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अपराध में लिप्त विधायकों पर कार्रवाई करें नीतीश: भाजपा

विपक्षी भाजपा ने मंगलवार को ‘बेचारा मुख्यमंत्री’ नीतीश कुमार को कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल सत्तारूढ़ पार्टी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करने की चुनौती दी..
Author पटना | January 19, 2016 23:40 pm
सुशील कुमार मोदी ने कहा-‘राज्य में राजद, जद (एकी) और कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष गठबंधन सरकार बनने के बाद अपराधियों के हौसले मजबूत हुए हैं। (पीटीआई फाइल फोटो)

विपक्षी भाजपा ने मंगलवार को ‘बेचारा मुख्यमंत्री’ नीतीश कुमार को कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल सत्तारूढ़ पार्टी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करने की चुनौती दी, ताकि यह लगे कि बिहार में कानून का शासन है। वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने संवाददाताओं से कहा-‘राज्य में राजद, जद (एकी) और कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष गठबंधन सरकार बनने के बाद अपराधियों के हौसले मजबूत हुए हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन के कई विधायकों के खिलाफ आपराधिक गतिविधियों को लेकर मामले दर्ज हुए हैं। नीतीश कुमार ऐसे तत्वों के सामने ‘बेचारा’ मुख्यमंत्री बन गए हैं।’

विधान परिषद में विपक्ष के नेता ने कहा कि लोग पहले लालू प्रसाद के कारण राजद से भयभीत थे, लेकिन अब जद (एकी) विधायकों ने भी खुलकर अपना बाहुबल दिखाना शुरू कर दिया है। मोदी की यह टिप्पणी एक जद (एकी) विधायक के पति के पुलिस स्टेशन से भाग जाने और एक अन्य जद (एकी) विधायक सरफराज आलम के खिलाफ राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन में एक दंपत्ति के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की पृष्ठभूमि में आई है। जद (एकी) विधायक बीमा भारती के पति अवधेश मंडल के पुलिस स्टेशन लॉक अप से भागने की घटना पूर्णिया में रविवार की रात हुई जब बीमा भारती और जद (एकी) सांसद संतोष कुशवाहा पुलिस स्टेशन में मौजूद थे। मंडल को हत्या के एक मामले में एक गवाह को धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

दूसरी घटना में सोमवार को अररिया जिले के जोकीहाट से विधायक आलम के खिलाफ पटना जीआरपी में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। उनके खिलाफ गुवाहाटी-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में एक दंपति के साथ बदसलूकी करने का आरोप है।

सुशील मोदी ने लोगों की समस्याएं सुनने के लिए मंगलवार से अपना ‘जनता दरबार’ शुरू किया। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि वे ‘बिहार में कानून का राज होने’ के अपने दावे के समर्थन में सत्तारूढ़ पार्टी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करें। सुशील मोदी ने कहा-‘यह मुख्यमंत्री के लिए अग्निपरीक्षा है।’ उन्होंने हालांकि सहयोगी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा की बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग से असहमति जताई और कहा कि अभी वह दौर नहीं आया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल जल्दी ही राज्यपाल रामनाथ कोविंद से मिल कर बढ़ते अपराध पर काबू पाने के लिए उनसे दखल का अनुरोध करेगा। उन्होंने कहा कि नई सरकार बनने के दो महीने के अंदर ही राज्य की छवि खराब होने लगी है।

मोदी ने कहा कि उनकी पार्टी ने बिहार में नयी सरकार के कामकाज के खिलाफ ‘छह महीने की हनीमून अवधि’ तक नहीं बोलने का फैसला किया था। उन्होंने कहा कि लेकिन दो महीने के अंदर ही अपराध की स्थिति ने हमें चुप्पी तोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। मोदी ने आरोप लगाया कि नीतीश सरकार अवधेश मंडल और सरफराज आलम को बचा रही है। उन्होंने कहा कि सरफराज आलम ने बचाव पेश किया कि वह राजधानी एक्सप्रेस में यात्रा नहीं कर रहे थे जिसमें दिल्ली के एक दंपति के साथ बदसलूकी की शिकायत दर्ज कराई गई है।

भाजपा नेता ने कहा कि इन दो घटनाओं के अलावा राजद और जद (एकी) विधायकों से जुड़ी ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने उस घटना का भी जिक्र किया जिसमें गोपालपुर के विधायक नीरज मंडल ने अपना वाहन रोके जाने पर कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी को धमकी दी थी। इसके अलावा उन्होंने राजद विधायक सरोज यादव द्वारा कथित रूप से एक पुलिस अधिकारी को धमकी दिए जाने का भी जिक्र किया। मोदी ने आरोप लगाया कि बिहार में कई हत्याएं और सत्तारूढ़ पार्टी विधायकों के आपराधिक कृत्यों को सुनकर निवेशक बिहार से विमुख हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कानून व्यवस्था की स्थिति के कारण फिल्मों के रात्रि शो में दर्शकों की संख्या में खासी कमी आई है।

सुशील मोदी ने कहा कि 2013 में जद (एकी) के भाजपा से अलग होने के से बाद ही अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में राज्य पिछड़ रहा है। उन्होंने कहा कि 2010 में राजग शासनकाल के दौरान त्वरित सुनवाई के जरिए 10 हजार से ज्यादा लोगों को दंडित किया गया और 2014 में यह संख्या घट कर छह हजार रह गयी जब सिर्फ जद (एकी) की सरकार थी।

प्रमुख पदों पर कमजोर पुलिसकर्मियों को तैनात किए जाने संबंधी राजद प्रमुख लालू प्रसाद की हालिया टिप्पणी का जिक्र करते हुए मोदी ने विकास वैभव और शिवदीप लांडे जैसे कुशल अधिकारियों के तबादले को लेकर सवाल किया। उन्होंने दावा किया कि जिलों में एक दर्जन से ज्यादा पुलिस अधीक्षक 55 साल से ज्यादा उम्र के हैं और वे अपराधियों का पीछा करने की स्थिति में नहीं हैं।

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