December 03, 2016

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एक साथ चुनाव की कवायद: नीति आयोग ने कहा- आधे राज्‍यों की सरकारों का कार्यकाल 15 महीने तक करना होगा छोटा

नीति आयोग के पेपर 'एनालिसिस ऑफ साइमल्टेनीअस इलेक्‍शंस: द व्‍हाट, व्‍हाई एंड हाऊ'' में सभी चुनाव एक साथ कराने का समर्थन किया गया है।

देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ आयोजित कराने के लिए आधे राज्यों की सरकारों का कार्यकाल तीन से 15 महीने तक छोटा करना होगा।

देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ आयोजित कराने के लिए आधे राज्यों की सरकारों का कार्यकाल तीन से 15 महीने तक छोटा करना होगा। वहीं बाकी राज्‍यों की विधानसभाओं का कार्यकाल एक साल तक बढ़ाना होगा। केंद्र सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग की ओर से तैयार की गर्इ रिपोर्ट में यह बात कही गई है। नीति आयोग के पेपर ‘एनालिसिस ऑफ साइमल्टेनीअस इलेक्‍शंस: द व्‍हाट, व्‍हाई एंड हाऊ” में सभी चुनाव एक साथ कराने का समर्थन किया गया है। यह पेपर बिबेक देबरॉय और किशोर देसाई ने तैयार किया है। इसके अनुसार लगातार चुनाव होते रहने से नीति निर्माण में बदलाव करने होते हैं, क्‍योंकि देश में संरचनात्‍मक सुधारों के बजाय अदूरदर्शी लोकलुभावन और राजनीतिक सुरक्षा के उपायों को ज्‍यादा प्राथमिकता दी जाती है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर लोकसभा व विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की पैरवी कर चुके हैं। इस संबंध में चुनाव आयोग भी कह चुका है कि वह इस तरह का कार्य करने में सक्षम है। इस मुद्दे पर सभी पार्टियों में सहमति बनाने के लिए वह बातचीत भी कर रहा है।

नीति आयोग की रिपोर्ट में दो चरणों में चुनाव कराने का सुझाव दिया गया है। इस सुझाव के तहत दो चुनावों के बीच 30 महीने या ढाई साल का अंतर हो। पहले चरण में अप्रैल-मई 2016 में लोकसभा के साथ ही 14 राज्‍यों के चुनाव कराए जाए। वहीं दूसरे चरण में अक्‍टूबर-नवंबर 2021 में बाकी के राज्‍यों में मतदान हो। रिपोर्ट में राज्‍यवार विधानसभाओं का बंटवारा भी किया गया है। एक साथ चुनाव कराने के फायदों में बताया गया है कि इससे पैसों की बचत होगी। एक साथ चुनाव पर लगभग 4500 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है। गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनावों पर 3870 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण में चुनाव कराने पर छत्‍तीसगढ़, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान की विधानसभा का कार्यकाल 5 महीने, मिजोरम 6 महीने और कर्नाटक का 12 महीने बढ़ाना होगा। वहीं हरियाणा व महाराष्‍ट्र विधानसभा का कार्यकाल 5 महीने, झारखंड का 7 महीने और दिल्‍ली विधानसभा का कार्यकाल 8 महीने कम करना होगा। वहीं दूसरे चरण में एक साथ चुनाव कराने पर तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पुदुचेरी, असम और केरल विधानसभा का कार्यकाल 6 महीने, जम्‍मू कश्‍मीर का 9 महीने और बिहार का 13 महीने कार्यकाल बढ़ाना होगा। इधर, गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्‍तराखंड का 3 महीने, उत्‍तर प्रदेश का 5 महीने, हिमाचल प्रदेश व गुजरातत का 13 महीने और मेघालय, त्रिपुरा व नागालैंड का कार्यकाल 15 महीने घटना होगा।

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First Published on November 27, 2016 4:11 pm

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