्क देकर देश की 80 फीसद जनता को परेशान कर दिया गया है।

 

 

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  1. B
    Birendra Kumar
    Nov 28, 2016 at 11:02 am
    यदि एक झूठ को बार बार प्रचारित किया जाय तो वह सत्य प्रतीत होने लगता है /
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग