ताज़ा खबर
 

नीति आयोग की बैठक में नरेंद्र मोदी-नीतीश ने गर्मजोशी से मिलाया हाथ, अखिलेश और ममता नहीं पहुंचे

नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी गर्मजोशी से हाथ मिलाया। गौरतलब है कि दोनों नेता एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाते हैं और अक्सर एक-दूसरे पर प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से सियासी हमला करते हुए देखे जाते हैं।
Author July 15, 2015 17:48 pm

नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी गर्मजोशी से हाथ मिलाया। गौरतलब है कि दोनों नेता एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाते हैं और अक्सर एक-दूसरे पर प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से सियासी हमला करते हुए देखे जाते हैं।

कांग्रेस शासित नौ राज्यों के मुख्यमंत्री और पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश तथा ओडिशा के मुख्यमंत्री बुधवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की संचालन परिषद की बैठक से दूर रहे। इस बैठक में भूमि विधेयक समेत विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया।

नीति आयोग की संचालन परिषद की इस दूसरी बैठक में हालांकि, एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अलावा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने भाग लिया।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद भी बैठक में भाग लेने वालों में शामिल रहे। लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तमिलनाडु की जे. जयललिता, ओडिशा के नवीन पटनायक और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बैठक में नहीं पहुंचे।

नीति आयोग की संचालन परिषद में सभी मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल हैं जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं। मोदी ने विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक सहित विभिन्न मुद्दों पर राज्यों के साथ विचार करने के लिए यह बैठक बुलाई थी।

बैठक में गरीबी, स्वास्थ्य और केंद्र प्रायोजित योजनाओं जैसे मुद्दों पर भी विचार किया जाना था। कांग्रेस नेताओं ने इससे पहले कहा था कि पार्टी के मुख्यमंत्री इस बैठक में भाग नहीं लेंगे, ताकि सरकार को विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक के साथ आगे बढ़ाने से रोका जा सके।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. उर्मिला.अशोक.शहा
    Jul 15, 2015 at 6:12 pm
    वन्दे मातरम- जो नीति आयोग में नहीं आये क्या वो मुख्यमंत्री राज्य की जनता के हित चिंतक नहीं है ?विचार में विभन्नता हो सकती है और राज्योपर केंद्र अपना विचार थोप नहीं रहा राज्य अपना स्वतंत्र भूमि अधिग्रहण कानून बनाने के लिए स्वतंत्र है फिर इस तरह से केंद्र के साथ विचार आदान प्रदान का मौक़ा छोड़कर क्या हासिल हुआ?जो नहीं आये वो शायद वोट बैंक की राज नीति में उलझे है इसीलिए डर रहे है लेकिन क्या उनके राज्य की जनता उन्हें नहीं कोसे गी अगर विकास नहीं हुआ? उद्योग नहीं लगे? और रोजगार नहीं मिला तो?जा ग ते र हो
    Reply
  2. उर्मिला.अशोक.शहा
    Jul 15, 2015 at 6:19 pm
    वन्दे मातरम- शायद ऐसा लगता है जो मुख्यमंत्री नहीं आये उनकी पार्टी असमंजस में है की क्या करे? अब तक उन्हें पता चल जाना चाइये था की अब जाती धर्म की राजनीती कुछ काम की नहीं और देश की जनता विकास चाहती है. पद पद पर राज्योंको केंद्र की जरुरत महसूस होगी फिर इस तरह से मनमुटाव का कोई मतलब नहीं गौर तालाब है की यूपी,ओडिशा प बंगाल सभी राज्योमे बेरोजगारी चरमसीमा पर है लेकिन अगर शासक सिर्फ शतरंज की राजनीती करते रहे तो जनता का कल्याण होने से रहा अगर यह कदम गलत साबित हुआ तो जनता क्षमा नहीं करेगी जा ग ते र हो
    Reply
सबरंग